रविवार, 15 मई 2011

जात न पूछो केवल साधु की... बाकी सब की पूछो और गर्व से बताओ भी !!!... सही है न...

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ब्लॉग लिखते हैं, ब्लॉग पढ़ते हैं, यानी इंटरनेट-कंप्यूटर तक पहुंच है आपकी... एक ऐसा देश जहाँ तकरीबन आधी आबादी २० रूपये  रोज से कम पर काम चलाती है, वहाँ पर यह कर पाना आपको खुदबखुद समर्थ, प्रबुद्ध व अभिमत अगुआ ( Opinion Leader ) का दर्जा दे देता है... इसीलिये यह सवाल है आज...

अक्सर लिखा देखता हूँ कि फलाना-फलाना कुलीन ब्राह्मण , कायस्थ कुल भूषण, शेख पठान, सुन्नी सैय्यद , खानदानी राजपूत परिवार आदि-आदि से है... जातीय आधार पर ही लोगों को विभिन्न विवाद आदि में अपने रूख का निर्धारण करते देखता हूँ... मित्रतायें यहाँ तक कि रहने के लिये कॉलोनी का चयन तक जातीय आधार पर करते हैं लोग... स्वजातीय के अनुचित कृत्य का भी बचाव करते देखता हूँ लोगों को...  जाति के आधार पर ही आर्थिक-राजनीतिक-सामाजिक-कार्य क्षेत्रीय-ब्लॉगरीय वरीयतायें भी निर्धारित होती हैं हम में से अधिकाँश की...

तो जनाब अपने दिल के अंदर झाँकिये और बताइये दिल से...


कितने जातिवादी हैं आप ?






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4 टिप्‍पणियां:

Shah Nawaz ने कहा…

सोचता हूँ कि घोर जाती विरोधी हूँ... लेकिन हकीक़त यही है कि अन्दर से कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में अभी भी जातिवादी ही हूँ... :-(

Pranay ने कहा…

Wah Shah ji.. Jaat kee aaj bhi hoti hai baat to dil ko thes pahunchti hai.... kambakht samjhte hi nahi bhawnaon ko....

वाणी गीत ने कहा…

जब तक हमारा कानून और संविधान सुविधाएँ और असुविधाएं जातियों और धर्मों के आधार पर देता रहेगा ,घनघोर प्रगतिवादियों को भी देख रही हूँ ब्लॉग पर जो प्रगतिवाद के नाम पर जाति विशेष पर व्यंग्य और आक्षेप करने से नहीं चूकते, ऐसे में जाति भूलने की बात बेमानी ही है !

संजय ने कहा…

ये हमारे संस्कार में घुश चूका है जिसको जाने में कुछ समय लगेगा या हमारे समाज के प्रतिनिधि इसको जाने ही न देंगे