शुक्रवार, 9 मार्च 2012

क्या यही है अन्ना इफेक्ट ???

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 कुछ खबरे हैं :-


१- उत्तराखंड के विधानसभा चुनाओं से ऐन पहले 'टीम-अन्ना' ने मतदाताओं को जागरूक करने के लिये सघन प्रचार किया।

२- 'टीम-अन्ना' के सदस्यों ने राज्य में एक साफ सुथरा प्रशासन व टीम-अन्ना को मान्य लोकायुक्त कानून बनाने के लिये मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवनचंद्र खंडूरी की प्रशंसा की।

३- टीम अन्ना के ही कुछ सदस्यों ने भ्रष्टाचार के कथित आरोपों के चलते पद से मुक्त किये गये पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' पर निशाना भी साधा जिसके जवाब में 'निशंक' द्वारा उन पर मानहानि का मुकदमा ठोंकने की धमकी दी गई।





अब परिणाम देखिये क्या आता है :-


१- डोईवाला सीट से पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने शानदार जीत दर्ज की।

२- कोटद्वार सीट से अप्रत्याशित रूप से मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी चुनाव हार गये।





क्या यही है अन्ना इफेक्ट ?



(अच्छा ही है कि यह लोग ज्यादा जगहों पर नहीं गये लोगों को जागरूक करने)... :)





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8 टिप्‍पणियां:

Shah Nawaz ने कहा…

:-)

अजय कुमार झा ने कहा…

ई दुन्नो रिजल्ट के बाद अन्ना इफ़्फ़ेक्ट एकदम खतम हो गया समझिए जी । इसलिए अब उनको चुप्पे चाप मस्त होके बैठ जाना चाहिए ,जैसे हम आप बैठे हैं ।

वैसे भी कल एक ठो आई पी एस को ट्रक्टर से कुचल दिया गया काहे से कि ऊ विरोध कर रहे थे , बुडबक थे , पता नय किससे इफ़्फ़ेक्टेड थे ..इत्ता कैलकुलेसन वाला रिजल्ट नय पढे होंगे कभी न ।

Er. Shilpa Mehta ने कहा…

1. kya lokpriyata hi ek maanak hai sahi aur galat hone ka ?

2. kya jeet hui ya haar, sirf yahi nirnay karega ki prayas sahi tha ya galat ?

प्रवीण शाह ने कहा…

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@ शिल्पा जी,

आपकी बातें अपनी जगह सही हैं... पर यही टीम दहाड़ती थी मीडिया के Ever eager माइक्रफोनों और कैमरों के सामने कि जो लोकपाल पर हमारी लाइन को डिट्टो नहीं करेगा... उसे प्रचार कर नेस्तनाबूद कर देंगे... कैमरा सामने आते ही यह अपने को इस महादेश के जनमत का एकमात्र भोंपू समझने व उसी जैसा बर्ताव करने लगते हैं... अभी चुनाव नतीजे आने से पहले बाकायदा हाथ हिला हिला कर दिल्ली गये यह लोग... और अब नतीजे आने के बाद जुबान को साँप सूँघ गया है सबकी... संसद को तक खुली चुनौती देते हैं ये... अब इन्हें लगता है कि चुनाव का लोकतांत्रिक तरीका ही सही नहीं है... वोटर ने इनको इनकी सही हैसियत दिखा दी है...




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shi ने कहा…

लक्ष्य एक हो तो काम करने में आसानी होती है. आपके लक्ष्य से भटकते ही जो लोग आपसे जुड़ रहे हैं, वे भ्रमित होने लगते हैं. कुछ यही हाल अन्ना टीम के साथ रहा. अब उसका असर दिखने लगा है.

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

अहंकार खतम हुआ!

(अच्छा ही है कि यह लोग ज्यादा जगहों पर नहीं गये लोगों को जागरूक करने)... :)

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

साथ यह भी कि
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भोजपुरी चुटपुटिहा

सब जगहा हारत कांग्रेस मणिपुर कइसे जीत लिहलसि?
प्रचार करे खातिर राहुल गाँधी ना गइल रहले।
- साभार अँजोरिया से

हिन्दी अनुवाद: सभी जगहों से हार रही कांग्रेस मणिपुर में कैसे जीत गई ? प्रचार करने राहुल गाँधी नहीं गए थे।

ali ने कहा…

:)