मंगलवार, 17 मई 2011

हम एक व्यक्ति पूजक समाज हैं जो लोकतांत्रिकता का फटा हुआ लबादा ओढ़े है...

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पाँच राज्यों के चुनाव हुऐ...


बंगाल में जीतीं ममता बनर्जी...


आसाम में जीते तरूण गोगोई...


तमिलनाडु में जीतीं जयललिता...


पुडुचेरी में जीते रंगासामी... 


केरल में अच्युतानंदन भले ही बहुमत न ला पाये पर यह प्रदर्शन भी जीत के बराबर ही था...



इनमें से कोई भी जीत नीतियों, पार्टियों की विचारधारा या लोकतांत्रिकता की नहीं है...



यह जनता की ' व्यक्ति पूजा ' तथा पूज्य के प्रति आभार प्रदर्शन है ।




क्या मेरी तरह ही आप भी नहीं सोचते कि हम एक व्यक्ति पूजक समाज हैं जो लोकतांत्रिकता का फटा हुआ लबादा ओढ़े है ?










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2 टिप्‍पणियां:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

जनता का कैरेक्टर क्या है ?
जनता की अक्सरियत ख़ुद बदमाश है।
आप स्टेशन पर जनता के अंग किसी एक वेंडर से चाय लीजिए। वह आपको ऐसी चाय पिलाएगा कि उसे पीकर आप तुरंत ही चाय पीने से तौबा कर लेंगे। आप बाहर निकलिएगा तो ऑटो वाला आपसे नाजायज़ किराया मांगेगा। वह भी जनता का ही अंग है। आप रेस्टोरेंट या ढाबे पर जाएंगे तो वह आपको कितनी भी पुरानी सब्ज़ी परोस सकता है। आप पूजा के लिए केसर ख़रीदिए तो उसमें केसर के बजाय भुट्टे के बाल रंगे हुए निकलेंगे। आप पूजा का नारियल ख़रीदिए तो उसमें गिरी ही नहीं निकलेगी। आप अंदर मंदिर में जाएंगे तो वहां आपको पता चलेगा कि ‘ये स्थल निःसंदेह देव रहित हैं '।‘ (लिंक पर जाएं)

जनता ख़ुद ग़लत है और ग़लत लोगों को ही वह चुनती है Self Improovement

VICHAAR SHOONYA ने कहा…

@ आप अंदर मंदिर में जाएंगे तो वहां आपको पता चलेगा कि ‘ये स्थल निःसंदेह देव रहित हैं '।



अतः आप सचमुच के देव रहित स्थल पर अपनी आस्था बनाये रखें.