रविवार, 8 मई 2011

जब ओसामा इनका इतना सगा है तो भारत के साथ इन लोगों का क्या रिश्ता है !!!

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अरूंधती रॉय जैसों के रूदन व सनसनीखेज बयानों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि कश्मीर समस्या Pan Islamism के बीज से उपजी है और इस्लामी जेहादी विचारधारा से खाद-पानी पाती है ! 

अगर अभी भी आपको यकीन न हो तो देखें ' दैनिक जागरण ' की यह खबर  ...

ओसामा के गायबाना में अमेरिका को कोसा
श्रीनगर: कश्मीर में शुक्रवार को लोगों ने ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी गुट के चेयरमैन सैय्यद अली शाह गिलानी के आ ान पर ओसामा बिन लादेन की मौत पर गायबाना नमाज-ए-जनाजा में हिस्सा लिया। इस मौके पर उदारवादी हुर्रियत के प्रमुख नेता शब्बीर शाह ने भी नमाज में शिरकत की। दोनों नेताओं ने अल कायदा सरगना को इस्लाम का शहीद करार देते हुए पाकिस्तान की सलामती की दुआ भी की। गिलानी ने लोगों को इस दौरान पूरी तरह संयम बरतने और शांति बनाए रखने को कहा, लेकिन उनके समर्थकों ने नमाज के बाद अमेरिका और भारत के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सुरक्षाबलों पर पथराव किया। स्थिति को काबू में रखने के लिए सुरक्षाबलों को आंसूगैस और लाठियों का सहारा लेना पड़ा। प्रशासन ने गुरुवार को कट्टरपंथी गिलानी को एहतियात के तौर पर नजरबंद कर दिया था, लेकिन स्थिति का जायजा लेने के बाद अधिकारियों ने उन्हें गायबाना-नमाज-ए-जनाजा में हिस्सा लेने की इजाजत दे दी। गिलानी ने बटमालू में सैकड़ों लोगों को नमाज से पूर्व संबोधित करते हुए ओसामा को शहीद करार दिया। कोलकाता में भी पढ़ी गई नमाज कोलकाता की टीपू सुल्तान मस्जिद में भी ओसामा की आत्मा की शांति के लिए विशेष नमाज पढ़ी गई। चेन्नई की मक्का मस्जिद में भी लादेन की मौत पर नमाज-ए-जनाजा पढ़ी गई।
 
यह निर्विवाद है कि ओसामा अल-कायदा का सरगना था , वह टेलीविजन पर प्रसारित बयानों में कई बार भारत को दुश्मन बता चुका था, अलकायदा खुले तौर पर भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त है... 

जीलानी और शब्बीर शाह तो पाकिस्तान के टुकड़ों पर पलते हैं इनका पाकिस्तान की सलामती की दुआ मांगना व उसे इस्लाम का शहीद बताना तो समझ आता है...
 
पर यह कोलकाता व चेन्नई की मस्जिदों में भी ओसामा के लिये प्रार्थना... ??? क्या कहेंगे इसे... कहीं यह खबर नहीं है कि वहाँ मौजूद किसी ने भी विरोध किया इस बात का...
 
जब यह कहा जाता है कि भारतीय मुस्लिमों में एक बहुत छोटा परंतु मुखर तबका ऐसा है जो केवल धर्म व जेहाद के नाम पर भारतविरोधी गतिविधियों में लिप्त आतंकियों में अपने नायक तलाशता है व उनका साथ देता है... और बाकी उनके सामने एक कायर चुप्पी ओढ़ लेते हैं ।
 
तो क्या यह धारणा सही नहीं है ? 
 
 
 
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7 टिप्‍पणियां:

ajit gupta ने कहा…

इस कायर चुप्‍पी से ही प्रश्‍न करना चाहिए। ये सारे खुलकर भारत के पक्ष में क्‍यों नहीं आते?

अरूण साथी ने कहा…

यह कायर चुप्पी ही सवाल खड़े करते है सारे कौम पर ... सुन्दर पोस्ट।।

Kajal Kumar ने कहा…

मतिभ्रष्ट

anshumala ने कहा…

कश्मीर की बात छोड़ ही दे वहा तो ये सब पाकिस्तान परस्त गिलानी एंड कंपनी का काम है पर ये भी देखना चाहिए की दूसरी जगहों पर किन लोगो ने ये किया है क्योकि जिन दो जगहों का नाम लिया जा रहा है वो दोनों जगह इस समय चुनावी रंग में रंगा हुआ है और नेता वोट के लिए क्या नहीं कर सकते है | दिग्गी राजा "जी " का उनसे कौन सा रिश्ता है वो तो एक धर्म के भी नहीं है अब इसको आप क्या कहेंगे |

Shah Nawaz ने कहा…

कश्मीर और देशद्रोही गिलानी की बात छोडिये... उनकी तो बात ही निराली है... लेकिन बाकी जगह के लिए मैं आपसे ही मालूम करना चाहूँगा कि अगर किसी का अंतिम संस्कार नहीं हुआ है तो क्या अंतिम संस्कार करना गलत है? कमीने से कमीने और घटिया से घटिया का भी अंतिम संस्कार होना चाहिए कि नहीं? उसने कितनो को और किसको मारा यह अलग बहस का विषय है... लेकिन क्या दुनिया के सबसे बड़े गुनाहगार को दो गज ज़मीन भी नहीं मिलनी चाहिए?

Suresh Chiplunkar ने कहा…

शाहनवाज़ भाई,
ओसामा और उसके भाई-बन्धुओं द्वारा जो बम विस्फ़ोट किये गये, उसमें कई मुसलमान ऐसे भी मरे, जिनके शरीर का एक टुकड़ा भी नहीं मिला… उनका अन्तिम संस्कार कैसे किया गया होगा?

Shah Nawaz ने कहा…

Suresh Chiplunkar भाई.

आपके कहने का जो तात्पर्य है मैं उसका सम्मान करता हूँ और मरने वाला मुस्लिम हो या हिन्दू या कोई और.... हैं तो सभी इंसान.. और सभी इंसानियत के नाते भाई-भाई... लेकिन क्या ऐसे घिनौनी हरकत करने वाले का मरने के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाना चाहिए?