सोमवार, 16 मई 2011

यूँ मुड़-मुड़ के ना देख... मुड़-मुड़ के !

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बड़े शहरों ( मेट्रो ) की तो कह नहीं सकता... पर भारत के अधिकाँश मझोले या छोटे शहरों, कस्बों व गाँवों में भी एक आम सा नजारा है... वह है ...

किसी सार्वजनिक जगह, उदाहरण के लिये बस स्टॉप ही ले लीजिये... आप नोटिस करेंगे कि काफी सारे लोग, पुरूष, महिलायें व बच्चे खड़े हैं... सब कुछ सामान्य सा ही चल रहा है... अचानक वहाँ पाश्चात्य परिधान में... जीन्स-टीशर्ट पहने कुछ महिलायें पहुंच जाती हैं... इससे भी कुछ फर्क नहीं पड़ता कि वे युवा हैं अथवा प्रौढ़...

आप पायेंगे कि वहाँ मौजूद अधिकाँश पुरूष आँखें फाड़ फाड़ उनको घूरने लगेंगे... जो ऐसा नहीं करेंगे वह भी कनखियों से उन्हीं को देखना जारी रखेंगे...

अगर आप ने भी यह व्यवहार देखा है तो बताइये...



ऐसा क्यों होता है ?




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