सोमवार, 4 जुलाई 2011

क्या करते हो आप जब ऐसा होता है ?

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चारों ओर बहुत कुछ घट रहा है... आपके दिमाग में आइडिया भी काफी हैं... काफी दिन से ब्लॉग पर कुछ लिखा भी नहीं आपने... पर आपकी तमाम कोशिशों के बावजूद भी की बोर्ड पर आपकी ऊँगलियाँ नहीं चल पाती... आपको लगता है कि कामचलाऊ पोस्ट भी बन नहीं पायेगी आज...

मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है...


और जब भी ऐसा होता है तो लगता है कि कुछ अधूरा सा है आज का दिन...



आप बताइये सबको, कि क्या आपके साथ भी कभी ऐसा होता है कभी ? और यदि होता है तो क्या करते हो आप उस दिन ?




मैंने तो आज ऐसा होने पर यह सवाल उछाल ही दिया है ... :)








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8 टिप्‍पणियां:

योगेन्द्र पाल ने कहा…

मैंने तो वही करता हूँ जो पिछले २ माह से कर रहा हूँ - आराम :)

और दूसरों के ब्लॉग पढ़ना

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

मैं तो नया नया हूँ। लोग ही इतनी मेहरबानी कर रहे हैं, लिखना पड़ जाता है। लेकिन आपकी बात सही हो सकती है।

अजय कुमार झा ने कहा…

हां ये स्थिति सबके साथ आती है , नियमितता और निरंतरता में व्यवधान पडने से लय तो टूट जाती ही है

Rajey Sha राजे_शा ने कहा…

agar adhura sa lag raha hai to aapko post karnay aur tippni ki aadat par gai hai ji... jaroori thodi ki kuchh na kuchh jhelaaya hi jaaye logo'n ko..... kuchh behtar likh paaney.. likha hi jaanay ka intzaar karna chahiye... aur apni aadton ko bhi tatola aur dekha jaana chahiye... kya aisa nahi karna chahiye..?

anshumala ने कहा…

बिलकुल सहमत !! यही हाल अपना भी है आइडिया दिमाग में भरा पड़ा है बस कुछ मुड नहीं बन रहा है कुछ समय आधा आधुरा मिल रहा है, पहले तो कुछ पढ़ने का मन करता था, अब तो वो भी नहीं कर रहा है बस कुछ खास ब्लॉग तक ही सिमित हूँ |

डा० अमर कुमार ने कहा…

हाल मिल रहा है मेरा
अँशु जी के हाल से...
मेरे तो कई ड्राफ़्ट तैयार पड़े हैं, ब्लॉगजगत पर पर अब आने का मन ही नहीं होता । अजीब खालीपन ठहराव दिख रहा है... हालाँकि इस वक्त फालतू टर्राने वाले कूपमँडूकों का बाढ़ सी आयी है ।
अतः वाईकी पढ़ लेता हूँ, और कुछ अपना योगदान दे लेता हूँ ।

प्रतीक माहेश्वरी ने कहा…

हाहा सही कहा है आपने.. मुझे पोस्ट किये हुए महीने से ऊपर हो चला है... कुछ आईडिया है दिमाग में पर पोस्ट में तब्दील नहीं हो रहे हैं..
जब वक़्त आएगा, पोस्ट भी आ जाएगा.. आराम से :)

अनूप शुक्ल ने कहा…

जब आप अपने किसी विचार को बेवकूफी की बात समझकर लिखने से बचते हैं तो अगली पोस्ट तभी लिख पायेंगे जब आप उससे बड़ी बेवकूफी की बात को लिखने की हिम्मत जुटा सकेंगे।

नियमित ब्लागिंग करने के कुछ सुगम उपाय यहां दिये हैं।