शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

इस 'जनमत संग्रह' का नतीजा क्या आयेगा ? अंदाजा लगायेंगे क्या ' नागरिक-समाज-प्रतिनिधि (???) ' प्रशांत भूषण जी...



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टीम अन्ना के सदस्य और भारत महादेश के 'नागरिक-समाज' के जबरिया थोपे गये पाँच प्रतिनिधियों में से एक सुप्रीम कोर्ट के वकील श्री प्रशांत भूषण जी ने 25 सितंबर को वाराणसी में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में कश्मीर के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में फरमाया...

जम्मू-कश्मीर को बल के ज़रिए देश में रखना हमारे लिए घातक होगा...देश की सारी जनता के लिए घातक होगा...सिर्फ वहां की जनता के लिए नहीं पूरे देश की जनता के हित में नहीं होगा...मेरी राय ये है कि हालात वहां नार्मलाइज़ करने चाहिए...आर्मी को वहां से हटा लेना चाहिए...आर्म्ड फोर्सेज़ स्पेशल पावर एक्ट को खत्म करना चाहिए...और कोशिश ये करनी चाहिए कि वहां की जनता हमारे साथ आए...अगर उसके बाद भी वो हमारे साथ नहीं है...अगर वहां की जनता फिर भी यही कहती है कि वो अलग होना चाहते हैं...मेरी राय ये है कि वहां जनमत संग्रह करा के उन्हें अलग होने देना चाहिए...

यह कहते हुए प्रशांत भूषण साहब  देश हित को एकदम दरकिनार करते हुऐ बहुत ही सुविधाजनक रूप से यह भूल गये कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह बयान एक व्यक्ति का नहीं, भारत के पूरे नागरिक समाज की राय मानी जायेगी...


बयान पढ़-सुन खून तो अपना भी बहुत खौला... कश्मीर के बारे में मैं क्या सोचता हूँ इस पर कई बार लिखा है मैंने , सामने प्रशांत भूषण होते तो मैं क्या कर बैठता, खुद मुझे पता नहीं... फिर भी किसी भी प्रकार की हिंसा का विरोध करते हुऐ भी मेरा सवाल है कि...


 भगत सिंह क्रान्ति सेना के उन युवकों ने प्रशांत भूषण जी के साथ जो कुछ किया वह सही था या गलत, इस पर जनमत संग्रह हो तो नतीजा क्या आयेगा ? अंदाजा लगायेंगे आप ?



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7 टिप्‍पणियां:

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

तो समाधान सुझाया जाय। या तो लड़कर भारत पूरा अधिकार करे या उसे अलग देश ही घोषित कर दिया जाय। इस तरह हम कितनी पीढ़ियों को बरगलाते रहेंगे…

Shah Nawaz ने कहा…

प्रशांत भूषण ने जो कहा वह देश द्रोह की श्रेणी में आना चाहिए.... ऐसी किसी भी बात और बात करने वालों को हरगिज़-हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करना चाहिए.... लेकिन इस सब से निपटने का तरीका मार-पीट तो बिलकुल भी नहीं होना चाहिए... बल्कि ऐसे लोगो के खिलाफ सख्त कानूनी कदम और सामाजिक भाहिष्कार जैसे क़दमों को उठाया जाना चाहिए.

राजन ने कहा…

प्रवीण जी,
कल मैं खुद उनके बयान और कश्मीर पर जनमत संग्रह पर लिखने वाला था पोस्ट भी तैयार थी लेकिन फिर नहीं लिखा.अंशुमाला जी ने अपने ब्लॉग पर सही लिखा है कि अभी विवाद को हवा न दी जाएँ.प्रशांत भूषण ने कश्मीरियों की तकलीफों के बारे में बात की है.उनके और अरूँधति के बयानों में और भावनाओं में फर्क है.
लेकिन फिर भी मैं पूछना चाहूँगा कि भले ही ज्यादातर आम कश्मीरी भ्रमित है पर क्या प्रशांत भूषट जी नहीं जानते कि कश्मीरियों का हित किस बात में है फिर दो विकल्पों की बात की ही क्यों जाए वो भी तब जबकि कश्मीर हमारा ही है और कम से कम हमारे लिए विवादित क्षेत्र भी नहीं है.इस तरह की बाते कश्मीरियों का दुख बढाती ही है.प्रशांत जी से किसीने कश्मीर पर कुछ पूछ भी लिया तो जवाब देना जरूरी है क्या? चुप भी तो लगाया जा सकता है.जो चीज हो नहीं सकती उसके बारे में सपने में भी नहीं सोचा जाना चाहिये.कश्मीरियों का विश्वास जीतने के लिए जो चाहें करें पर अलग होने की बात भूलकर भी न करें और वैसे भी कश्मीर को कभी अलग नहीं किया जा सकता चाहें केन्द्र में खुद गिलानी या मीरवाईज ही क्यों न आ जाए.

राजन ने कहा…

जिस चैनल पर वे इंटरव्यू दे रहे थे वो वही चैनल है जो कश्मीर पर बोलने के बाद अरूंधति के पीछे पड गया था क्योंकि अरुंधति ने इस चैनल से बात करने से ही मना कर दिया था.बाद में दोनों एक दूसरे के खिलाफ आग उगलते रहे.प्रशांत भूषण अरूंधति के पुराने मित्र है.हो सकता है ये सब संयोग हो या इसमें सरकार की भी कोई चाल हो सकती है.लेकिन फिर भी प्रशांत भूषण पर जो हमला हुआ वो बहुत बहुत बहुत निंदनीय है.

shilpa mehta ने कहा…

मुझे तो लगता है कि उन युवको ने वही किया जो कई लोग इस बात पर करना चाहते |

वैसे एक बात तो है - भूषण जी कम से कम दो बार तो साफ़ तौर पर prove कर चुके हैं (बिल के बारे में और कश्मीर के बारे में उनके विचार) कि उनके विचार में देश के constitution से नहीं बल्कि जनमत संग्रह से ही सारे निर्णय होने चाहिए | इस तरह से सोचने पर तो उन्हें आगे बढ़ कर खुद कहना चाहिए ना - कि - मैंने जो किया - इस पर मुझे क्या सजा / इनाम दिया जाए - यह भी as per law नहीं बल्कि "जनमत संग्रह" द्वारा ही निश्चित किया जाना चाहिए ?

क्या आपको नहीं लगता कि एक जनमत संग्रह यूँ भी हो कि "ऐसे देश को तोड़ने की बात पर किसी को क्यों ना चौराहे पर सज़ा दी जाए ?" लेकिन नहीं - इस मुद्दे पर "जनमत संग्रह" की बात करने वाले कहेंगे कि "संविधान सर्वोपरि है - उसी के हिसाब से सब decide होगा |" ..... !!!!

सञ्जय झा ने कहा…

@shilpji.........

sahi pakra.......ye sahi hai..........saamp bhi
mar jai...aur lathi bhi na toote...... ho jai
'janmat sangrah'......aur is adhar par dekha jai
??????

pranam.

रौशन ने कहा…

is bayaaan se logon ko sabak lenaa chahiye ki jo anna aur unke saathi kahte hain jaruri nahi ki sab kuchh sahi ho