सोमवार, 11 जुलाई 2011

हजारों चाहतें हैं मेरी, और हर चाहत के लिये लेना होगा जनम मुझे कई-कई बार... आप ही कुछ मदद करो मेरी...

.
.
.

इन्टरनेट ज्ञान का खजाना है... हर रोज एक नई बात पता चलती है आपको... कुछ ऐसा ही मुझे मिला अपने ब्लॉगवुड भ्रमण के दौरान... ब्लॉग का नाम नहीं बताऊंगा... आप खुद ही ढूंढिये न... वहाँ लिखे से कुछ जस का तस उद्धरित कर रहा हूँ :- 

"  चाहत या आरजू का जीवन में बहुत महत्व है.हमारी  अनेक प्रकार की चाहतें हो सकतीं हैं, जो  जीवन
के स्वरुप को बदलने में सक्षम हैं.  वासनारूप होकर जब    चाहत   अंत:करण  में वास  करने लगती
है तो  हमारे 'कारण शरीर' का भी  निर्माण  करती रहती है.

'कारण शरीर' हमारी स्वयं की वासनाओं से निर्मित है, जिसके कारण  मृत्यु  उपरांत हमें नवीन स्थूल

व सूक्ष्म  शरीरों  की प्राप्ति होती है.यदि वासनाएं सतो गुणी हैं अर्थात विवेक,ज्ञान  और प्रकाश की
ओर उन्मुख हैं  तो 'देव योनि ' की प्राप्ति हो सकती है.  यदि  रजो गुणी अर्थात अत्यंत क्रियाशीलता,
चंचलता  और  महत्वकांक्षा से ग्रस्त हैं तो  साधारण 'मनुष्य योनि'. की और यदि  तमो गुणी अर्थात
अज्ञान,प्रमाद हिंसा आदि से  ग्रस्त  हैं  तो 'निम्न' पशु,पक्षी, कीट-पतंग आदि की 'योनि'प्राप्त हो
सकती है. इस प्रकार विभिन्न प्रकार की वासनाओं से विभिन्न प्रकार की योनि प्राप्त हो
सकती है. जो हमारे शास्त्रों  अनुसार ८४ लाख बतलाई गई हैं.

उदहारण स्वरुप यदि किसी की चाहत यह हो कि जिससे उसको कुछ मिलता है ,उसको  वह स्वामी  

मानने लगे और  उसकी चापलूसी करे,कुत्ते  की  तरहं उसके आगे पीछे दुम हिलाए.  जिससे उसको
नफरत हो या जो उसे पसंद  न आये,  उसपर वह जोर का   गुस्सा करे ,कुत्ते की तरह भौंके  और जब
यह चाहत'उसकी अन्य चाहतों से सर्वोपरि होकर  उसके अंत:करण में प्रविष्ट  हो वासना रूप में  उसके
 'कारण शरीर' का निर्माण करे ,तो   उस व्यक्ति को अपनी ऐसी चाहत की पूर्ति  के लिए 'कुत्ता योनि'
में भी जन्म लेना पड़ सकता है. इसी  प्रकार जो बात-बिना बात अपनी अपनी कहता रहें यानि बस
टर्र टर्र ही   करे ,मेंडक की तरह कुलांचें भी  भरे तो वह  'मेंडक' बन सकता है..क्योंकि ऐसी वासनायें
अज्ञान ,प्रमाद से ग्रस्त होने के कारण 'तमो गुणी'  ही  है  जो पशु योनि की कारक है.

चाहत यदि सांसारिक है तो  संसार में रमण होगा. पर  चाहत परमात्मा को पाने की हो  तो परमात्मा से

मिलन होगा.इसलिये अपनी चाहतों के प्रति हमें अत्यंत जागरूक व सावधान रहना चाहिये . "   



यह सब पढ़ सोच में डूब गया हूँ मैं तो,... अपनी तो सारी ही चाहतें सांसारिक जो हैं... मरने से पहले कम से कम एक बार पूरा देश व थोड़ी दुनिया घूमने की... दोनों बेटियों के बेहतर भविष्य की... अपने मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य की... समता मूलक व न्यायपूर्ण समाज की... तार्किकता व वैज्ञानिकता के उत्थान व अंधआस्था पर आधारित धर्म-आध्यात्म के नाम पर आगे किये जा रहे उलजलूल विचारों के पराभव की... एक ऐसी दुनिया की जिसमें कर्मफल व न्याय यहीं मिल जाये किसी दूसरे लोक के लिये पेंडिंग न रख दिया जाये... खुद समेत सभी के लिये भर पेट खाने व चैन की नींद की... इस पोस्ट पर किये अपने सवाल के ढेर सारे जवाबों की... क्या क्या लिखूँ ?

ऐसा भी नहीं कि मैं किसी भी योनि में जाने से डरता हूँ... वजह है कि आज सुबह मुझे अपनी कॉलोनी के पार्क में घूमते कुत्ते और टर्राते मेंढक प्रसन्न ही दिखे... किसी कुत्ते को यह नहीं ज्ञात अब, कि, वह पिछले जन्म में ब्यूरोक्रेट था और न ही किसी मेंढक को अपना पिछले जन्म में बातूनी होना याद है... पर फिर भी कुछ अंदाजा नहीं लगा पा रहा मैं... मेरी मदद कीजिये और बताईये... 





मैं क्या बनूंगा अगले जनम में ?

 (बिना किसी कारण मुझसे नफरत या मुझे नापसंद करने वाले सुधर जायें व नीले रंग से लिखे को गौर से पढ़ें) 









.

8 टिप्‍पणियां:

sajjan singh ने कहा…

आपही की तरह मेरी भी चाहते एक "समता मूलक व न्यायपूर्ण समाज की... तार्किकता व वैज्ञानिकता के उत्थान व अंधआस्था पर आधारित धर्म-आध्यात्म के नाम पर आगे किये जा रहे उलजलूल विचारों के पराभव की... एक ऐसी दुनिया की जिसमें कर्मफल व न्याय यहीं मिल जाये किसी दूसरे लोक के लिये पेंडिंग न रख दिया जाये... खुद समेत सभी के लिये भर पेट खाने व चैन की नींद की हैं" और अपनी अपूर्ण कामनाओं के लिए मुझे परलोक या अगले जन्म की फिक्र नहीं है।
इस सार्थक पोस्ट के लिए आभार।

पढ़े- गर्व से कहो...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

बहुत गहरी बात बहुत हल्‍के-फुल्‍के ढंग से कह दी आपने।

अगर इसका जवाब ही होता, तो फिर दुनिया शायद इस तरह की न होती।

इस जन्‍म को सार्थक कर लिया जाए, फिर किसी और जन्‍म की चाह ही कहां रह जाती है।
------
TOP HINDI BLOGS !

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

प्रवीण जी,
आपकी सहायता की जाएगी। एक बात कह रहा हूँ, इसके लिए माफ़ी चाहूंगा कि ये तिरछे अक्षर मुझे अच्छे नहीं लगते और मैं हमेशा इन तिरछे अक्षरों में निराशा और मुर्दापना दिखता है।

बाकी जैसा आप चाहते हैं उससे ज्यादा अलग मैं भी नहीं चाहता।
आपका मुख्य प्रश्न है कि आप क्या बनेंगे अगले जनम में? रहने दीजिए ना इस बात को। क्यों चिन्ता की जाय? जिसे इस जनम से काम नहीं चलता वो कल्पनालोक में विचरण कर रहा है, करने देते हैं। आप किसी जीव में जनम लेने नहीं जा रहे हैं, यह तो मेरा दावा ही है।

रचना ने कहा…

अब आप आत्मा को मानते नहीं
भगवान् को मानते नहीं
तो अगले जनम को कैसे मानते हैं ?
आप कैसे कह सकते हैं की अगला जनम होता ही हैं ??
वैसे जो लोग आत्मा को मानते हैं , भगवान् को मानते हैं वो कर्म को मानते हैं क्या आप कर्म को मानते हैं अगर आप हाँ कहेगे प्रवीण तो लोजिक के अनुसार आप भगवान् और आत्मा दोनों को मानते दिखेगे और अगर आप कर्म को नहीं मानते तो आप को अगले जनम के ऊपर विमर्श ही क्यूँ करना चाहिये
लीजिये अब आप फँस गए शब्दों के इस चक्रव्यूह में . देखती हूँ भेद कर बाहर आने की कला में प्रवीण भी हैं की नहीं ?? अभिमन्यु था कैसे ?? कोख से सीख कर आया था पर माँ के सो जाने की वजह से ज्ञान अधूरा था
आप के जवाब का इंतज़ार



बाकी टिप्पणीकार भी प्लीज प्रवीण से जरुर पूछे की जो ईश्वर को नहीं मानता , आत्मा को नहीं मानता वो अगले जनम की बात कर ही कैसे सकता हैं

राजन ने कहा…

लगता है आपने इन अंशों का मतलब कुछ और लगा लिया.एक सच्चे नास्तिक की जो चाहतें हुआ करती है वो ही आपकी भी है.मेरी भी ये ही चाहतें है.मैं आत्मा ईश्वर और पुनर्जन्म को नहीं मानता.लेकिन इस लेख में कुछ और कहने का प्रयास किया गया है.जैसे कि यदि आपकी इन सभी चाहतों में से अपने लिए अच्छी नींद की चाहत ही आप पर हावी हो गई तो आप अगले जनम में अजगर हो सकते है यानी खुद को आलस से दूर रखो.हो सकता है ये बातें लोगों को बुराईयों से दूर रखने के लिये कही गई हों.लेकिन बाद में धर्म के ठेकेदारों ने इस बहाने अपना ही उल्लू सीधा करना शुरू कर दिया.

anshumala ने कहा…

प्रवीण जी
आप की तो चाहतो की संख्या भी काफी कम है ये सब तो आप एक दो जनम में पा जायेंगे मै तो अपना सोच कर घबराए जा रही हूं की यहाँ तो हर दिन ही चाहतो की लिस्ट में एक नई चाहत जुड़े जा रही है | इन जनम का तो ठीक से सोचने का समय नहीं है अगले जनम का क्या सोचु | कहते है की अपना आज सुधर लो तो कल अपने आप ही सुधर जायेगा हम तो वो भी नहीं कर पा रहे है आम आदमी है बस किसी तरह अपना आज बिगाड़ने से बचा लेते है वही काफी है |
वैसे आप को इतना अध्यात्मिक बाते पढ़ने की फुरसत मिल जाती है , दावे से कह सकती हूं की एक बार "सियोना " को बड़ी होने दीजिये आप की चाहतो की लिस्ट मेरी चाहतो की तरह ही बड़ी लंबी होने वाली है :)))

प्रवीण शाह ने कहा…

.
.
.
@ रचना जी,

आपकी बातों का जवाब यहाँ है :-
क्या होती है आत्मा ?


...

अनूप शुक्ल ने कहा…

घूमने का तो अपन का भी मन है! :)