गुरुवार, 7 जुलाई 2011

मुझे तो कतई भरोसा नहीं है इन ' मासूमों ' द्वारा दी गई सफाई पर... क्या आप इनकी बातों में आयेंगे ?

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कल टीवी चैनल TIMES NOW (लिंक) ने एक बड़ा खुलासा किया... चैनल के मुताबिक साल   २००१ तक हमारे २५७ शीर्ष एथलीट डोपिंग के लिये की गई जाँच में प्रतिबंधित दवायें लेने के दोषी पाये गये थे (लिंक)... परंतु न तो इनके नाम जाहिर किये गये और न ही इनके खिलाफ कोई कारवाई भी...

जिस तरह की खबरें निकल कर आ रही हैं, उस से साफ है कि, यह एक पूरी तरह से ' ऑर्गेनाइज्ड रैकेट ' था... जिसमें बराबर के हिस्सेदार थे हमारे खेल संघ, इन्डियन ओलंपिक एसोसियेशन, स्पोर्टस अथारिटी ऑफ इन्डिया, विदेशी कोच व हमारे एथलीट भी... बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में पदक लाने से सभी को फायदा जो होता... सरकार द्वारा मुंहमांगा बजट, विदेश यात्रायें, खेलों के आयोजन का मौका, घोटाले करने का मौका और एक गद्गद देश द्वारा इनामों की बरसात भी... खेलों से जुड़े हर किसी को इस की जानकारी भी थी... परंतु कुछ छोटे-मोटे इशारे करने के अलावा किसी ने कुछ भी नहीं किया...


आज फंसने पर जिस तरह से हमारी एथलीट अपनी मासूमियत और बेगुनाही का हवाला देती यह कह रही हैं कि " मैं तो छोटे से गाँव/शहर से आई हूँ, मुझे नहीं पता कि मुझे क्या दिया गया, हमने तो वही सब किया जो कोच ने हमसे कहा "... " हो सकता है कि फूड सप्लीमेंट्स में मिलावट हो  "... आदि आदि... 


तब,

मुझे तो कतई भरोसा नहीं है इन कथित ' मासूमों ' द्वारा दी गई सफाई पर... 

आप बताइये कि,


क्या आप इनकी बातों में आयेंगे ? क्या आप सहमत हैं इस बात से कि डोपिंग के लिये ' लाइफटाइम बैन ' न्यूनतम सजा हो ?






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8 टिप्‍पणियां:

रचना ने कहा…

praveen
Life time ban is not advocated

I think they should be stripped of all the medals and all the prizes / cash they got should be taken back

Life time ban merely will debar them from sports but the basic instinct will not change
Which ever field life they may move to , they will find EASIER way out

Only when they know they will have to give back cash and prices then they will learn and abstain


PUNISHMENT HAS TO BE EXEMPLARY

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

मुझे तो लगता है कि सभी प्रतियोगी खिलाडियों को डोपिंग की छूट दे देनी चाहिए। मामला बरोबर।

anshumala ने कहा…

प्रवीण जी
अब जो मामले सामने आये है उसमे तो कोच ने पूरी जिम्मेदारी ले ली है कोच कह रहे है की उन्होंने ही महिला खिलाडियों का फ़ूड सप्लीमेंट की जगह प्रतिबंधित दवा दे दी थी | ये सही भी हो सकता है पहला कारण ये है की हमारे खिलाडियों को जानकारी ही नहीं है की किन किन चीजो का लेना उनके लिए प्रतिबंधित है अक्सर इन चीजो की जानकारी कोच की होती है और जैसा की आप ने कहा की पदक मिलने से बाकियों को भी काफी फायदा होता है तो संभव है की वो खिलाडियों को बलि का बकरा बना देते हो कि, जो नहीं पकडे गए तो हमारे वारे न्यारे और जो पकड़ इए गए तो फसेंगा तो खिलाडी बैन लगेगा तो उस पर |

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

कई मुझसे नाराज भी हो सकते हैं लेकिन इन खिलाड़ियों की कोई जरूरत नहीं है देश को। इन्हें कोई काम धाम नहीं है। पहले खेल शौक था, लोग जीविका के लिए कुछ करते थे और खेलते थे। ये सारे जीविका के लिए खेलते हैं। यह बताता है कि मानव विकास कर रहा( वैसे कर तो नहीं रहा)सिर्फ़ व्यापार और चोरी विकास कर रहे हैं। न ये नौटंकी होगी न ये सब समस्याएँ और तमाशे होंगे।

Bhushan ने कहा…

भ्रष्टाचार और हेरा-फेरी प्रत्येक प्रोफेशन में है. खेल संघ, इन्डियन ओलंपिक एसोसियेशन, स्पोर्टस अथारिटी ऑफ इन्डिया, देशी-विदेशी कोचों, एथलीटों-खिलाड़ियों को खेलने दीजिए न :))

राजन ने कहा…

अंशुमाला जी से सहमत हूँ.कई बार खिलाडियों को प्रतिबंधित दवाओं के बारे में पता ही नहीं होता तो कुछ खिलाडी बहुत कम पढे लिखे होते है .गलती से खसखस जैसी चीज का सेवन करने से भी आपको डॉप टेस्ट में फैल करार दिया जा सकता है.यहाँ कोच की ही जिम्मेदारी महत्तवपूर्ण होती है.

राजन ने कहा…

अंशुमाला जी से सहमत हूँ.कई बार खिलाडियों को प्रतिबंधित दवाओं के बारे में पता ही नहीं होता तो कुछ खिलाडी बहुत कम पढे लिखे होते है .गलती से खसखस जैसी चीज का सेवन करने से भी आपको डॉप टेस्ट में फैल करार दिया जा सकता है.यहाँ कोच की ही जिम्मेदारी महत्तवपूर्ण होती है.

अनूप शुक्ल ने कहा…

डोपिंग के लिये ' लाइफटाइम बैन ' न्यूनतम नहीं अधिकतम सजा होनी चाहिये। :)