रविवार, 24 जुलाई 2011

भाई आप क्लोरमिंट क्यों खाते ... ओह्ह सॉरी, हिन्दी ब्लॉगिंग क्यों करते हैं ???

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बहुत-बहुत वो क्या कहते हैं, कन्फ्युजिया गये हैं अपन... योगेन्द्र पाल जी कहते हैं हो सकती है ब्लॉगिंग से कमाई पर अपने मासूम साहब का विचार दूसरा है वह फरमाते हैं कम से कम अभी तो हिन्दी ब्लॉगिंग से कमाई के ख्वाबों में टाइम खोटी न करो... अपने को तो यह भी लगता है कि अभी तो ब्लॉगवुड के सुपर स्टारों के पास भी पाठकों का टोटा है...

अपनी बताऊँ तो हिन्दी में ब्लॉगिंग कभी भी मैं किसी कमाई आदि की आशा में नहीं करता... लिखता सिर्फ इसलिये हूँ कि दिमाग में जो चल रहा है कहीं तो बाहर निकलेगा ही... ब्लॉग पर इसलिये, क्योंकि पब्लिश बटन दबाते ही छप जाता है... बाकी अपने हमख्यालों के साथ का लालच तो है ही... वह दिन अभी कम से कम दस बरस दूर है जब ज्यादातर हिन्दी वालों के पास नेट सुविधा होगी और दो तीन लाख से अधिक का समर्पित पाठक वर्ग होगा... इसके लिये हमें व्यक्तित्वों के मोह, गुणगान व उन्हीं पर केन्द्रित ब्लॉगिंग से बच मुद्दों और विषयों पर आधारित लिखना होगा... 


 आज तो आप बताईये कि,


आप क्लोरमिंट क्यों खाते ... ओह्ह सॉरी, हिन्दी ब्लॉगिंग क्यों करते हैं ?





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12 टिप्‍पणियां:

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

हम इसलिए करते हैं कि सामाजिक जीवन में सक्रिय नहीं है और समय मिल जाता है और आदत भी है बचपन से लिखने की। मेरा मानना है कि सामाजिक जीवन में अधिक सक्रिय आदमी शायद ब्लाग नहीं लिखता है या एकदम कम लिखता है। संयोग से योगेन्द्र जी और मासूम जी दोनों का लेख पहले पढ़ चुका हूँ।

पैसा कमाना और पाठक बढ़ाना अलग -अलग है। हिन्दी ब्लागिंग पर सारे आरोप गलत हैं। टांग-खिंचाई अंग्रेजी ब्लागिंग में भी है। लेकिन उसकी संख्या अधिक होने से अधिक ध्यान नहीं दे सकते। हिन्दी ब्लगिंग में लोग कम हैं तो इतना फायदा तो है ही हम अधिकांश लोगों को पहचानते हैं। अंग्रेजी(रद्दी की टोकरी है)ब्लाग की बात छोड़ दीजिए क्योंकि वह जनविरोधी है।

कितने लोग अपने कोअलग साबित करने के लिए गुणवत्ता का पक्ष लेते हैं। मैं हर ब्लागर के आलेख से बेकार जैसा आलेख खोज सकता हूँ जिसकी कोई आवश्यकता नहीं थी लेकिन यह गलत होगा। अब प्रेमचन्द लिखेंगे तो हर बार गोदान ही नहीं भाई वरना प्रेमचन्द याद किसलिए किए जाएंगे।
अन्त में। हम हिन्दी में ब्लाग इसलिए लिखते हैं कि ब्लाग लिखते हैं।

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

कमाई हो ना हो हम भी अपनी खुशी के लिए ब्लोगिंग करते है और करते रहेंगे|

Bhushan ने कहा…

अब मैं स्वांतःसुखाय ब्लॉगिंग करता हूँ. आपके जैसा दृष्टिकोण है.

अनूप शुक्ल ने कहा…

इसके लिये हमें व्यक्तित्वों के मोह, गुणगान व उन्हीं पर केन्द्रित ब्लॉगिंग से बच मुद्दों और विषयों पर आधारित लिखना होगा...

इस बात से सहमत और इस बात से भी कि यह बात कहने वाला हिंदी ब्लागिंग का सुपर स्टार है। :)

रचना ने कहा…

http://mypoeticresponse.blogspot.com/2008/12/blog-post_6848.html

Suresh Chiplunkar ने कहा…

क्यों करते हैं - (एक सर्वसामान्य चरणबद्ध जवाब)
1) शुरु करते समय - स्वांतः सुखाय
2) लोग पसन्द करने लगें तो - मजे और नेटवर्क बनाने के लिए
3) खासी संख्या में पाठक वर्ग तैयार होने पर - ब्लॉगिंग से कमाई की जुगाड़ लगाने के लिये…
4) जब ब्लॉग से कमाई होने लगे - तो कमाई बढ़ाने के लिए…
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नोट - कुछ "पागल" किस्म के ब्लागर भी पाए जाते हैं जो "विचारधारा" के प्रसार के लिए लिखते हैं… :)

रचना ने कहा…

नोट - कुछ "पागल" किस्म के ब्लागर भी पाए जाते हैं जो "विचारधारा" के प्रसार के लिए लिखते हैं… :)

naam bataayae jaaye

निशांत मिश्र - Nishant Mishra ने कहा…

दो तीन लाख का पाठक वर्ग! आप एक महीने की बात कर रहे हैं या एक साल की?

प्रसिद्द हिन्दी ब्लौग होने के बाद भी हिन्दीज़ेन पर दो साल में पाठकों का आंकड़ा तीन लाख को ही छू पाया है, मई 2009 में इसने पहले महीने में पांच हज़ार पाठक जुटाए. दो साल बाद अब इसपर हर महीने पंद्रह हज़ार से ज्यादा विजिट्स नहीं आतीं. आकड़े सिर्फ यही बयान करते हैं कि अभी भी ब्लौगों पर पर्याप्त पाठक उपलब्ध नहीं हैं. मेरा लक्ष्य तो कभी भी पैसा कमाना नहीं था पर जो ब्लौगर यहाँ कमाई का विचार लिए आते हैं उन्हें शायद अभी लम्बे समय तक मायूसी ही देखनी पड़ेगी.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

खाना शरीर के लिए आवश्यक है। लेकिन फिर भी यदि भूख न लगे तो कौन खाएगा? वह इसलिए खाया जाता है कि भूख लगती है। कुछ को तो इत्ती भूख लगती है कि खा-खा कर मुटिया जाते हैं और डाक्टर के चक्कर लगाते हैं। डाक्टर कहता है कि खाने पर नियंत्रण रखो। लेकिन भूख के मारे रखा नहीं जाता। मुटियाना बंद नहीं होता। कई बिचारों को जरूरत होते हुए भी भूख नहीं लगती इसलिए खा नहीं पाते औऱ दुबले होते जाते हैं। डाक्टर भी कुछ नहीं कर पाता।
कुछ ऐसा ही हाल अपनी ब्लागरी का भी है।

अजय कुमार झा ने कहा…

ओह्ह सॉरी, हिन्दी ब्लॉगिंग क्यों करते हैं ???
.....बस इसी प्रश्न का उत्तर तलाश रहे हैं मालिक , उम्मीद है कि निर्वाण प्राप्ति से पहले ये दिव्य ज्ञान भी किसी न किसी पेड से हमारे सर पे गिरेगा ही

रचना ने कहा…
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रचना ने कहा…
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