शनिवार, 7 मई 2011

जाओ या तो मार आओ या उठा लाओ हाफिज सईद, मसूद अजहर, सैयद सलाऊद्दीन और दाउद इब्राहीम को पाकिस्तान से !!!

.
.
.

जब से अमेरिका ने एबटाबाद कारनामा किया है, आप चाहे हमारे मीडिया को देखें, टीवी पर आने वाले रक्षा-विश्लेषकों को या गली मोहल्ले पर होने वाली चर्चा को... हर जगह हर कोई यही कह रहा है कि भारत को भी ऐसा ही करना चाहिये...

सही है कि हमारे पास दुनिया के सर्वश्रेष्ठ व अपनी आन के लिये कुरबानी का जज्बा रखने वाले जाबांज लड़ाके हैं... पर क्या हमारे पास उसी श्रेणी की तकनीक, उन्नत हथियार, पक्की इंटेलिजेंस है... देखिये कैसे हैं हमारे हेलीकॉप्टर ....  एक दूसरी बड़ी बात जिसे सब भूल रहे हैं वह यह है कि अमेरिका पाकिस्तान से हजारों मील दूर सात समंदर पार है और पाकिस्तान चाह कर भी वहाँ हमला नहीं कर सकता... जबकि हमारी सीमा उससे मिली है... 

क्या अब भी आप सोचते हैं कि भारत के कमांडोज् को जाकर मार या उठा आना चाहिये  हाफिज सईद, मसूद अजहर, सैयद सलाऊद्दीन और दाउद इब्राहीम को पाकिस्तान में... ?

क्या हम युद्ध झेलने के लिये तैयार हैं ?




...






8 टिप्‍पणियां:

Khushdeep Sehgal ने कहा…

क्या हमारे मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व में इंदिरा गांधी जैसी इच्छाशक्ति है...

क्या हमारे पास अमेरिका जैसा विश्वसनीय खुफ़िया तंत्र है...

क्या हमारे पास अमेरिका जैसी तकनीकी महारत हासिल है...

क्या पाकिैस्तान में हमें अमेरिका जैसे फ्री मूवमेंट की इजाज़त मिलेगी...(पाकिस्तान ने अभी तक भारतीय अधिकारियों
को मुंबई अटैक के दोषियों से महज़ पूछताछ के लिए ही अपनी ज़मीन पर नहीं उतरने दिया है, कार्रवाई तो बहुत दूर की कौड़ी है)
लेकिन ख्वाब देखने में क्या जाता है...दाऊद, हाफ़िज सईद, मसूद अजहर, लखवी का हम ख्वाबों में तो सफाया होते देख ही सकते हैं न...हक़ीकत में हम पाकिस्तान को बस मोस्ट वांटेड की लिस्ट सौंपते रहेंगे और क्रिकेट डिप्लोमेसी जैसे खेल खेलते रहेंगे...

जय हिंद...

Khushdeep Sehgal ने कहा…

और ये युद्ध के डर से कब तक पाकिस्तान को अपनी छाती पर चढ़ कर मूंग दलने की इजाज़त दी जाती रहेगी...

जय हिंद...

ajit gupta ने कहा…

वर्तमान भारत की स्थिति में युद्ध होना एक खतरनाक कदम साबित होगा। हमें कूटनीति के सहारे ही चलना होगा। हम दाउद आदि को मांग रहे हैं और जो हमारे पास है उन्‍हें पाल रहे हैं!

किलर झपाटा ने कहा…

आप लोग समझते नहीं हैं यार। ये दोनों देश अमरीका को मिलकर बुद्धू बनाते रहते हैं। पाकिस्तान अपना भाई है हमें उससे झगड़ने की बजाय उसकी ही स्टाइल में आतंकवादी वगैरह पाकिस्तान में भेजते रहना चाहिये, मगर वो वहाँ खुद मारकाट न करके शिया सुन्नी फ़साद भर करवाते रहें। वहाँ नकली नोट चलवा दो। पाकिस्तान से आये नकली नोट को मान्यता दे दो, अरे कागज ही तो ससुरा। और इस सब के बाद पाकिस्तान से खूब प्यार भरी बातें करो। उसको उल्टा उक्साओ कि पाकिस्तान तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं। यू सी विदाउट एनी युद्ध इट विल बी हमारा वन डे एण्ड वैरी सून। एम आय रांग ?

किलर झपाटा ने कहा…

और हाँ उपरोक्त आतंकवादियों को पकड़ना तो बहुत आसान है। इनके खिलाफ़ सारे आरोप खारिज करो और डिक्लेयर करो इतने दिनों भारत को इनके प्रति बहुत ग़लतफ़हमी थी। बल्कि ये तो बहुत अच्छे बिजिनेस्मैन हैं इन्हें भरत में सुविधायें मुहैया कराओ और बुलाओ। जब ये आराम से यहाँ आकर बस जायें तो इनका एक दिन सम्मेलन करवा दो वहाँ एक बन्द एसी हाल में जोरदार कैबरे करवा दो और जब महफ़िल शबाब पे हो याने जब ये ससुरे नंगा नाच करने लगें तो वहाँ पहले से जमा करोड़ों मधुमक्खियाँ छुड़वा दो और बाहर से दरवाजे खिड़कियाँ बंद कर दो। बाद में मगरमच्छ के आँसू रो दो के देखो हमने तो बेचारों की सुरक्षा का इतना खयाल रखा मगर अल्लाह की मरज़ी के आगे आजतक किसी की चली है ?
बड़े अदब से उनका नमाज़ ए जनाज़ा पढ़वा दो दुनिया की नजर में और तारीफ़ पाओ। सिंपल थिंग्स बट पीपुल आर नाट गिविंग ध्यान ऑन माय फ़िलासफ़ी। Alas!

निशांत मिश्र - Nishant Mishra ने कहा…

प्रवीण, कई सप्ताह के युद्ध की विभीषिका झेलना तो दूर की बात है, भारत में तो लोग एक दिन बिजली और पानी नहीं आने से ही अधमरे हो जाते हैं.

प्रवीण, आपने स्वयं को बहुत छिपा कर रखा है. मेरे जैसे आपके अनेक प्रसंशक आपके बारे में लगभग कुछ भी नहीं जानते. औरों के सामने नहीं लेकिन आप ई-मेल के मार्फ़त तो मुझसे संवाद कर ही सकते हैं न?

प्रवीण शाह ने कहा…

.
.
.
@ निशाँत मिश्र जी,

यकीन जानिये कि यह जानकर मैं कितना खुश हूँ कि आप मुझे पसंद करते हैं, एक अर्से से मैं आपका फैन जो हूँ... मेरे बारे में जितना सभी जानते हैं वह काफी है मेरे ख्याल से, अधिक जानने/बताने पर लोग मेरे लिखे में निहितार्थ तलाशने लगेंगे इसलिये यह सब मेरी ओर से डेलिबरेट है... रही बात ई-मेल से संवाद की तो मित्र, पता नहीं आप मेरा यकीन करोगे कि नहीं परंतु मुझे अपने ही लैपटॉप पर एक-एक मिनट और पाने के लिये बड़ी लड़ाइयाँ लड़नी होती हैं... जब सही समय आयेगा तो आपसे आपने सामने बैठ गपियायेंगे... तब तक चलने दीजिये ऐसे ही...



...

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

अगर अमरीका की तरह आप भी पाकिस्तानी हुक्मरानों की झोली डालर सर भर दो तो आप भी पकिस्तान से जितने चाहे उतने हथियारपसंद खरीद सकते हैं.
लेकिन भारतीय नेता अपनी झोली भरें या पकिस्तान की ?
और फ़्री में पकिस्तान किसी को कुछ देता नहीं है .
control the purse control the policy .

लखनऊ से अनवर जमाल .
लखनऊ में आज सम्मानित किए गए सलीम ख़ान और अनवर जमाल Best Blogger