रविवार, 14 अगस्त 2011

जी नहीं, हमारे लोकतंत्र के महापर्व 'पंद्रह अगस्त' के दिन अंधेरा करना मुझे तो कतई मंजूर नहीं है, अपनी आप बताइये...

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क्षुब्ध हूँ मैं... खासकर तब, जब मुझे कोई विरोध होते नहीं दिखता... सबसे पहले टीवी के खबरिया चैनलों पर स्क्रीन के नीचे स्क्रॉल होते देखा...       'अरविन्द केजरीवाल ने सभी से पंद्रह अगस्त के दिन रात आठ बजे से नौ बजे तक अपने घरों में बिजली बन्द कर अंधेरा करने की अपील की '... फिर अपने अन्ना ने भी इस अपील को दोहरा दिया...

जरा सोचिये क्या टीम अन्ना इस तरह की अपील दीवाली, ईद, गुरू परब या क्रिसमस के दिन करने की सोच भी सकती है... तो फिर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के महापर्व १५ अगस्त के दिन अंधेरा करने की यह बेहूदा अपील क्यों... जनलोकपाल बनाने का ठेका अपने ऊपर लादे इस टीम और स्वतंत्रता दिवस ध्वजारोहण समारोहों का बहिष्कार करने की अपील करते विभिन्न अलगाववादियों में आखिर कुछ तो बुनियादी फर्क होना चाहिये... 

जनलोकपाल जैसे अनेकों विधेयक संसद में पेश होंगे, उन पर बहस होगी और संशोधित भी होंगे... व्यक्तित्व आते-जाते रहेंगे... अनेकों अनशनों-खतरों-जिदों-संकटों-चुनौतियों का सामना करेगा हमारा यह लोकतंत्र... और एक दिन ऐसा भी आयेगा ही जब सभी समझ जायेंगे कि आखिर स्वतंत्रता दिवस के इस महापर्व के मायने क्या हैं... क्यों मनाया जाता है यह उत्सव...

जी नहीं, हमारे लोकतंत्र के महापर्व के दिन अंधेरा करना मुझे मंजूर नहीं है... किसी भी सूरत में...


 आप बताइये कि क्या आप अंधेरा करोगे, इस पंद्रह अगस्त को रात आठ से नौ बजे ?



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13 टिप्‍पणियां:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

मेरे विचार में जब लोकतंत्र के कण-कण से भ्रष्‍टाचार की सड़ांध आ रही हो और उस सड़ांध को दूर करने के लिए कुछ लोग तन-मन-धन से लगे हुए हों, तो हमें भी उस यज्ञ में भागीदार बनना चाहिए। क्‍योंकि मुझे लगता है यदि इस आंदोलन को कुचलने में सरकार (किसी भी बहाने से) कामयाब हो गयी, तो फिर भ्रष्‍टाचार के इस दलदल से देश को निकालना दूभर ही नहीं असंभव सा हो जाएगा।
हां, इस तरह का आवाहन होली, दिवाली और ईद-बकरीद जैसे त्‍यौहारों पर भी किये जाने चाहिए, जिससे यह पता लग सकेगा कि लोग वास्‍तव में इस आंदोलन के साथ हैं अथवा सिर्फ फोटो खिंचाने और भाषण देने में ही रूचि रखते हैं।
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क्‍या आपके ब्‍लॉग में वाइरस है?
बिल्‍ली बोली चूहा से: आओ बाँध दूँ राखी...

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

घबड़ाइये नहीं। सरकार और बिजली विभाग ने उस समय मेहरबानी कि तो हमें अपने यहाँ तो नहीं करना पड़ेगा यह। क्योंकि इस समय-अंतराल में पटना में तो ऐसा लगभग हर दिन होता है। और यह काम हम करेंगे भी क्यों? इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता आन्दोलन(?) या मनोरंजन को।

रचना ने कहा…

hats of praveen for this post

we cannot accept this diction and we should not

team anna or team ramdev or any other team should not be blindly followed

many have hidden agenda , the "pil" bhushans are not trust worthy at all
and i can name few more with the reports on them

we have to understand and value our democracy and freedom

निशांत मिश्र - Nishant Mishra ने कहा…

मैं अपने घर में अँधेरा किसी के कहने पर नहीं करनेवाला.
न तो अर्थ आवर जैसा बेतुका विषय और न ही केजरीवाल का अनुरोध... ये अँधेरा करने के उचित आधार नहीं हैं.
वैसे भी विरोध स्वरूप अँधेरा करना वैसा ही है जैसे... किसी से नाराज़ होने पर उसकी पोस्ट पर कमेन्ट नहीं करना. इससे पोस्ट लिखनेवाले को कोई फर्क नहीं पड़ता.

राजन ने कहा…

मैं रजनीश जी से सहमत हूँ.केजरीवाल ने ये तो कहा नहीं कि आप स्वतंत्रता दिवस की खुशियाँ मत मनाओ या देशभक्ति गीत या फिल्में मत देखो.दिनभर आप ये करिये केवल एक घंटे बत्ती बुझाने में क्या गलत है.इस अपील को मानना या न मानना हमारे ऊपर है लेकिन ये अपील गलत नहीँ है.और पहली बात तो सरकार का विरोध लोकतंत्र का विरोध नहीं है और दूसरी बात संविधान या लोकतंत्र अपने आपमें कोई पवित्र शब्द या अवधारणा नहीं है जो इन पर सवाल ही नहीं उठाया जा सकता.इनमें समय समय पर कमियाँ पाई गई है और सुधार भी होते रहे हैं और होने चाहिये.और यदि दिवाली पर भी ऐसी अपील की जाऐं तो मुझे उसमें भी कोई बुराई नजर नहीं आती.आखिर भ्रष्टाचार के विरोध में एक कदम भी सही दिशा में बढाया जाएँ तो ये देश लोकतंत्र जनता सभी के हित में है.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

अंधेरा करने की बात तो मुझे भी पसंद नहीं। इस के बजाय मोमबत्तियाँ जलाने की बात की जा सकती थी। मशाल जलूस निकालने की बात की जा सकती थी।
अन्ना के पास महाराष्ट्र में संगठन है। लेकिन शेष देश में कोई संगठन नहीं। कोई भी कामयाबी देशव्यापी संगठन के बिना हासिल नहीं की जा सकती। लगता है सिविल सोसायटी बहुत जल्दबाजी में है।

Shah Nawaz ने कहा…

आखिर सरकारी लोकपाल बिल से अन्ना जी की टीम को परेशानी क्या है? और क्या अगर सकारी लोकपाल बिल पास हो गया तो क्या भूचाल आजाएगा? हमारे पास सीधा-सीधा लोकतान्त्रिक हक है, जो सरकार जनता के हक में ठीक नहीं उतरती उसे हटाने का हक जनता के पास मजूद है... अगर बिल कारगर नहीं हुआ, तो खुद सरकार को इस बात से डरना चाहिए.... क्योंकि सरकार बनाने की चाबी तो जनता के पास है...

तो फिर अलोकतांत्रिक तरीके से किसी भी सरकार के खिलाफ विद्रोह की स्थिति करना या विद्रोह का डर बैठा कर अपनी मांगे मनवाने की कोशिश करना कैसे देशभक्ति कही जा सकती है?

Khushdeep Sehgal ने कहा…

15 अगस्त देश के साथ हम सबके लिए बहुत अहम है...इस तारीख से फायदा ढ़ूंढने की कोशिश किसी को नहीं करनी चाहिेए...न किसी राजनीतिक दल को और न ही किसी मूवमेंट को...इस दिन बत्तियां बुझाने का संदेश देना, मेरे विचार से सही नहीं है...किसी का कद कितना भी बड़ा क्यों न हो, लेकिन देश के फौजियों से ऊंचा नहीं हो सकता...भ्रष्टाचार पर बेशक हम सरकार से हर दिन लड़ें लेकिन 15 अगस्त जैसे पवित्र राष्ट्रीय पर्व को राजनीति से दूर ही रहने दें...बर्फ से लदी चोटी पर खड़े अपने निगहेबान किसी फौजी को याद कीजिए......याद कीजिए देश के शहीदों को...

जय हिंद...जय हिंद की सेना...

anshumala ने कहा…

प्रवीण जी
सही कहा आप ने सहमत हूं किन बेफकुफो ने कहा है इस अन्ना एंड टीम को भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए किसने इनसे भ्रष्टाचार से लड़ने का ठेका लेने के लिए कहा था | ६४ साल पहले भी ऐसे ही कुछ बुढ्ढे सनकी लोग ऐसे ही देश को आजादी दिलाने के लिए ठेका ले लिया था पता नहीं क्यों आखिर दो सौ सालो से सब गुलाम हो कर आखिर जी ही रहे थे क्या बुराई थी, हम अब भी ६४ सालो से भ्रष्टाचार से जी ही रहे है ना, पता नहीं इन लोगों को किस कीड़े ने काट खाया है जो सरकार से भीड़ रहे है | किसके लिए, हमें तो कोई परेशानी नहीं है भ्रष्टाचार से इसी भ्रष्टाचार की देन है की हमारा सारे काम इसी महान भ्रष्टाचार के कारण आसानी से हो जाता है यह ना हो तो हम जैसे पेट भरे अघाए लोगों का क्या होता, देश में लोग भूखे मरे और हजारो टन अनाज भ्रष्टाचार की भेट चढ़ कर सड़े तो सड़े हमसे क्या हमारा हमारे बच्चो का पेट तो भरा है ना , आज भी लोग देश में लालटेन युग में जी रहे है क्योकि भ्रष्टाचार देश का विकास करने की जगह अपना विकास कर रहा है पर हमें क्या हमारा घर तो रोशनी से चमक रहा है | साल में मुश्किल से तो दो चार छुट्टिया मिलती है मौज मानने के लिए उसे क्यों अँधेरे में रखे लोगों की दिवाली भी अँधेरे में गुजरती है तो गुजरती रहे हमें क्या |

anshumala ने कहा…

प्रवीण जी
आप किस आजादी के उत्सव की बात कर रहे है उस आजादी की जहा सभी को भ्रष्टाचार करने की देश का असंतुलित विकास करने की अमीर को और अमीर बनाने की गरीबो की किसी को सुध ना लेने की आजादी , किस उत्सव की बात कर रहे है जहा बन्दुक धारी चप्पे चप्पे पर खड़े होते है और हम डर के घरो में दुबके होते है उस दिन , किस आजादी का उत्सव की बात कर रहे है जिसके मायने देश के आधे से ज्यादा जनता को पता ही नहीं है | एक घंटे अँधेरा करना हम और आप जैसे डरपोक मध्यम वर्ग के लिए ही है जो रामदेव के आन्दोलन का हाल देख डर के मारे अपने बिल से बाहर आने के लिए तैयार नहीं है या फिर वो घर में सीवा भाषणबाजी के कभी भी जमीन पर उतर कर कुछ नहीं करता है सौ बहाने बनाता है वो कम से कम अँधेरा करने के प्रतिक को ही घर में बैठे बैठे करके सरकार को अपने विरोध का कुछ तो संकेत दे | पर लगता है इसको भी ना करने के भी बहाने लोगो के पास है | अन्ना की टीम ने आजादी के उत्सव का विरोध करने के लिए नहीं कहा है पर आप ने उनकी तुलना नक्सली आतंकवादियों से कर के वास्तव में हद कर दी | इसी कहते है दूसरो की हिम्मत तोड़ना आप तो कांग्रेस से भी आगे निकाल गये | जरा मै, मेरा से बाहर आ कर पुरे देश के बारे में सोचिये तब पता चलेगा की जो आप के लिए उत्सव है आजादी है कइयो के लिए इन सब के कोई मायने नहीं है क्योकि भ्रष्टाचार ने उन्हें इसके लायक होने ही नहीं दिया | वैसे तो टिप्पणी कुए में डाल कर जा रही हूँ फिर भी प्रवीण जी आप की प्रतिक्रिया जानना चाहूंगी |

anshumala ने कहा…

शाह नवाज जी
सरकारी लोकपाल बिल भ्रष्टाचार मिटाने के लिए नहीं बल्कि उसे संरक्षित करने के लिए है | एक उदहारण दे रही हूँ आज आप किसी के खिलाफ भी भ्रष्टाचार की शिकायत कर सकते है किन्तु सरकारी लोकपाल बिल में प्रावधान है की यदि जिसने आरोप लगाया है वो उन आरोपों को साबित नहीं कर पाया तो उसके खिलाफ भी मुक़दमा होगा और उसे भी सजा का प्रावधान है | आप सोचिये की आज देश में पैसो के साथ रंगे हाथ पकडे जाने वाले भी अदालत से बरी हो जाते है , आरोप लगते ही फाईले गायब होने लगती है ऐसे में कोई कैसे आरोप साबित करगा | बिल पास होने के बाद तो लोग शिकायत करना भी छोड़ देंगे |

प्रवीण शाह ने कहा…

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@ अंशुमाला जी,

बहुत उत्तेजित हैं आप, चलिये कोई बात नहीं... :)

एक सैनिक भी रहा हूँ मैं, देखा है मैंने अपनी आँखों से कि कैसे बरकरार रखी जाती है स्वतंत्रता... उसी स्वतंत्रता दिवस रूपी महापर्व पर यदि 'स्वयंभू' नागरिक समाज का प्रतिनिधि घरों में अंधेरा करने को कहता है तो मेरी वेदना को आप शायद नहीं समझ सकती हैं... और हाँ प्रचार के भूखे यह चंद लोग निश्चित तौर पर किसी बड़ी लड़ाई के नायक होने लायक नहीं हैं... यह समय बता देगा सभी को...



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आशीष श्रीवास्तव ने कहा…

"विभिन्न अलगाववादियों" बहिष्कार करने के लिये क्यों कहते है,उनका उद्देश्य क्या है सभी जानते है! लेकिन.....