बुधवार, 8 जून 2011

कितना और पीटा जायेगा अब एक मरे हुऐ सांप को... और क्या फायदा होगा इससे किसी को भी...

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खुद योगऋषि रामदेव जी के ही शब्दों में ' सरकार उनकी ९९ प्रतिशत मांगें मान चुकी थी '... तीन जून को ही वह चार जून की शाम को अनशन समाप्त करने के आशय का लिखित सहमति पत्र भी सरकार के मंत्रियों को दे चुके थे... पर उन्होंने चार जून की शाम को अनशन समाप्त नहीं किया...


नतीजे के तौर पर सरकार ने भी रामलीला मैदान को खाली करा लिया व योगॠषि को विमान से देहरादून व फिर हरिद्वार स्थित पतंजलि आश्रम पहुंचा दिया गया...


अब योगऋषि बाबा रामदेव ने अपने समर्थकों से तो अनशन तोड़ने को कहा है पर उनका अनशन जारी रहेगा... दिल्ली के नजदीक नौएडा जाकर अनशन करने की इजाजत उ०प्र० सरकार ने दी नहीं...


तो कुल मिलाकर नतीजा यह कि हरिद्वार स्थित अपने योगपीठ पर योगऋषि बाबा रामदेव जी अभी भी अनशन पर हैं... मीडिया वहाँ जमा है... और रोजाना ही सरकार, सतारूढ़ पार्टी व अनशनकारियों द्वारा दूसरे को लक्षित करती हुई बयानबाजी बदस्तूर जारी है...


मेरा आज का सवाल  है कि...





अभी भी यह सब जारी रखने से क्या कुछ 
भी हासिल कर पायेंगे योगऋषि,
उनको फायदा होगा या नुकसान ?












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9 टिप्‍पणियां:

रचना ने कहा…

ramdev kaa faydaa

bahut haen hero ban gayae

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

प्रिय प्रवीण जी ! नुक़्सान तो उन्हें स्टेज से छलाँग लगाते ही हो चुका था और बचा खुचा स्त्री वेश में प्रकट होने से हो गया । अब तो अनशन उस नुक़्सान की भरपाई के लिए किया जा रहा है , पूर्ण सुरक्षित तरीक़े से । यह भी ज़्यादा चलने वाला नहीं है और जब तक चलेगा नुक़्सान ही देगा फ़िज़ियोथेरेपिस्ट बाबा को !

बिना लिंक के ही,
सादर !

veeru ने कहा…

अब मै कांग्रेस
की बाबा रामदेव के
खिलाफ
घिनौनी रणनीति के बारे
मे बताता हूँ.
बाबा रामदेव ने जबसे
चार जून को आंदोलन
का ऐलान किया था.
तब से ही सरकार ने
अपनी घिनौनी रणनीति बनानी शुरु
कर दी थी.रही बात
माँगो की तो मांगे
तो कांग्रेस
कभी भी किसी भी हालत
मे नही मान सकती थी.
क्यो कि क्या कोई चोर
और उसके साथी कभी भी ये
मान सकते है
कि वो अपनी चोरी का खुलासा करे.
जब सुप्रीम कोर्ट कह कह
के थक गया कि कालेधन
जमा करने
वालो की सूची जारी करे.
जब इस भ्रष्ट सरकार ने
आज तक सूची तक
नही जारी की.
तो काले धन
को राष्ट्रीय
संपत्ति घोषित करना और
उसको वापस
लाना तो बहुत दूर
की बात है.
क्यो कि ये बात 100 %
सही है की खुद इस
गांधी फैमिली का अकूत
धन स्विस बैँक मे जमा है.
इस बारे मे सनसनी खेज
खुलासे बाबा रामदेव
की27
फरवरी की रामलीला मैदान
की विशाल रैली मे भी हुये
थे.
जिसमे विशाल जनसमूह
उमड़ा था और इस बिके
मीडिया ने उस
रैली को प्रसारित
नही किया था.
और जब आस्था चैनल ने उस
रैली को दिखाया तो तुरंत
इस सरकार ने आस्था चैनल
पर इस रैली को दिखाने
पर प्रतिबंध लगा दिया.
जारी...

veeru ने कहा…

उसके बाद से
कांग्रेस का केवल एक
ही उददेश्य था कि कुछ
ऐसा किया जाये जिससे
बाबा रामदेव पे
लोगो का विश्वास उठ
जाये.

क्यो कि कांग्रेस
जानती थी की उसको किसी भी विपक्षी पार्टी से
इतना खतरा नही है
जितना बाबा रामदेव से
है. क्यो कि उनके साथ
विशाल जन समर्थन है.
इसलिये कांग्रेस ने एक
ऐसी घिनौनी साजिश
रची. कि जिससे
लोगो का विश्वास
रामदेव से उठ जाये.
एक जून को जब चार
मंत्री एयरपोर्ट पर
बाबा को लेने गये
तो आम
जनता या मीडिया को तो छोड़ो .
स्वयं बाबा रामदेव
भी नही समझ पाये.
कि ये उल्टी गंगा कैसे
बही?
जब कि कांग्रेस के इस पैतरे
का केवल एक ही उद्देश्य
था.
कि किसी तरह
बाबा को प्रभावित करके
एक
चिटठी लिखवा ली जाये.
ताकि बाद मे ये साबित
किया जा सके.
कि अनशन फिक्स था और
लोगो का विश्वास
बाबा से उठ जाये.
लेकिन बाबा ने कोई पत्र
नही लिखा.
कांग्रेस ने हार
नही मानी
दुबारा मीटिँग की फिर
भी असफल रही.
और फिर उसने
तीसरी मीटीँग होटल मे
की.
वहाँ उन नेताओ के पास
बाबा की गिरफ्तारी का आदेश
भी था.
और होटल के बाहर
काफी फोर्स भी पहुच
गयी थी.
नेताओ ने बाबा पर बहुत
दबाब बनाया.
और ये कहा कि आप
की सारी मांगे मान
ली जायेँगी लेकिन आप एक
पत्र लिखे कि आप
अपना अनशन खत्म कर देँगे.
आपको ये पत्र
लिखना बहुत जरुरी है.
क्यो कि ये पत्र
प्रधानमंत्री को दिखाना है.और
ये एक आवश्यक
प्रक्रिया है.
बिना पत्र लिखे
वो बाबा को छोड़
ही नही रहे थे.
इसीलिये उस मीटीँग मे 6
घंटे का समय लग गया. उस
समय
बाबा रामदेव ये समझ गये
थे कि कुछ षडयंत्र
बुना जा रहा है.
तब उन्होने संयम से काम
लेते हुये पत्र लिखवाने पर
तो मान गये लेकिन खुद
साइन
नही किया बल्कि आचार्य
बालक्रष्ण से करवाया.
हालाकि कांग्रेस बाबा से
खुद साइन करने का दबाब
डालते रहे लेकिन बाबा ने
समझदारी से काम लेते हुये
खुद साइन नही किया.
तब जाकर बाबा उस
होटल से बाहर निकल
पाये.
उन्होने रामलीला मैदान
पहुचते ही ये
बता दिया कि उनके
खिलाफ षडयंत्र
रचा जा रहा है और वक्त
आने पर खुलासा करेँगे.
उसके बाद चार तारीख
को नेताओ ने
बाबा को फोन करके झूठ
बोल दिया.
कि आपकी अध्यादेश लाने
की मांगे मान ली गयी है
और आप अनशन खत्म करने
की घोषणा कर दे.
कांग्रेस इस बात
का इंतजार कर
रही थी कि एक बार
बाबा अनशन खत्म
की घोषणा कर दे तो उसके
बाद वो पत्र मीडिया मे
जारी कर दिया जाये
जिससे ये साबित हो जाये
की अनशन फिक्स था और
लोगो की नजर मे
बाबा नीचे गिर जाये.
बाबा ने फिर
घोषणा भी कर
दी की सरकार ने
हमारी माँगे मान ली है
और वो जैसे ही हमे लिखित
मे दे देगी.हम अनशन खत्म
कर देँगे.
सरकार फिर फस
गयी क्यो कि उसने
बाबा से झूठ
बोला था कि वो अध्यादेश
लाने की बात लिख कर
देगी.जब कि वास्तव मे
उसने कमेटी बनाने
की बात लिखी थी. और
बाबा जब तक अध्यादेश
लाने की बात लिखित रुप
से नही देखेँगे. तब तक
वो आंदोलन नही खत्म
करेँगे.
तब कांग्रेस के चालाक
वकील मंत्री सिब्बल ने
तुरंत मीडिया को पत्र
दिखाया और ये
जताया कि ये अनशन पहले
से फिक्स था.
क्यो कि सिब्बल
जानता था कि मीडिया बिना कुछ
सोचे समझे
बाबा की धज्जियाँ उड़ाने
मे लग जायेगा.
और यही हुआ
भी.मीडिया ने बिना कुछ
समझे भौकना शुरु कर
दिया की बाबा ने
धोखा किया.
लोगो की भावनाओ से
खेला आदि.
जब
बाबा को पता चला कि सिब्बल
ने एक कुटिल चाल खेली है.
तब उन्होने
बड़ी वीरता से उस
धज्जियाँ उड़ाने को आतुर
मीडिया को सारे
सवालो के जबाब दिये और
स्थिति को संभाल लिया.
कांग्रेस
अपनी इतनी बड़ी चाल
को फेल होते हुये देख
बौखला गयी.
और उस मूर्ख कांग्रेस ने
मैदान मे
रावणलीला मचा कर
अपनी कब्र खोदने
की शुरुआत कर दी.
June 6, 2011 11:17 AM

गजेन्द्र सिंह ने कहा…

योग गुरू बाबा रामदेव जी के साथ जो कुछ अभद्रता की गई वह निंदनीय है लेकिन यह भी सच है कि आदमी विपत्तिकाल में ही पहचाना जाता है। संकट में ही आदमी की वीरता और उसके नेतृत्व की परख होती है। यह देखकर बहुत दुख हुआ कि ज़रा सी मुसीबत पड़ते ही ‘भारत स्वाभिमान ट्रस्ट‘ के संस्थापक औरतों के आंचल तले जा दुबके जो कि न तो एक वीर गृहस्थ को शोभा देता है और न ही एक सन्यासी को।

गजेन्द्र सिंह ने कहा…

बाबा का दावा है कि महिला के कपड़ों में उन्हें रामलीला मैदान से निकलना पड़ा...

वहां कोई भी वजह रही हो बाबा की इस हाल में निकलने की....लेकिन अगले दिन हरिद्वार पहुंचने के बाद भी वो क्यों महिला का सलवार, कमीज़, दुपट्टा ओढ़े रहे...

क्या इसलिए कि इस हाल में मीडिया के सामने आकर रोने से पूरे देश में उनके लिए सहानुभूति लहर दौड़ जाएगी...बाबा जी, देशवासी अब इतने अपरिपक्व भी नहीं रहे कि कोई कुछ कहे और वो आंख मूंद कर यकीन कर लें....

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

यह तो समय ही बताएगा।

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बाबूजी, न लो इतने मज़े...
चलते-चलते बात कहे वह खरी-खरी।

veeru ने कहा…

गजेन्द्र सिँह जी
आपने सही कहा
कि विपत्तिकाल मे आदमी की पहचान होती है. और विपत्तिकाल मे बाबा रामदेव बिल्कुल खरे उतरे.

जब देश मे इतनी विपत्ति आयी हुयी है.
चारो तरफ भ्रष्टाचार फैला है.
जनता का पैसा विदेशो मे भेजा जा रहा है.
ऐसे भयँकर विपत्तिकाल मे उन्होने दिल्ली मे एक लाख लोगो के साथ जाकर
उस निरंकुश सरकार को ललकारा.
ये उनकी देशभक्ति का परिचायक है.

वरना अगर वो भी आपकी तरह कंप्यूटर पे बैठ कर चुटकले सुनाते रहते.
तो हो जाता इस देश का कल्याण.

anshumala ने कहा…

मानाने में क्या है सरकार तो मुंह जबानी सभी की मांगे मान लेती है लोकपाल बिल के साथ क्या हो रहा है वो सभी देख रहे है जिसके लिए लिखित हामी भरी गई थी फिर जिसके लिए मुंह जबानी हामी भरी गई थी उसका क्या होगा ये सब जानते है और ये हामी भी बस कुछ करने के लिए की गई थी या बस बाबा को उलझाने के लिए ये भी दिखा गया | सुप्रीम कोर्ट महीनो से इस मुद्दे पर गला फाड़ रही है सरकार उनकी तो सुनाने को तैयार नहीं है कुछ करने को तैयार नहीं है किसी और की क्या सुनेगी | देश में हजारो करोडो के मालिक हसन अली जैसो को गिरफ्तार करने के लिए भी कोर्ट को सीधा आदेश देना पड़ा फिर विदेशो से ये धन काया लायेंगे और क्यों लायेंगे क्योकि वो सारा धन इन्ही लोगो का है जो यहाँ संसद में बैठ कर कानून बनाते है | बाबा मरे या देश की जनता भूखे मरे अनाज सडा कर फेकने में विश्वास रखने वाली सरकार कभी कुछ नहीं करेगी | उसे जो करना था वो उसने कर दिया की बाबा को इस तरह बदनाम करो की सारी जनता भ्रष्टाचार के मुद्दे को भूल कर बस बाबा के नाम पर उनके कम पर ही लकीरे पिटती रहे सरकार से ये न पूछे की भैया जब सारी मांगे मान ली थी तो जरा बताओ की उन्हें पूरा करने के लिए जमीनी रूप से क्या क्या किया या बस समिति कमिटी बनाने का लालिपाप थमा कर जनता को फिर से सुला दिया | लकीर पीटना बेकार है चलिए एक बार फिर हम सभी आम आदमी वैसे ही सो जाते है जैसे आजादी के बाद से अब तक सो रहे है क्रांति करना हम जैसे नकारो के बस की बात नहीं है |