रविवार, 22 मई 2011

क्या योगऋषि रामदेव जी को भी वह सब सहज ही मिलेगा, जो अन्ना को मिला था ....

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चार जून से दिल्ली के रामलीला मैदान पर अनशन पर बैठने जा रहे हैं योगऋषि रामदेव...


माँग बस एक ही है... 

काले धन की अर्थव्यवस्था पर लगाम लगाने के लिये कारगर उपायों की तथा विदेश में जमा कालेधन को वापस लाने की...


अन्ना जब अनशन पर बैठे थे तो उनको अभूतपूर्व समर्थन मिला था इसी बहाने गंगा नहा अपने पर लगे दागों को मिटाने का प्रयास करते मेनस्ट्रीम मीडिया का, मोमबत्ती गैंग का, पेज थ्री क्राउड का तथा सत्ता व उद्योग जगत के बीच लाइजन का काम करने वालों का...

पहले लोकपाल बिल बनेगा, फिर लोकपाल, फिर तमाम निगरानी करने वाली संस्थाओं की तरह वह भी लग जायेगा दीवार पर एक ट्राफी की तरह... दंतहीन व बेअसर... यह सोच थी इन सब की...


पर जब आज सचमुच के ठोस उपायों की बात हो रही है... तो क्या यह सभी जो कालेधन की इकॉनामी के प्लेयर हैं कालिदास की तरह ही उस डाल पर कुल्हाड़ी चला पायेंगे जिस पर वह खड़े हैं...

मुझे लगता है नहीं ...


आप की क्या राय है ?






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4 टिप्‍पणियां:

ravikumarswarnkar ने कहा…

दिल के खुश रखने को गालिब ये खयाल अच्छा है...
बस इसी तरह दुकाने चलती रहेंगी...

अमीत तोमर ने कहा…

ham sabhi baba ji ke sath hen pura smarthan kren ge apni akhri sans tak ladenge ghar par chupchap beth kr kuch nhi hoga kisi ko to age ana hi hoga

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

बाबा को सेकुलर(?) मिडिया भी कहाँ कवरेज देगा ? न ही मोमबत्ती ब्रिगेड आएगी |

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

लेबल वाक्य से सहमत !