शनिवार, 14 मई 2011

आज के समय में हिन्दी ब्लॉगिंग कर के क्या कुछ उखाड़ पाते हैं आप, मैं या अन्य कोई धुरंधर ही....

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ब्लॉगर स्टैट्स ( Blogger Stats ) को मैं अपने ब्लॉग पर आये पाठकों की आवाजाही का एक विश्वसनीय स्रोत मानता हूँ... उसके अनुसार मेरी सबसे लोकप्रिय पोस्ट को अभी तक ५३० पाठक मिले हैं... हो सकता है कि कुछ पुराने व स्थापित ब्लॉगरों को ज्यादा पाठक मिलते हों... पर मेरा अनुमान है कि हजार-बारह सौ से ज्यादा पाठक किसी भी हिन्दी ब्लॉगर को नहीं मिल रहे हैं...

लग रहा है कि हिन्दी ब्लॉगिंग महज एक हिन्दी ब्लॉगर द्वारा साथी हिन्दी ब्लॉगरों के लिये की जा रही विधा बन गई है, हिन्दी ब्लॉगर ही  अधिकाँशतया हमारा पाठक भी है, सामान्य पाठक का अभाव है...

ऐसे में क्या आपको लगता है कि आपका आज का लिखा कुछ प्रभाव डालने में सक्षम है कहीं पर भी ? 



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11 टिप्‍पणियां:

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

हम लोग उखाड़ने की प्रवृति से आएं बाहर
कुछ नया उपजाएं, जड़ों में उपयोगी खाद भरें
चाहे पाठक 5 ही हों, नहीं पचास हजार
हिंदी का बाजार कभी नहीं खा सकता है मार
धीरज धरें, तपस्‍या करें, पाठक भी मिलेंगे
और मिलेंगे नोट भी
अगर आप सबको नोटों से ही तसल्‍ली मिलती है
और आती है जीवन में बहार
वैसे नोटों से बाहर भी जीवन है
मन की प्रसन्‍नता सबसे बड़ा आभूषण है।

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

कुछ नहीं, मन का लिखा एक जगह सहेजा तो जाता है। बहुत नहीं, कुछ तो पढ़ते हैं। कई बार तो ब्लॉग पढ़ते-पढ़ते लिखने की प्रेरणा भी मिलती है। समय का सुंदर सदुपयोग है।

एस.एम.मासूम ने कहा…

अधिक नहीं कहूँगा , बस एक उदाहरण. मैंने २ महीने पहले बनाया जौनपुर ब्लॉगर और फोल्लोवेर थे ३२, पढ़क थे १२५ रोजाना. जब मैं इस बार जौनपुर पहुंचा तो वहाँ के लोगों ने, पत्रकारों ने ऐसा स्वागत किया कि मैं भी अचंभित रह गया. मेरे लेखों को लोगों ने सराहा और हर बड़े छोटे अखबार ने खबर बनाई. क्या यह उस बात का सुबूत नहीं कि , ब्लॉग के लेखों का ज़मीनी स्तर पे बड़ा असर होता है. बस आप कुछ करें तो.. झगडे, नफरत, मैं से दूर हट के समाज के बारे मैं सोंचो. असर अवश्य होगा.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आपने कहा कि
' हिन्दी ब्लॉगर ही अधिकाँशतया हमारा पाठक भी है, सामान्य पाठक का अभाव है...'
जबकि मैं समझता हूँ कि
हिन्दी ब्लॉगर के रूप में हमें बहुत से सामान्य ब्लॉगर्स मिले हुए हैं .
इनके अलावा भी बहुत सामन्य ब्लॉगर्स सही-गलत विषय-वस्तु तलाश करते हुए मेरे ब्लॉग्स तक पहुँच रहे हैं.
वेद-कुरआन पर मैं अब कम ही कुछ लिख पाता हूँ , इसके बावजूद आज भी उसे मेरे उन ब्लॉग्स से ज़्यादा पाठक मिल रहे हैं , जिन पर कि मैं नियमित लिख रहा हूँ.

http://quranse.blogspot.com/2011/05/quranic-teachings.html

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Proof Correction

आपने कहा कि
' हिन्दी ब्लॉगर ही अधिकाँशतया हमारा पाठक भी है, सामान्य पाठक का अभाव है...'
जबकि मैं समझता हूँ कि
हिन्दी ब्लॉगर के रूप में हमें बहुत से सामान्य पाठक मिले हुए हैं .
इनके अलावा भी बहुत सामन्य ब्लॉगर्स सही-गलत विषय-वस्तु तलाश करते हुए मेरे ब्लॉग्स तक पहुँच रहे हैं.
वेद-कुरआन पर मैं अब कम ही कुछ लिख पाता हूँ , इसके बावजूद आज भी उसे मेरे उन ब्लॉग्स से ज़्यादा पाठक मिल रहे हैं , जिन पर कि मैं नियमित लिख रहा हूँ.
हक़ीक़त यह है कि अगर आपकी ब्लॉगिंग मैसेजफुल है , उसमें सच्चाई है तो झूठ उखड पड़ता है , एकदम हत्थे से ही .

http://quranse.blogspot.com/2011/05/quranic-teachings.html

रचना ने कहा…

yes i do believe that by blogging in hindi i have found a platform where i can awaken the woman make them think
for me every woman who has become a follower of naari blog is one more reader to read the radical views expressed by me

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

पाठक तो एक भी बहुत है। मैं सिर्फ और सिर्फ एक पाठक के लिए तीसरा खंबा पर कानूनी सलाह लिखता हूँ। लेकिन मेरे पास हमेशा गैरब्लागर पाठक प्रश्न करने आते हैं। अनेक ने मुझे अपने यहाँ आने का न्यौता दिया है। अनेक कोटा आ कर मुझ से मिलना चाहते हैं। मैं जहाँ गया हूँ, वहाँ न केवल ब्लागरों ने अपितु पाठकों ने बहुत स्नेह और आदर मुझे दिया है। यदि एक व्यक्ति भी मेरे लेखन से लाभ उठाता है तो बहुत है। मेरी बहुत सी पोस्टें हैं जो एक हजार से अधिक पढ़ी गई हैं। आज किताब कितनी छप रही है? एक हजार, वह भी धन दे कर। फिर उन्हें पढ़ने कित्ते लोग आते हैं?
किसी तरह का आर्थिक लाभ नहीं मिलने पर भी मुझे नहीं लगता कि ब्लागरी घाटे का सौदा है।

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

ब्लोगर ही हमारे पाठक है इस बात से मैं सहमत नहीं हूँ , ब्लॉग पर ब्लोगर्स के अलावा भी पाठक आते है और वे किसी एग्रीगेटर के माध्यम से नहीं वे गूगल खोज से आते है उनका टार्गेट किसी विशेष ब्लॉग पर आने का नहीं होता वे तो अपनी खोज के माध्यम से आते और उनकी रूचि का मसाला मिलने पर वे उस ब्लॉग का पूरा फायदा भी उठाते है अभी तक मैंने पाया है कि ज्ञानदर्पण.कॉम पर ६०% पाठक गूगल से आते है बाकी ४०% में ब्लोगर,फेसबुक से व वे पाठक होते है जो ब्लॉग से परिचित हो चुके है और दुबारा आते है | ब्लोग्वानी व चिट्ठाजगत बंद होने के बाद के नए आये एग्रीगेटर्स से बहुत कम पाठक आते है फिर भी अभी तक पाठक संख्या पर कोई फर्क नहीं पड़ा ,बढ़ता ही जा रहा है |

Suresh Chiplunkar ने कहा…

ब्लॉगिंग हमेशा कुछ "उखाड़ने" के लिये ही नहीं की जाती है प्रवीन भाई… :) :)
जब से मीडिया "फ़ुल्टू बिकाऊ" हो गया है, तब से ब्लॉगिंग की इज्जत और पूछपरख तो निश्चित ही बढ़ी है… ये बात और है कि "मेनस्ट्रीम मी्डिया"(?) वाले इसे अपनी बेइज्जती मानकर स्वीकार नहीं करते… :)
ब्लॉगिंग से उखाड़ा नहीं जा सकता होता, तो "स्वनामधन्य"(?) और "स्वयंभू" बड़े पत्रकार खुद अपना-अपना ब्लॉ्ग खोलकर नहीं बैठते… :)

Udan Tashtari ने कहा…

मेरे ईमेल से फीड स्बस्क्राईब करने वाले लगभग ३५० लोग ऐसे हैं जो ब्लॉगर नहीं हैं. समय दिजिये, धीरज रखिये प्रवीण भाई...शुभकामनाएँ.

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

द्विवेदी जी की बात से सहमत और इसका सबूत है मेरे अंग्रेजी ब्लाग में एक पोस्ट का एक वाक्य जो है-If only one reader of your blog, book or letter is alive in any part of the world, if he/she feels dead without your writings, your writing becomes great success. So don’t think the number of readers, think about readers who reads not increases the hit counter by one. अंग्रेजी का ज्ञान कम है, इसलिए गलती होने पर मुझे खुशी है न कि मैं किसी से माफ़ी मांगूँ।

चिपलूनकर जी की बात ठीक ठाक ही है।

' हिन्दी ब्लॉगर ही अधिकाँशतया हमारा पाठक भी है, सामान्य पाठक का अभाव है...' यह तो सही है ही लगभग 90 प्रतिशत।

मैं मात्र एक महीने पुराना और नया ब्लागर हूँ और मेरी सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली पोस्ट को 95 बार पढ़ा जा चुका है।