सोमवार, 9 मई 2011

एक अनूठी भारतीय विशिष्टता ( A peculiar Indian characteristic )... हम कब उबरेंगे इससे...

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हम मकान बनाते हैं तो सड़क की ओर को दो-तीन फीट अपनी बाउंड्री वाल में घेर लेते हैं... फ्लैट लेते हैं तो बालकनी को कमरा बना देते हैं... रिहायशी कालोनियों में हम दुकानें व शापिंग काम्पलेक्स बना देते हैं... महंगे से महंगे मकान का भी कार उतारने का रैंप सड़क घेर कर बनाते हैं... हमारे अधिकाँश धर्मस्थल खाली पड़ी सार्वजनिक जगहों पर कब्जा कर बनाये होते हैं... कई मामलों में तो चलती सड़क या रेलपटरी पर भी यह धर्मस्थल उग आते हैं... हम सड़क घेर कर जागरण करते-नमाज पढ़ते हैं... 

और यदि कानून-प्रशासन इस पर कोई रोकटोक लगाता है तो हम इन सब नियमों के उल्लंघन, इस अवैद्मता के नियमितीकरण की माँग करते हैं... धार्मिक आस्था, जन भावना, आर्थिक मजबूरी, रोजगार बचाने आदि आदि के नाम पर... 

"Regularization of illegality is a peculiar Indian characteristic. First you make the law and then break law...,"  "अवैद्मता का नियमितीकरण एक अनूठी भारतीय विशिष्टता है, हम पहले कानून बनाते हैं फिर स्वयं ही उसको तोड़ते हैं "... कह रहे हैं भारतीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश (यहाँ देखें ) ...

आपको क्या लगता है कि हम अपना यह अनूठापन छोड़ेंगे कभी, या यों ही बने रहेंगे ?




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2 टिप्‍पणियां:

ajit gupta ने कहा…

भारत में बड़े-बड़े घर बनाने का फैशन है, वर्तमान में उनके रहने वाले लोग कम से कम होते जा रहे हैं। लेकिन फिर भी हम सड़क पर घेरा डालकर उसपर नाजायज कब्‍जा कर लेते हैं। पता नहीं हमारी मानसिकता कभी सुधरेगी भी या नहीं।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

जो सुधरना नहीं चाहते उनके लिए क़ानून है अगर उसे नोएडा की तरह लागू किया जाए। नोएडा के पास ही एक क़स्बा है दादरी। वहां आप पोस्ट में वर्णित बातों में से कुछ भी कर सकते हैं लेकिन नोएडा मं आप ऐसा कुछ कर ही नहीं सकते। मुझे ताज्जुब होता है यह देखकर कि एक ही सरकार के नियम एक ही ज़िले में किस तरह बदल जाते हैं।
अगर विभाग सतर्कता दिखाएं तो इन आदतों का लोप हो सकता है।