शुक्रवार, 27 मई 2011

बस इतनी ही अकल पाई जाती है हम हिन्दी वालो में... :(

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डीटीएच प्लेटफार्म पर कब्जा किये बैठे २४ x ७ खबरिया हिन्दी चैनलों को आप एक बार एक दो घंटे लगातार देख लें, सिर में दर्द होने की पूरी गारंटी है...


खबर चाहे कोई भी हो ओसामा की मौत या भारत का विश्वकप जीतना या फरीदाबाद का प्लेनक्रैश... इन चैनलों के खबर देने का अंदाज वही है... अमेच्योर ग्राफिक, बेहूदे हेडिंग और चीख-चीख कर बातें करते न्यूज एंकर... जिनका एकमात्र उद्देश्य रहता है उस खबर को अलॉट किये गये टाईम ( जो कभी आधे घंटे से कम नहीं होता ) को किसी तरह पूरा करने के लिये साउंड बाइट देना... जिस तरह के मूर्खता भरे व बेहूदा सवाल यह एंकर करते हैं उसे देखने के बाद आप केवल सिर के बाल ही नोच सकते हैं...


फिर भी इन चैनलों को टीआरपी मिलती है, चैनल वाले कहते हैं कि वह वही दिखाते हैं जो देखा जाता है...

मैं यहाँ पर इन एंकरों की काबिलियत पर कुछ नहीं कहना चाहता ... ;) पर यदि यह बात सच है कि हिन्दी का दर्शक ही यही देखना चाहता है...


तो अपना आज का सवाल है...


क्या केवल इतनी ही अकल पाई जाती है हम हिन्दी वालो में..?










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1 टिप्पणी:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Kitni bhi sahi Akhir Aql hai to sahi.
ख़ुशी के अहसास के लिए आपको जानना होगा कि ‘ख़ुशी का डिज़ायन और आनंद का मॉडल‘ क्या है ? - Dr. Anwer Jamal
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/05/dr-anwer-jamal.html