रविवार, 11 दिसंबर 2011

'हिन्दी ब्लागिंग', बोले तो- निट्ठल्ले लोगों का आत्मालाप... समाज के दोयम दर्जा प्राप्त लोगों का प्रलाप ???

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सच कहूँ तो ब्लॉगवुड में एकदम खरी-खरी लिखने में अरविन्द मिश्र जी का कोई सानी नहीं... आदरणीय ज्ञानदत्त पान्डेय जी की इस पोस्ट पर लिखी गई उनकी इस टिप्पणी को देखिये जरा...


" हिन्दी ब्लागिंग दरअसल निट्ठल्ले लोगों का आत्मालाप है ..समाज के दोयम दर्जा प्राप्त लोगों का प्रलाप -काम काज के लोग कब का ब्लागिंग छोड़ चुके -कुछ तो काल के बियाबान में खो गए कुछ बेहया यहाँ दिख कर भी अब लिखते नहीं …एक अपरिपक्व पाठक वर्ग के लिए क्यों बहुमूल्य समय जाया किया जाये …"

एक निर्मम आकलन है यह, खास तौर से एक ऐसे ब्लॉगर की ओर से जो स्वयं  हिन्दी ब्लॉगिंग के एक बड़े नाम हैं और पाँच ब्लॉगों से सक्रिय तौर पर जुड़े हैं... और सबसे बड़ी बात यह भी है कि कुछ हद तक हकीकतबयानी भी है यह आकलन...


आज का अपना सवाल इसी बात पर है...




जो न निठल्ला है और न ही समाज से दोयम दर्जा प्राप्त... क्या उसके लिये नहीं है हिन्दी ब्लॉगिंग... और यह 'परिपक्व पाठक' कैसे और कब तक मिलेगा हिन्दी ब्लॉगिंग को ... :))




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29 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लोगिंग का एक पहलु यह भी है जो मिश्र जी ने बताया । यह विषय वास्तव में बड़ा उलझा हुआ सा है । यहाँ लोग बहुत अपेक्षाएं लेकर आते हैं । काफी समय भी लगाते हैं । फिर एक दिन भ्रम का गुब्बारा फूट जाता है ।

    आखिर और भी ग़म हैं ज़माने में ।

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  2. Paripakv log to unki kavat blogging chhod chuke hain...aur un paripakvon main jo ab bhi yahan hain wo 'behaya' hain...

    Aaj ka nasamajh bachcha hi kal ka samajhdaar baba-dadi banega...to kaun paripakv, kaun apripakv....
    Yahan sab baraber hain....

    Deepak Shukla..

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  3. Kucch baato se sehmat, kuchh se asahmat... Kuchh achchhe blogger avashy bloging chhod chukey hain, leking bloging nithhalle logo kaa kaam nahi hai aur naa hi blogger doyam darje ke log hain...

    Blogging ek taakat hai aur jald hi log is baat ko samjhenge...

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  4. कुंआ ख़ुद ही खोदना होगा श्रीमान
    प्रिय प्रवीण जी ! आपने पूछा है कि परिपक्व और गंभीर पाठक हिंदी ब्लॉगिंग को कब मिलेंगे ?
    ... एक तो आदरणीय अरविंद मिश्रा जी और एक आप ख़ुद तो हैं ही परिपक्व और गंभीर ब्लॉगर।
    दो तो यही मिल गए।
    श्री अजित वडनेरकर जी जैसे और भी कई नाम इसी श्रेणी में हैं।

    हम तो अपने बाग़ से कच्चे आम लाकर रज़ाई में दबा देते हैं और उन्हें ख़ुद पकाते हैं। सो पकाने का काम हमें करना है। यह मानकर चला जाएगा तो परिपक्व पाठक ज़रूर मिलेंगे।
    जो लोग यह उम्मीद कर रहे हैं कि यह काम ख़ुद हो जाए तो ऐसा होने वाला नहीं है और न ही कभी ऐसा होगा कि दोयम दर्जे के पाठक हिंदी ब्लॉगिंग से रूख़सत हो जाएंगे।
    दोयम दर्जे के पाठक ही हमारे लिए रॉ मैटेरियल हैं। इन्हें ढालने की ज़िम्मेदारी उनकी है जो ख़ुद को परिपक्व मानते हैं।
    जो यह सेवा नहीं करते,
    वे अपने पद की गरिमा को नहीं जानते और न ही अपने कर्तव्य को पहचानते हैं।
    जब इमाम ही नाक़िस हो अर्थात मार्गदर्शक ही ग़ाफ़िल हो तो कारवां के भटकने की शिकायत फ़ुज़ूल है।

    आभार !

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  5. the word nithala chintan was first used by blogger late dr amar kumar and even his blog is named nithala chintan

    he was the one who used to say that bloging is nithala chintan and nothing more

    you as blogger have always said that there is no one big or small in hindi bloging and here you are tagging another blogger as a big name in hindi bloging ???

    who says there are no serious readers of hindi blogs
    yes there are no serious discussions on hindi blog because people stoop down to personal slanging here and very specially against woman

    hindi bloging lost track because of "family " every one got related and any one who objected was ridiculed

    here you can find mother , daughter sister brother

    bhai , behan , maa , didi
    and to top it you who does not believe in god calls people as dev !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

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    @ रचना ji,

    1- I think that I have explained it earlier also why I call him 'Dev'. I offered to call you 'Devi', but, you did not agree to that... :)

    2- He is a big name in Hindi blogging and so are You, this is a fact and I don't think there can be any arguments over this.

    3- Yes, I agree with you that Hindi Blogging is losing track because most of us have created new relations in Blogwood like Guru, Shishya, mother , daughter, sister, brother, bhai , behan , maa , didi, bhaiyya, beta etc. And when you are dealing with 'relatives' of virtual world, your objectivity as a blogger suffers.



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  7. प्रवीण जी ,
    अरविन्द जी की टिप्पणी का मर्म वे ही जाने पर हिंदी ब्लॉग जगत का मालिकाना हक़ है ही किसके पास ? किसको यह हक़ है जो मुझसे कहे कि , क्या लिखूं क्या ना लिखूं ? क्यों और किसको पढूं ? क्यों और किसे प्रतिक्रिया दूं ? किसको क्या संबोधन दूं और क्यों ना दूं ? :)

    कचरा और उर्वरक ब्लागिंग के मानदंड कौन तय करने वाला है यहां और किस अधिकार से ? :)

    एक अजीब सी प्रवृत्ति है , लोग स्वयंभू आचार संहिता निर्धारक बन बैठते हैं :)

    अपनी व्यक्तिगत खुन्नस / कुंठायें दूसरे पर आरोपित कर दो बस :)

    यहां कोई ट्रेफिक पुलिस नहीं जो चौराहों पर ठिया बनाके ब्लागर्स की आवाजाही / रास्ते तय करने लग जाये ! हम सभी राहगीर हैं सो बेहतर हैं अपनी हद में रहें :)

    उत्तम / मध्यम / अधम ब्लागर्स की डिग्रियां कोई बांट रहा हो तो बताइयेगा वर्ना चलने दीजिए :)

    जो समाज में है और जैसा भी है , हूबहू वही ब्लॉग जगत में भी अभिव्यक्त होगा ! होके रहेगा :)

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    जो समाज में है और जैसा भी है , हूबहू वही ब्लॉग जगत में भी अभिव्यक्त होगा ! होके रहेगा :)

    अली साहब,

    हाँ यही 'हूबहू' अभिव्यक्त होना ही ध्येय होना चाहिये... जो कुछ भी मन में या दिल-दिमाग में है वही जस का तस ब्लॉग पर आये, प्रचलित फैशन या जनमत से अप्रभावित हुऐ... तभी ब्लॉगिंग की पहचान और ताकत दोनों बढ़ेंगी...



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  9. अली साहब से सहमत। लेकिन आदमी इतना सीधा भी नहीं होता कि वह जो है, वही व्यक्त करे।

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  10. हम आपके शुक्रगुजार हुए कि आपने यहाँ मुझे सही परिप्रेक्ष्य में उद्धृत किया और डॉ दराल साहब ने मेरे उक्त कथित पक्ष को और भी भाषित किया -यह मेरे मन में चल रहे अंतरद्वंद्व का एक पक्ष था -आप खुद देखिये हिन्दी ब्लागिंग अपने को अभी तक साबित नहीं कर पायी और चमक जाती दिख रही है -अगर एक कमिटमेंट की तरह अब इसे नहीं लिया गया तो अंतिम सांसों का पल दूर नहीं ...और खतरा तो सम्माननीयों से ही है जो परले दर्जे तक आत्मकेंद्रित है ,आत्मरति लीन हैं ,स्वयंभू बने बैठे हैं और ब्लागिंग की आचार संहिता निर्धारित कर खुद उस पर अमल नहीं करते ....मैंने यहाँ ब्लागिंग कैसे करें या न करें इस पर चिंतामग्न नहीं मगर इसके सामजिक अवदानों की विफलता,ब्लागरों और पाठकों की उत्तरदायित्वहीनता और आत्मकेंद्रिकता से जरुर दुखी हूँ .....आप और हम आपस में बात क्यों नहीं करते कभी ...मेरा नंबर तो आपको मालूम ही है -०९४१५३००७०६....बातचीत बर्फ पिघलने के लिए ही नहीं इस भ्रम जो कि काबिल दोस्तों द्वारा उतपन्न किया गया है कि आप और रचना सिंह जी वस्तुतः एक ही हैं को दूर करने के लिए भी -आशा है अन्यथा नहीं लेगें और मुझसे बात करेगें या नंबर दें मैं खुद बात कर लूँगा -ब्लागिंग की दशा तो अब देखी नहीं जाती ..... :(

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    बातचीत बर्फ पिघलने के लिए ही नहीं इस भ्रम जो कि काबिल दोस्तों द्वारा उत्पन्न किया गया है कि आप और रचना सिंह जी वस्तुतः एक ही हैं को दूर करने के लिए भी...

    देव,

    केवल मैं और रचना सिंह ही नहीं...मैं और अरविन्द मिश्र, मैं और अनवर जमाल, मैं और गौरव अग्रवाल, मैं और चंदन कुमार मिश्र, मैं और अन्य सभी भी... वस्तुत: एक ही हैं... और यह कोई भ्रम नहीं ठोस हकीकत है... और जब हम एक ही हैं तो काहे की बर्फ...

    फिलहाल मैं अपना एक आभासी अस्तित्व ही बनाये रखना चाहता हूँ, यह मजबूरी भी है मेरी, आशा है आप समझेंगे... :(




    ...

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  12. @यह तो मेरे लिए फिर से वही बड़ी असहजता वाली बात हो गयी -अनामता और सन्नामता वाली बहस का ....मैं अनामता पसंद नहीं करता मगर हाँ उन वैलिड आधारों के प्रति एक अनचाही सी स्वीकृति /सहिष्णुता भी विकसित करता रहा हूँ ...कारन कई ऐसे ब्लॉगर हैं जैसे उन्मुक्त जी ही जो अनाम रहकर बहुत करीब से हैं इतने करीब कि अनामता का बोध मिट गया है -अंततः प्रवीण जी यह चेतना ही है जो अपना वजूद स्थापित कर लेती है ,प्रभुता बना लेती है ..देह मिट जाती है -यह कोई दर्शन नहीं एक भोगा यथार्थ है ..मगर सबसे बड़ी त्रासदी तो यही है कि लोग चेतना -सामंजस्य नहीं बना पाते ....मैं आपसे चेतना से जुड़ना चाहता हूँ ....क्योंकि कुछ तंतु तो हैं जो उद्दीपित तो होते हैं हमारे बीच मगर फिर सहसा कनेक्शन कट जाता है ..जैसा अभी हुआ है ..मगर आप इत्ता जो जानते ही हैं मैं सायास आशावादी हूँ और मैदान छोड़ने वाला नहीं हूँ -आयी एम नाट अ क्विटर..दोस्ती का हाथ मेरा बढा ही रहेगा .....

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  13. @मेरी एक टिप्पणी शयद स्पैम की भेंट चली गयी ...निकालिएगा !

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  14. वाह। एक बात कहने फिर आ गया। कुछ दिन पहले फेसबुक पर लिखा था-

    मुझसे एक भाई ने कहा कि मेरे 'फेसबुक पर आने के बाद के अनुभव' क्या हैं? मैंने कहा-

    बता पाना मुश्किल है थोड़ा।
    बस ऐसे ही। मैं आज भी खाली समय वालों का, थोड़ा असामाजिक, कम सक्रिय, बेकार लोगों का काम मान रहा हूँ। जो मैं भी हूँ…

    और यही बात ब्लॉग के लिए भी मैं कहना चाह रहा हूँ।

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  15. ---रचनाजी ने हिन्दी ब्लोग्गिन्ग के बारे में अन्ग्रेज़ी में राय दी है ...हां यही तो है ब्लोगिन्ग की असलियत...वैसे उनकी राय...
    hindi bloging lost track because of "family " every one got related and any one who objected was ridiculed

    here you can find mother , daughter sister brother

    bhai , behan , maa , didi
    and to top it you who does not believe in god calls people as dev !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! ...
    ....बिलकुल सही है..आखिर आलेख लिखने, साहित्य में रिश्ते बनाने की क्या आवश्यकता है...
    ---जिन लोगों को धन्धा मिल गया वे ब्लोगिन्ग छोडकर चले गये ..क्योंकि वे धन्धे के लिये ही ब्लोगिन्ग में आये थे...अपनी समाजोपयोगी बात कहने नहीं...
    --सही चिन्तन तो निठल्ले बैठकर (स्वतन्त्र-चिन्तन से)ही होता है,ब्लोग्गिन्ग व साहित्य से भी कमाने-खाने की सोच में पडे रहकर नहीं..

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  16. अरविन्दजी ने जिस सन्दर्भ में यह टीपा है कि ब्लॉगिंग 'निठल्ला चिंतन ' है उसको समझना भी ज़रूरी है.

    उन्होंने एक तरह से उस प्रवृत्ति की बात करी है जो आजकल लिखने से ज़्यादा खेमेबाजी,मठाधीशी,नौटंकी,नकारात्मकता ,आत्मश्लाघा आदि को समाहित किये हुए है.

    लेखक या ब्लॉगर जब लेखन से अपने को बड़ा मान लेता है तो साहित्य वहीँ दम तोड़ देता है.इसीलिए लेखक और ब्लॉगर में बुनियादी फर्क है,जिस पर कभी विस्तार से ...!

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  17. praveen
    You missed out on the active discussion of nithala chintan which is late dr amars version and was used by him only so the credit should be given to him for the same .

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  18. उत्तम / मध्यम / अधम ब्लागर्स की डिग्रियां कोई बांट रहा हो तो बताइयेगा वर्ना चलने दीजिए :)

    @ali

    aarae aap ko naam nahin maalum haen salana jalsa hotaa haen blogmahotsav kaa !!!!!!!!!!!!!

    aur aap kaa kament nirlipt hotae huae bhi utna nirlipt nahin haen :)

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  19. @ उत्तम / मध्यम / अधम ब्लागर्स की डिग्रियां कोई बांट रहा हो तो बताइयेगा वर्ना चलने दीजिए :)

    जो समाज में है और जैसा भी है , हूबहू वही ब्लॉग जगत में भी अभिव्यक्त होगा ! होके रहेगा :)

    je matlab ye nikla ke sahitya samaj ka.....nahi..nahi...sorry blogging samaj ka darpan hai.........

    pranam.

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  20. दुःख का कारण सिर्फ यही है
    सही गलत है गलत सही है

    सुख के अपने-अपने चश्में
    दुःख के अपने-अपने नगमे
    दिल ने जब जब जो जो चाहा
    होंठो ने वो बात कही है।

    सही गलत है गलत सही है।

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  21. @ रचना जी ,
    वास्ते सालाना जलसा ...
    कौन हैं वे लोग ?

    वास्ते मेरे कमेन्ट की निर्लिप्तता...
    शब्द मैंने जोड़े हैं पर आप उन्हें जिस नज़रिये से देखना चाहें ये आपका अपना फैसला है :)

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  22. @ संजय जी ,
    ब्लागिंग ही क्यों ? हम भी समाज के दर्पण हैं :)

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  23. प्रवीण जी ,
    मेरी एक टिप्पणी छपने के बाद स्पैम हो गई है शायद !

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    बड़ी आफत है मित्रों, बिना किसी वजह के टिप्पणियाँ स्पैम में जा रही हैं, तीन को अभी उबारा है , अली सैयद साहब की एक, चंदन कुमार मिश्र जी की एक व संतोष त्रिवेदी जी की भी एक है इनमें... देरी के लिये क्षमा चाहता हूँ।



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  25. वास्ते सालाना जलसा ...
    कौन हैं वे लोग ?

    yaani aap to blogger haen hi nahin

    jaraa google kariyae aur khojiyae
    varsh kae sarvshesth 50 blogger

    aap ko raasta mil jayegaa

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  26. @ रचना जी,
    धन्यवाद ! अपने ब्लागर होने को लेकर मैं खुद भी सशंकित हूं :)

    कुछ ब्लागर्स ने एग्रीगेटर्स की कमी दूर करने के लिहाज़ से अपनी अपनी पसंद के (श्रेष्ठ) ५०० या अधिक ब्लाग्स की सूचियां (ब्लॉग) बनाई हुई हैं ! मुझे लगा कि यह भी वैसा ही कोई उद्यम /आयोजन /आइटम नंबर /व्यापार संधि है :)

    आपके संकेत के अनुसार अगर इसे सीरियसली डिग्री बांटना समझूं तो फिर मेरा अभिमत ऐसा होगा...

    यदि सम्मान देने वाली महानता को गूगल पर खोजना पड़ जाये तो लानत है उन प्रतिभाओं पर जो इस महानता से सम्मानित हुईं :)

    हालांकि मैं अब भी अपनी इस टीप के दूसरे पैरे वाले रुख पर कायम रहना चाहूँगा क्योंकि मैं स्वयं भी मुझे ज्ञात ब्लागर्स और उनके आलेखों से अक्सर प्रभावित हो जाया करता हूं ! उनकी तारीफ़ भी करता हूं !

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  27. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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