गुरुवार, 19 जुलाई 2012

क्या 'ब्लॉगवुड' आबाद रहने के लिये 'आइटम' पर निर्भर हो गया है ?

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इस १६ अगस्त को तीन साल अपने भी हो जायेंगे ' ब्लॉगवुड ' में...


एक पैटर्न देखा है शुरू से... जब कभी कोई विवाद चल रहा होता है, चाहे व्यक्तिगत हो या सामूहिक, या फिर किसी खास ब्लॉगर या समूह के खिलाफ लामबंद हो बहिष्कार-बहिष्कार का खेल खेला जा रहा हो... अचानक से सोये पड़े ब्लॉगवुड में एक जान सी आ जाती है... खूब पोस्टें आती हैं, पाठक बढ़ते हैं, टिप्पणियाँ गति पकड़ लेती हैं, कुल मिलाकर वीराने में रौनक सी आ जाती है... और जब कहीं कोई विवाद नहीं हो रहा होता तो एक किसिम की वीरानगी सी आ जाती है अपने ब्लॉगवुड में... :(


क्या मेरी तरह आपको भी नहीं लगता कि 




क्या 'ब्लॉगवुड' आबाद रहने के लिये विवाद रूपी ' आइटम ' पर निर्भर हो गया है ?














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19 टिप्‍पणियां:

रचना ने कहा…

if you see blog medium as a medium to discuss and also act then this is all the more necesaary here

why should every thing be called controversy

it can also be called a "movement"

some become a successful movement and other fizzle out depending on how competent the leader is

but what is wrong is that when people stoop down and try and target famlies of blogger , their life style , their being woman and being characterless in case something is written as bold ,

discussions should be impersonal , and if some one has done a mistake in past and they feel so they should say sorry on the same platform ie their blog and finish the matter

but this does not happen groups are only made to get comments and give comments

सुज्ञ ने कहा…

@क्या मेरी तरह आपको भी नहीं लगता कि...
क्या 'ब्लॉगवुड' आबाद रहने के लिये विवाद रूपी ' आइटम ' पर निर्भर हो गया है ?

नहीं लगता जनाब!! क्योंकि ब्लॉगिंग हम गम्भीरता से लेते है, मात्र मनमौज का साधन नहीं!!
इसलिए भी कि हमारी दृष्टि रतौन्ध भरी नहीं न विशेष रंग के चश्मे से देखते है।
छदमावरण व छुपी मंशाएं यहाँ मूल्यों को चोट पहुचाती है ऐसी बातों का विरोध होना ही चाहिए और उसी से विवादों का सर्जन होता है। अगर ऐसे चिंतन और विमर्श ब्लॉगजगत के आबाद रहने के कारण बनते है तब भी इसमें कोई बुराई नहीं।

सतीश पंचम ने कहा…

@छदमावरण व छुपी मंशाएं यहाँ मूल्यों को चोट पहुचाती है ऐसी बातों का विरोध होना ही चाहिए और उसी से विवादों का सर्जन होता है। अगर ऐसे चिंतन और विमर्श ब्लॉगजगत के आबाद रहने के कारण बनते है तब भी इसमें कोई बुराई नहीं

Yess!!!

यही है परफेक्ट विव्यू..... धन्यवाद सुज्ञ जी, मेरे मन की बात कहने के लिये।

जो लोग रात-दिन घूम घूम कर मिशनरी अंदाज में ब्लॉगिंग में तमाम तरह का नैतिक पंवारा पढ़ाते रहते हैं, अल्ल्म गल्लम वाद लेकर टाईम पास करते हैं... ये होना चाहिये वो होना चाहिये, उनके छद्मालय को उजागर करने का सशक्त माध्यम है ब्लॉगिंग और इस तरह के मंथन से परहेज नहीं करना चाहिये।

वैसे भी ऐसे लोग उस तरह के हैं जिन्हें बाहर कोई नहीं पूछता इसलिये चाहते हैं कि वर्चुअल वर्ल्ड में तनिक रौब दाब बनाया जायु.....तनिक दबी कुंठाओं को, अहम को खुराक पहुंचाई जाय....सो जाहिर है ऐसी शख्सियतें खुद-ब-खुद आइटम के तौर पर नजर आएंगी....फिर तो वही होना है जो फिल्मी आइटमों पर होता है...लहालोटीकरण....हत तेरे धत तेरे....ब्ला ब्ला :)

और हां, गंभीर ब्लॉगरी अब भी चल रही है, लोग ब्लॉगिंग को गहन-गंभीर ढंग से पढ़ते हैं लिखते हैं, वो तो आइटमीकरण के चलते नेपथ्य में चले गये हैं वरना अच्छे अच्छे ब्लॉग हैं इसी ब्लॉगधरा पर.

सञ्जय झा ने कहा…

post ki bhawna ko samjhne ke liye monitor bhai ka abhar aur tippani ka marm samjhne ke liye pancham da ka abhar........


pranam.

Arvind Mishra ने कहा…

जीवन्तता से परहेज क्यों ?:-)

anshumala ने कहा…

@ छदमावरण व छुपी मंशाएं यहाँ मूल्यों को चोट पहुचाती है ऐसी बातों का विरोध होना ही चाहिए और उसी से विवादों का सर्जन होता है। अगर ऐसे चिंतन और विमर्श ब्लॉगजगत के आबाद रहने के कारण बनते है तब भी इसमें कोई बुराई नहीं।
इससे हमारी भी सहमती ! किन्तु सुज्ञ जी ने किसी और मायने में ये बात कही सतीश जी ने किसी और मायने में इससे सहमती जताई और मैंने किसी और अब इन तीन मायनों को समझने का प्रयास करे :)

सुज्ञ ने कहा…

इसका अर्थ यह है कि यह कथन सर्वस्वीकार्य सत्य बन पड़ा है। प्रवीण जी, रचना जी, अरविन्द जी तीनों ने इसका खण्डन भी नहीं किया। अब रही मायनों की बात तो वाक्य में पहले से ही "छुपी मंशाएं" सम्मलित है, यह केमिकल स्वतः ही "छुपी मंशाएं" पर जाकर सक्रिय होगा। मायने या मंशाएं जानने का श्रम लेने की क्या आवश्यक्ता?

ali ने कहा…

ये लीजिए आपके विवाद के अंदेशे पे भी विवाद* शुरू :)

नोट :
हमारे कमेन्ट में प्रयुक्त 'तारांकित विवाद' शब्द का अर्थ असहमति से ही लें और आपके वाले विवाद शब्द का अर्थ वो , जो भी टिप्पणीकार मित्र और आप कहें :)

अदा ने कहा…

'आईटम' तो हर फिल्म में होता भी नहीं है...इसके बिना भी फिल्में चल ही रहीं हैं और सफल भी हो रहीं हैं...
आपने विमर्श को 'आईटम' का नाम दिया बढ़िया है जी, कम से कम इसी बहाने कुछ आईटम किसिम के लोग ऐसे आईटम में हिस्सा लेंगे...
ऐसे विमर्श बहुत ज़रूरी हैं...सिर्फ़ लिखते जाना और उनपर कोई बात न होना, कोई मायने नहीं रखता, उससे अच्छा तो कोई किताब ही पढ़ ले और लेखक से कुछ भी न कहे... ब्लॉग ऐसा सशक्त मंच है, जिसकी उपयोगिता ऐसे विमर्शों से पूरी होती है...आत्मावलोकन का अवसर मिलता है, साथ ही बहुत सारी भ्रांतियाँ दूर होतीं हैं... इसलिए यह 'आईटम' तो इस फिलिम में मांगता है...

Pallavi saxena ने कहा…

जी हाँ मुझे भी ऐसा ही लगता है आज कल विवादआस्पद पोस्ट पर ही लोग ज्यादा जाते हैं ब्लोगवूड भाषा में बुलुन तो जहां विवादा वहाँ समझो पिक्चर हिट वरना बॉक्स ऑफिस पर तोते उड़ा करते हैं।

रचना ने कहा…

प्रवीण ने विवाद को आइटम कहा हैं , और एक कमेन्ट में ब्लोगर को आइटम कहा जा रहा हैं यही फरक हैं सोच का .

अजय कुमार झा ने कहा…

हमने आपकी पोस्ट का एक कतरा सहेज़ लिया है , आज ब्लॉग बुलेटिन के पन्ने को खूबसूरत बनाने के लिए । देखिए कि मित्र ब्लॉगरों की पोस्टों के बीच हमने उसे पिरो कर अन्य पाठकों के लिए उपलब्ध कराने का प्रयास किया है । आप टिप्पणी को क्लिक करके हमारे प्रयास को देखने के अलावा , अन्य खूबसूरत पोस्टों के सूत्र तक पहुंच सकते हैं । शुक्रिया और आभार

S.M Masum ने कहा…

यह आइटम पोस्ट ही तो आज के ब्लोगर का विटामिन है :) जिस दिन ऐसे विटामिन की ताक़त को ब्लोगर महसूस करना बंद कर देगा | नज़ारा ही बदल जाएगा.

राजेश उत्‍साही ने कहा…

आपकी बात से सहमति है। जैसे ही कोई विवाद होता है सब लोग पिल पड़ते हैं उस पर पोस्‍ट लिखने के लिए और कमेंट करने के लिए। बाकी दिनों में सब अपने अपने में मगन।
यह वैसा ही है जैसे हर दुर्घटना के बाद प्रशासन कहता है आगे ऐसी घटनाएं न हों इसके प्रयास किए जाने चाहिए।

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

राह चलते भी कहीं विवाद देख कर कदम रूक जाते हैं। कहीं कोई धर्मात्मा अपनी मंडली सजाकर उपदेश दे रहा होता है तो कदम आगे बढ़ जाते हैं। फुर्सत और शौक पर भी बहुत सी बातें निर्भर करती हैं। विवाद भी कई प्रकार के होते हैं। सभी में सभी नहीं कूद पड़ते। ब्लॉग जगत भी इसी समाज का अंग है। लेकिन यह मान कर चलिये कि कोई ब्लॉगर मात्र विवादित पोस्ट लिखकर अधिक समय तक सर्वप्रिय नहीं रह सकता। एक अच्छा कमेंट, कई वाहियात कमेंटस् पर भारी पड़ता है।

रचना ने कहा…

देखो आज फिर लड़ रहे हैं वो दोनों
लड़ने भी दो न खुलकर उन्हें
दे लेने दो ढेर सारी गालियाँ भी
कही-अनकही, भद्दी औ बेढंगी सी
just remembered this today all of a sudden
http://praveenshah.blogspot.com/2011/01/blog-post_10.html

प्रवीण शाह ने कहा…

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Rachna ji,

... :)

I am really glad and sincerely thankful to you that you remembered and pointed this out, but, I am just bringing out a particular pattern to the notice of my readers, I never claimed that I have never done so... the saying goes 'इन्सान और कुछ नहीं, बस, गल्तियों का जीता जागता पुतला है'... Anyway, I am always trying to 'Grow up'... and I don't think anybody should get offended if I also expect others to at least try it !



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रचना ने कहा…

Praveen
It was just all of a sudden i recollected about your previous post
And I myself burst out laughing and then just shared it with you
Happy that you took in the "right spirit":)

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

ब्लागवा तो हिन्दी में है न!