बुधवार, 1 जून 2011

सोचो अगर ऐसा हो गया तो क्या होगा...

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जन लोकपाल बिल पर बनी ड्राफ्टिंग कमेटी में सरकार तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के बीच मामला गरमा गया है...

(Government strongly opposing proposals for inclusion of Prime Minister, higher judiciary and acts of Members of Parliament inside Parliament under its purview. (देखिये यहाँ )

बाबा रामदेव जी भी प्रधानमंत्री को लोकपाल के पद के दायरे में लाने के हक में नहीं हैं, (देखिये यहाँ)... 

इस पर अरविन्द केजरीवाल साहब कहते हैं... Kejriwal said if the Prime Minister was kept out of the Lokpal, then there could be ten departments under him which would straight away come out of the anti-corruption watchdog. Then other ministers can also ask the bribe-givers to pass on all the bribes to the Prime Minister who enjoys immunity. "If the Prime Minister becomes corrupt then nothing can be done about it," he said.

अब सवाल यह उठता है कि उच्च न्यायपालिका, प्रधान मंत्री व सांसद पूर्णरूपेण ईमानदार ही होंगे यह कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है...

अनाज घोटाला, २जी घोटाला, कॉमनवेल्थ घोटाला, जमीन घोटाला घोटाले ही घोटाले सुनाई देते हैं चारों ओर... सुप्रीम कोर्ट के जज भी न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार को स्वीकारते हैं...इन्हीं घोटालों में शामिल कोई राजनीतिज्ञ यदि घोटाले में ही अर्जित धन के बूते पर छूट कर अपने दल का सर्वमान्य नेता बन गया और चुनाव के उपरान्त वही दल सत्ता में आ गया...


तो क्या वही घोटालेबाज प्रधानमंत्री नहीं बन जायेगा...


एक कदम और आगे जाकर सोचिये यदि वही शख्स कहीं 'जन-लोकपाल' भी बन पाने में कामयाब रहा तो...




सोचो अगर ऐसा हो गया तो क्या होगा...?








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1 टिप्पणी:

डा० अमर कुमार ने कहा…

यहीं पर यह सवाल उठता है कि जनलोकपाल विधेयक के गठन समिति में धँसे लोग किस हैसियत से जनता की नुमाइन्दगी कर रहे हैं, क्या गारँटी है कि वह बन्दरबाँट की उपज नहीं हैं ? सबकुछ मीडिया ( जो स्वयँ ही बिकाऊ है ) के सार्टीफ़िकेट और कवरेज़ के भरोसे है ?
यह शँका भी उठनी स्वाभाविक है कि आख़िर लोकपाल के चयन में जनता की भागीदारी कहाँ है, यह तो अपने पीछे भीड़ इकट्ठी की क्षमता पर जा गिरी है । यह भी पारदर्शी नहीं हैं कि, जनलोकपाल महोदय के कलापों की ज़वाबदेही किसके प्रति होगी... क्या वह स्वयँ ही भारतीय लोकतँत्र के नये चरवाहे नहीं बन जायेंगे ?