बुधवार, 11 मई 2011

कैसे कहेगा कोई कि इस मुल्क में सभी को इन्साफ मिलता है ?

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मैं अपनी ओर से कुछ नहीं कहूँगा आज...
दुखी हूँ मैं...
स्थितियाँ यहाँ तक पहुँच गई हैं कि आपको हैरानी होगी...
द् टेलीग्राफ की यह खबर देखें यहाँ पर... 

मैं खबर से ही उद्धृत करता हूँ बिना कुछ जोड़े या घटाये...

The apex court said a “certain section of the subordinate judiciary” was bringing the whole judiciary “into disrepute” by passing orders on “extraneous” considerations. “Such subordinate judiciary judges are bringing a bad name to the whole institution and must be thrown out of the judiciary.”
Justice Katju said the conduct of the subordinate courts was shaming the judiciary. “We are told that 80 per cent or 90 per cent of the judges are corrupt,” he said. “These kinds of malpractices should be weeded out and those who are incorrigible should be thrown out.” 

ऐसी हालत में  कैसे कहेगा कोई कि इस मुल्क में सभी को इन्साफ मिलता है ?
आपको नहीं लगता कि हर क्षेत्र की खरपतवार निकाल बाहर करने का समय अब आ गया है , और इसे अब टाला नहीं जा सकता ?




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2 टिप्‍पणियां:

अमीत तोमर ने कहा…

चलो दिल्ली दोस्तों अब वक्त अग्या हे कुछ करने का भारत के लिए अपनी मात्र भूमि के लिए दोस्तों 4 जून से बाबा रामदेव दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन पर बैठ रहे हें हम सभी को उनका साथ देना चाहिए में तो 4 जून को दिल्ली जा रहा हु आप भी उनका साथ दें अधिक जानकारी के लिए इस लिंक को देखें http://www.bharatyogi.net/2011/04/4-2011.html

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आखि़र ‘समझदार लोग‘ भ्रष्टाचार क्यों न करें, जबकि सदाचार का बदला असीमा के पापा को कुछ भी न मिला हो, सिवाय बर्बादी और गुमनामी के ? Solution

प्रिय प्रवीण जी ! आप भी विचलित हैं और भाई ख़ुशदीप जी भी। प्रिय प्रवीण जी, आप जब भी देश में फैला भ्रष्टाचार देखते हैं आप विचलित हो जाते हैं। एक फ़ौजी अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार से कभी समझौता नहीं कर सकता। आपके दिमाग़ की फॉरमेटिंग ही ऐसे की जाती है। लेकिन यह भी सोचने वाली बात है कि लोग ईमानदार बनना क्यों नहीं चाहते ?
बात दरअस्ल यह है कि यहां ईमानदार को सिवाय बर्बादी और मुसीबतों के कुछ हाथ नहीं आता, यहां तक कि अगर वह करोड़पति होता है तो एक समय ऐसा आ जाता है कि वह अपने बच्चों तक को सहारा देने के लायक़ नहीं बचता और उसके संगी-साथी अपना मतलब निकलते ही फूट लेते हैं और जनता उन्हें भुला देती है।
असीमा के पिता जी के साथ यही किया गया। उनकी दर्दनाक दास्तान ने ही भाई खुशदीप जी को विचलित कर दिया है।
ख़ुशदीप जी के कहने पर हम वहां गए और हमने कहा कि...

http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/05/solution.html

जो भी नेकी सच्चे मालिक को भुलाकर की जाती है, वह हसरत और अफ़सोस के सिवा कुछ और नहीं दे पाती।