शनिवार, 2 जुलाई 2011

लोकपाल होगा या जोकपाल, समय तो यह बता ही देगा कभी न कभी... पर आपके पास यह बताने का मौका है आज ही, चूकिये मत !

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अपने नाम से ही ' लोकपाल ' एक लोकतंत्र में ' लोक ' के हितों का पहरूआ सा होना चाहिये... जब भी देखे, जहाँ भी देखे कि आम आदमी के हितों को किनारे कर अपने क्षुद्र हितों का हितसाधन किया जा रहा है... वह ' फाउल प्ले ' को बताने-जताने के लिये एक जोर सी सीटी मार दे या ठीक चौकीदार की ही तरह बिजली के खंबे पर लाठी मार आवाज सी पैदा करे... ताकि खुराफात की सोचने वाला असहज हो वह ईरादा ही छोड़ दे... अपराधी को पकड़ने व कानून के मुताबिक सजा देने के लिये लंबा-चौड़ा तंत्र तो है ही हमारे देश में...


आज ' लोकपाल ' के नाम पर सारी जाँच एजेंसियों , सारे राजनीतिक सत्ता प्रतिष्ठान, संसद, सारी न्यायपालिका, पूरी कार्यपालिका आदि आदि के ऊपर नियंत्रण व उनको अपनी इच्छा अनुसार सजा देने का हक रखने वाले व किसी के भी प्रति जवाबदेही न रखने वाले एक सर्वशक्तिमान संविधानेतर ' शक्ति केन्द्र ' की कल्पना और इच्छा भी कर रहे हैं हम में कुछ... हम में से कुछ को यह भी लगता है कि ऐसा लोकपाल बनने मात्र से ही देश में से भ्रष्टाचार व भ्रष्ट सोच छूमंतर हो जायेगी... हमें यह सवाल भी परेशान नहीं करता कि ' लोकपाल ' के ग्यारह या इक्कीस सदस्यों के तौर पर किसी भी तरह की राजनीतिक या व्यक्तिगत महत्वाकाँक्षा विहीन, किसी भी तरह के सामाजिक, धार्मिक व राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त, पूरी तरह से ईमानदार, सदाचारी, सभी को मान्य, सर्वज्ञानी, ताकत का दुरूपयोग करने के बारे में सोचने में भी असमर्थ, किसी भी तरह के दबाव व प्रलोभनों से परे व्यक्ति हम लायेंगे कहाँ से... क्योंकि अव्वल तो ऐसा कोई होगा नहीं और यदि होगा तो उसने अपनी जिंदगी का मुकाम पहले से ही तलाश लिया होगा...


खैर छोड़िये, अपनी ही रौ में लिख गया यह सब मैं...


आप तो आज सिर्फ यही बता दीजिये मुझे व अन्य पाठकों को भी...


कि 

आखिर कैसा लोकपाल चाहते हैं आप अपने इस महादेश के लिये ?




...

5 टिप्‍पणियां:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

असली लोकपाल तो जनता ही हो सकती है। लेकिन उसे अपने प्रतिनिधि चुनने से अधिक अधिकार प्राप्त होने चाहिए।

Bhushan ने कहा…

देश में एक प्रभावी लोकपाल को स्थापित करने के लिए कितने कानून बदलने होंगे इसका अनुमान लगाना कठिन है.

sajjan singh ने कहा…

ऐसा कोई व्यक्ति मिलना मुश्किल ही है जो पूरी तरह से दोष मुक्त हो इसलिए अभी तो जोक पाल बनने के आसार ही ज्यादा लग रहे हैं।

मेरे ब्लॉग पर पढ़ें- बाहर की समस्याओं के हल भीतर कैसे मिलेंगे ?

अजय कुमार झा ने कहा…

किसने कहा आपसे कि भगवान की तलाश की जा रही है जो सब तरह से मुक्त और एकदम अनोखा निष्पाप होगा । जी नहीं बिल्कुल नहीं , वो इसी समाज में से एक होगा , यकीनन फ़िर वैसा नहीं होगा जैसा कि आप तलाश रहे हैं , लेकिन वो किरनबेदी , वो जी आर खैरनार , टी एन सेशन जैसे होंगे जो यकीनन कुछ वो मिसालें कायम करेंगे लोकपाल के पद पर बैठ कर कि फ़िर कुछ निराश हो चुके लोगों को थोडा तो यकीन हो ही जाएगा बदलाव का । वैसे भी अगर संभावना ही ज़ाहिर करनी हो भविष्य के लिए तो मैं सकारात्मक पक्ष की तरफ़ देखना पसंद करता हूं । विचारोत्तेजक पोस्ट और एक जरूर प्रश्न

राजन ने कहा…

न लोकपाल न जोकपाल.हमें चाहिये जन लोकपाल.द्विवेदी जी से सहमत हूँ.वैसे कोई तो बात है इस विधेयक में जो सरकार इतना घबरा रही है.