सोमवार, 23 मई 2011

कितनी चीयरफुल हैं यह लड़कियाँ...

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आईपीएल जिसके लीग मुकाबले कल रात खत्म हुऐ, निश्चित तौर पर एक ' दर्शनीय तमाशा ' है... प्रत्येक टीम में केवल चार ही विदेशी खिलाड़ी खिलाने की बाध्यता के कारण सभी टीमों में कुछ ऐसे भारतीय खिलाड़ी भी खेल रहे हैं जिनकी गेंदों पर आसान रन व जिनके बल्लेबाजी करने के दौरान विपक्षी गेंदबाज को कुछ बहुत ही आसान विकेट मिलते हैं... बाउन्ड्री अधिकतर मैदानों में बहुत छोटी कर दी गई है जिससे दर्शकों को खूब सारे चौक्के-छक्के देखने को मिलें... 


पर आज सवाल इस बारे में नहीं...


आईपीएल के नियमों के अनुसार हर टीम को एक निश्चित संख्या में  ' चीयर गर्ल्स ' मैदान में उतारना जरूरी है... अधिकाँश टीमों की चीयर गर्ल्स गोरी चमड़ी वाली व इम्पोर्टेड हैं...


आज का सवाल है...


आईपीएल के इस दर्शनीय तमाशे की सफलता में इन चीयरगर्ल्स का कितना योगदान है ?




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2 टिप्‍पणियां:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

नारी जब तक नेक उसूलों की पैरवी करना न सीख ले तब तक वह हवस के बाज़ार में दौलतमंदों के लिए नंगा होकर नाचती रहेगी।
जानिए नेकी के उसूलों को अपनाने के बारे में, सच बनाता है चीयरफ़ुल नारी को भी और उसके पार्टनर को भी।

http://islam.amankapaigham.com/2011/05/blog-post.html

anshumala ने कहा…

कही पढ़ा की इन लड़कियों के छोटे कपड़ो के कारण परिवार के साथ मैच नहीं देख पाते लोग और कुछ लोग इन लड़कियों को देखने के लिए ही मैच देखते है , पढ़ कर लगा की टीवी पर मैंने भी कई बार मैच दखा है जिस पर ये लड़किया कुछ सेकेण्ड के लिए ही दिखाई जाती है उतनी देर में लोग उनका नाच देखे उनके कपडे देखे या उनका शारीर देखे | जितना हो हल्ला इन पर मचाया जा रहा है मुझे लगता है की इससे भी कम कपड़ो में डियो से लेकर सीमेंट के विज्ञापनों में भी लड़किया आप को दिख जाएँगी जिनका काम है अपने भावभंगिमा और छोटे कपड़ो से आप आकर्षित करना है वो तो हर चैनल पर मौजूद है किसी भी समय और आँख सकने वालो के लिए भी चैनलों की कमी नहीं है | मुझे तो ये बदलाव बस उतना ही बदलाव लगता है जैसे खिलाडियों के कपड़ो का रंगीन हो जाना | बाकि लोगो ( पुरुषो ) की सोच का कोई भरोसा भी नहीं है :)