बुधवार, 14 सितंबर 2011

'अन्ना इफेक्ट' : दिख रहा है क्या आपको कहीं पर भी ?

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अन्ना का आमरण अनशन खत्म हुआ... भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में पचास फीसदी जीत का दावा किया खुद अन्ना ने... भ्रष्टाचार विरोधी टीशर्ट-टोपी धारी भीड़ ने भी खूब पटाखे छोड़े, मिठाई बाँटी... और फिर ???


मुझे तो इस आंदोलन के बाद भी अपने चारों ओर व्याप्त, सर्वव्यापी, चाहते या न चाहते हुऐ भी सब को अपने फंदे में जकड़ते रोजमर्रा की जिंदगी में आम हिंदुस्तानी के द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार में कोई कमी नहीं दिखी अभी तलक... माने खाली जुबानी जमा-खर्च किये भाई लोग...



क्या आपको कहीं दिखाई दे रहा है अन्ना इफेक्ट ?



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8 टिप्‍पणियां:

Shah Nawaz ने कहा…

:-)

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

नहीं जी, बिलकुल नहीं। अखबारों के पन्नों पर दिखता है और कहीं नहीं।

Bhushan ने कहा…

बिलकुल नहीं दिखा सिवाए इसके कि कहीं-कहीं कुछ दलित अधिकारियों को निशाना बनाया गया. आम अनपढ़ जनता तो यह भी नहीं जानती कि अन्ना क्या है और उसका असर कहाँ होना है. यह टीविया आंदोलन ड्राइंग रूम्स में खलबली मचा कर चला गया. यदि यह अनपढ़ जनता भ्रष्टाचार के विरुद्ध सड़कों पर उतर आती तब आंदोलन का प्रभाव नज़र आता.

anshumala ने कहा…

http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/9947882.cms
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/9919418.cms
कुछ नहीं से ये जो कुछ कुछ हो रहा है वो ही ठीक है, बाकि कल को जो जनलोकपाल कानून बनेगा वो आज सरकार द्वारा पेश किये गये बेकार बेमतलब के कानून से थोडा कड़ा होगा | सरकारे नीद से जाग गई विपक्ष को भी जनता की याद आ गई | जरा मुंबई में देखीये रविवार को गणपति ख़त्म हुआ है और सोमवार से है सारे नेताओ परेताओ के बड़े बड़े होर्डिंग युद्ध स्तर पर हठाये जा रहे है जबकि पहले ये हफ्तों तक यु ही पड़े रहते थे लोग शिकायत करते थे ट्रैफिक में परेशानी शुरू होती थी तब जा कर कर्मचारी विभाग अपने हाथ पैर हिलाना शुरू करता था | किसी भी आन्दोलन का असर धीरे धीरे ही होता है चमत्कार नहीं हो जाता रातो रात | अब आप अपनी समस्या के लिए सूचना का धिकार का प्रयोग ना करे तो उससे वो कानून बेकार नहीं हो जाता है और ना ही उसके लिए किये गये आन्दोलन बेकार हो जाता है काम करने वाले उसका उपयोग कर रहे है और अच्छा कर कर रहे है | और इंतजार कीजिये ये आन्दोलन अभी ख़त्म नहीं हुआ है ये बस स्थगित हुआ है अभी तो आप ने देखा ही क्या है देखिएगा की आने वाले आन्दोलन को सरकारे क्या गत बनाती है और उसके बाद क्या क्या होता है |

राजन ने कहा…

मुझे तो आप पर भी अन्ना इफेक्ट बहुत नजर आ रहा है.आपको आजकल जनता की चिंता पहले से ज्यादा होने लग गई कि कौन सुधर गया और कौन नहीं या उस पर किस बात का असर होता है और किसका नहीं.बाकी आप बेवजह परेशान है आपकी रुचि ये जानने में नहीं है कि अन्ना इफेक्ट से क्या हुआ बल्की आप ये सुनना चाहते है कि इससे क्या क्या नहीं हुआ.ये प्रयास बेकार नहीं जाने वाला ये बात तो तब ही पता लग गई थी जब शीला दीक्षित ने सिटीजन चार्टर की बात की.इसके बाद और भी कई अच्छे उदाहरण सुनने को मिले.आप शायद इन सबसे अन्जान है या इस इफेक्ट को ठीक से समझ नहीं पा रहे है.खैर थोडा ना समझने का हक हमारा भी है ऊपर दिये लिंक पढिये और ये समझाइये कि पहले की तुलना में स्थिति अच्छी है या नहीं और अगर नहीं तो इसका नुकसान क्या हुआ है.यहाँ तो फायदा ही फायदा नजर आ रहा है.कम से कम अन्ना को इस बात के लिए तो आप भी धन्यवाद दीजिए कि उन्होने एक ऐसा कानून बनने से तो रोक दिया जिसके आने पर भ्रष्टाचार अनियंत्रित हो जाता और हम लोग यहाँ लोकतंत्र की ही दुहाई देते रह जाते अब ऐसा कानून तो आने से रहा.वैसे एक फायदा ये भी हुआ है कि जनता को पहली बार ये पता चला है कि लोकतंत्र में उसकी जगह क्या होनी चाहिए.अंबेडकर ने कहा था कि गुलाम को ये एहसास करा दो की वो गुलाम है विद्रोह कर देगा ये काम एक हद तक तो हुआ है जनता को लगने लगा है कि वह मालिक होकर भी 64 सालों से गुलाम की तरह रही है.खैर अभी तो ये शुरुआत है आगे आगे देखते जाइये.

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

न तो कहीं नजर आ रहा है और ना ही कभी नजर आएगा| क्योंकि सिर्फ टोपी पहनकर तिरंगा लहराने से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होने वाला उसके लिए पहले खुद को सुधरना होगा जो कोई करना नहीं चाहता!!
सब को रिश्वत देने में दिक्कत है लेने में नहीं!!

अजय कुमार झा ने कहा…

राजन जी की टिप्पी ही हमारी भी मानी जाए , उन्होंने हमारे मन की भी कह दी है

Pallavi ने कहा…

रतन सिंग जी ने सब के दिल कि कहदी...
कभी समय मिले तो आएगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://mhare-anubhav.blogspot.com/