सोमवार, 26 नवंबर 2012

अब बस भी करो भगवान...

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वह २४ साल से क्रिकेट खेल रहा है...
वह एक सौ नब्बे से ज्यादा टेस्ट खेल चुका है...
वह साढ़े चार सौ से ज्यादा वन डे भी खेल चुका है...
उसने टेस्ट और वन डे में सबसे ज्यादा रन और शतक बनाये हैं...  
उसके नाम अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सौ से ज्यादा शतक हैं...


उसे क्रिकेट का भगवान भी कहा जाता है...
यह भगवान अपने चालीसवें साल में चल रहा है...

वह कहता है कि वह तब तक खेलता रहेगा जब तक उसे खेल में आनंद आता रहेगा...


वह आजकल बहुत ही खराब फॉर्म से गुजर रहा है...
पर फॉर्म अस्थायी होती है और क्लास स्थायी...
वह इतना बड़ा खिलाड़ी है कि हो सकता है कि अगली ही पारी में 'अपनी यादों के सहारे' ही सैकड़ा जड़ दे...


पर अब मुझे और मुझ जैसे कइयों को उसके खेल में आनंद नहीं आता...
उसका आज का खेल उसे भगवान के पद से उतार किसी आम खिलाड़ी के समकक्ष खड़ा कर देता है...
कुछ भी कहो, उसमें अब वह बात कहीं नहीं है...


उम्र भगवान को ी नहीं बख्शती...
अब उसका आनंद एक नये खिलाड़ी का रास्ता रोके खड़ा है...
टीम के सामने अभी और चुनौतियाँ आने वाली हैं...


मैं हाथ जोड़, पूरे सम्मान से अपने भी भगवान से कहना चाहता हूँ...




अब बस भी करो न, भगवान !


आप क्या कहते हैं ? 






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