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अपने इलेक्ट्रानिक मीडिया ने कमी तो नहीं छोड़ी थी कहीं से भी, किसी चैनल ने लगाये थे पचास कैमरे और पचास रिपोर्टर और किसी ने सौ कैमरे और पचास रिपोर्टर... हर पल की खबर भी दी जा रही थी... अन्ना को लगा जुकाम पूरे देश की चिन्ता बनता जा रहा था... चैनलों के क्रीपर दिखा रहे थे... अन्ना का पल्स रेट ७२ प्रति मिनट, ब्लड प्रेशर १५६/९० व तापमान १०० डिग्री फैरनहाइट... तीन दिन के अनशन के बाद सोनिया गाँधी के दरवाजे पर धरना देने की घोषणा भी की गयी थी... जेल भरो भी चलने वाला था...
पर अचानक ही समेट लिया गया सब कुछ... तम्बू, कनात व दरियाँ भी... बिना कुछ ठोस वजह बताये...
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अपने इलेक्ट्रानिक मीडिया ने कमी तो नहीं छोड़ी थी कहीं से भी, किसी चैनल ने लगाये थे पचास कैमरे और पचास रिपोर्टर और किसी ने सौ कैमरे और पचास रिपोर्टर... हर पल की खबर भी दी जा रही थी... अन्ना को लगा जुकाम पूरे देश की चिन्ता बनता जा रहा था... चैनलों के क्रीपर दिखा रहे थे... अन्ना का पल्स रेट ७२ प्रति मिनट, ब्लड प्रेशर १५६/९० व तापमान १०० डिग्री फैरनहाइट... तीन दिन के अनशन के बाद सोनिया गाँधी के दरवाजे पर धरना देने की घोषणा भी की गयी थी... जेल भरो भी चलने वाला था...
पर अचानक ही समेट लिया गया सब कुछ... तम्बू, कनात व दरियाँ भी... बिना कुछ ठोस वजह बताये...
कुछ समझ सकें हों, तो आप ही बताइये कि क्यों किया गया ऐसा ?
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इस माहौल में हमारे कई मित्रों सहित अन्ना को सहानुभूति की जरूरत है!
प्रत्युत्तर देंहटाएंजश्न मनाइए कि लोकपाल लल्लू लोकपाल बन गया , क्योंकि आखिर ये भी तो किसी न किसी को मनाना ही है ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंअब तो मोगाम्बो खुश :)
प्रत्युत्तर देंहटाएंकिराये की भी चिंता थी। मैदान, दरी, तम्बू, कनात सबका तो चंदा देना होता न!
प्रत्युत्तर देंहटाएंजेल भरो आंदोलन की स्ट्रेटजी से उपजे सच ने कदम जमीन पे ला दिये :)
प्रत्युत्तर देंहटाएंहा हा हा , अण्णा की वजह से फिर भी बहुत कुछ हो गया है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंथोड़ी एकरसता सी भी ख़त्म हो गई है मीडिया से।
वर्ना कुछ होना हुआना था ही नहीं अण्णा से या किसी भी आंदोलन से।
देश ओवरहालिंग मांग रहा है। ऐसे में पैबंद से काम चलने वाला नहीं है और यहां तो लोग पैबंद के लिए भी तैयार नहीं हैं।
नव-वर्ष आपको व आपके समस्त परिवार के लिये मंगलकारी हो इसी शुभकामना के साथ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंआज आपकी पोस्ट की चर्चा की गई है अवश्य पढ़ियेगा... आज की ताज़ा रंगों से सजीनई पुरानी हलचल बूढ़ा मरता है तो मरे हमे क्या?
iska jawab to nahin....nav varsh ki shubhkamnaye.
प्रत्युत्तर देंहटाएंwelcome to मिश्री की डली ज़िंदगी हो चली
ओह!ऐसा भी होता है कभी कभी.
प्रत्युत्तर देंहटाएंसब कुछ अपने हाथ में नही.
नववर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाएँ.
बिना विचारे जो करे सो पीछे पछताय,अन्ना जी टीम रद्दी है,....
प्रत्युत्तर देंहटाएंनया साल सुखद एवं मंगलमय हो,..
आपके जीवन को प्रेम एवं विश्वास से महकाता रहे,
मेरी नई पोस्ट --"नये साल की खुशी मनाएं"--