सोमवार, 2 जुलाई 2012

क्या हम एक ईमानदार मुल्क हैं ?










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भ्रष्टाचारी का आत्मविश्वास तगड़ा है यह कहते हैं सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी , उनका मानना है कि अब हमारा समाज कदम-कदम पर भ्रष्टाचार से सामना होने पर कतई विचलित नहीं होता, वे सवाल करते हैं कि क्या हमारा समाज 'सादा जीवन उच्‍च विचार' का मंत्र भूलता जा रहा है?



इस पर मेरा आकलन यह है कि खुशामद, सिफारिश, बखशीश व घूस यही चार चीजें ही तो हैं जो हिन्दुस्तान को चला रही हैं सदियों से... ईमानदारी व ईमानदार आदमी का पाया जाना यहाँ हमेशा से अपवाद रहा है...



आप क्या कहते हैं इस बारे में...




क्या हम वाकई एक ईमानदार मुल्क हैं ?
 
 
 
 
 
 
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9 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

हम तो एक लम्बा सा एकालाप अपने ब्लॉग पर ही अभी जुमा जुमा दो चार रोज पहले ही कर लिए थे..
निश्चय ही हम आकंठ भ्रष्ट जन हैं !

आशीष श्रीवास्तव ने कहा…

दिल को खुश रखने को गालिब ये ख्याल अच्छा है!

anshumala ने कहा…

मुझे ऐसा लगता है की हर बच्चा ईमानदार ही पैदा होता है बेईमानी वो यहाँ आ कर सीखता है , और बेईमानी अभी भी हमरे खून में नहीं रची बसी है, जैसे हमने बेईमानी के खिलाफ आवाज उठाने में देर कर दी और ज्यादातर तब तक भ्रष्ट बन गये , अब रोकथाम में देर की और ये मान कर चुपचाप बैठ गये की सब भ्रष्ट है इलाज नहीं हो सकता चुप मार बैठ जाओ तो ये जरुर एक दिन हमारे जीन, खून सब में घुस जायेगा | तो नर हो ना निराश करो मन को ( और दूसरो को भी ) कुछ ईलाज करो !!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सदियों से नहीं मात्र १०००-१२०० सो वर्षों से ही ऐसा है ... जब से आक्रांता इस देश में शाशन करने लगे ...

ali ने कहा…

नहीं !

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice post.

Pallavi saxena ने कहा…

हमेशा से ऐसा ही रहा है यह पूरी तरह तो सच नहीं लगता है हाँ आज की तारीख में ज़रूर यही बात सच है

VICHAAR SHOONYA ने कहा…

nahin bilkul nahin.

Er. Shilpa Mehta ने कहा…

:)