मंगलवार, 31 मई 2011

कोई तो बताओ कि आखिर कब आयेगा यह वापिस यार !!!

.
.
.


किसी भी हिन्दी ब्लॉगर के लिये वह दौर बहुत ही सुविधाजनक था... दो बड़े अच्छे संकलक चलते थे... दोनों में लगभग सभी हिन्दी के ब्लॉग शामिल भी थे...एक संकेत सभी को मिल जाता था कि जनता आज कहाँ बहसिया रही है, कहाँ मामला गर्म है, कहाँ कुछ बहुत ही बेहतरीन परोसा गया है, आदि आदि... 


अब उन दोनों में से ब्लॉगवाणी को तो उसके संचालकों ने बंद कर दिया... परंतु चिठ्ठाजगत का मामला कुछ अलग सा है... वैसे तो यह आज भी लिस्ट जैसी एक फीड दिखा रहा है, पर ब्लॉगवुड के ही कुछ ब्लॉगों से यह पता चला था कि यह अभी लैब में है और शीघ्र ही वापस आयेगा...


१६००० से भी ज्यादा हिन्दी ब्लॉगों को अपने में समेटे सर्वप्रिय और निर्विवाद इस संकलक के वापस आने का मुझे बेसब्री से इंतजार है... 


पर...




कोई मुझे यह तो बता दो कि आखिर कब आयेगा यह वापिस यार ?










...

सोमवार, 30 मई 2011

यस सर ! विल डू सर !! सॉरी सर !!! आल्वेज एट युवर सर्विस सर !!!! And that too, without any hint of having even a single bone in my spine Sir !!!!!

.
.
.
आज सबसे पहले तो एक  खबर देखिये यहाँ पर... 


पब्लिक सेक्टर ( सरकारी ) के एक बड़े बैंक ' इंडियन बैंक ' के मुम्बई जोन के जोनल मैनेजर बनबिहारी पान्डा जी को पहले निलंबित व फिर स्थानान्तरित किया गया... उनका अपराध यह था कि उनसे भूलवश अपने चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर टी एम भसीन जी का 'लगेज' कार के अंदर बंद हो गया था... पान्डा जी अपने अधिकारी को एयरपोर्ट पर रिसीव करने गये थे...


पर यह पोस्ट पान्डा जी के समर्थन में नहीं है, मुझे उनसे कोई सहानुभूति भी नहीं, क्योंकि वह अपने सीएमडी को सीधे-सीधे "  भाड़ में जाओ और जो करना है कर लो, मैं कानून से न्याय ले लूंगा  "  कहने की बजाय मस्का लगाते स्पष्टीकरण व माफियाँ माँगने में लगे हैं... ( यहाँ देखें ) ... 


अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इन्डिया ने इस पूरे मामले पर संपादकीय लिखा है...

देखें  टाइम्स ऑफ इन्डिया का संपादकीय    "   Sarkari Scourge  "

अखबार लिखता है... " Democracy's representatives are expected to combat outdated ideas of domination and subservience, yet these have been institutionalized ".

यानी लोकतंत्र के प्रतिनिधियों से अपेक्षा तो यह थी कि वो प्रभुत्व व दासता जैसे पुराने विचारों से लड़ेंगे परंतु यह विचार हमारे समाज में संस्थापित हो गये हैं !


मेरा आज का सवाल इसी बात पर है... ऐसा क्यों हो गया है... 


क्यों आज हमारी राजनीति, नौकरशाही, मीडिया, उद्मोग-कॉरपोरेट जगत, साहित्य, कला,  लगभग हर क्षेत्र यहाँ तक कि फौज में भी  आगे बढ़ने के लिये अपने सुपीरियर की आँखें बंद कर बिना सवाल किये व अपनी गरिमा व सम्मान को गिरवी रखे हुऐ हुक्म बजाना व जी-हुजूरी करना जरूरी सा हो गया है ?

कहीं यह सब हमारे डीएनए, हमारी जीन संरचना में तो नहीं है ?







...

शुक्रवार, 27 मई 2011

बस इतनी ही अकल पाई जाती है हम हिन्दी वालो में... :(

.
.
.
डीटीएच प्लेटफार्म पर कब्जा किये बैठे २४ x ७ खबरिया हिन्दी चैनलों को आप एक बार एक दो घंटे लगातार देख लें, सिर में दर्द होने की पूरी गारंटी है...


खबर चाहे कोई भी हो ओसामा की मौत या भारत का विश्वकप जीतना या फरीदाबाद का प्लेनक्रैश... इन चैनलों के खबर देने का अंदाज वही है... अमेच्योर ग्राफिक, बेहूदे हेडिंग और चीख-चीख कर बातें करते न्यूज एंकर... जिनका एकमात्र उद्देश्य रहता है उस खबर को अलॉट किये गये टाईम ( जो कभी आधे घंटे से कम नहीं होता ) को किसी तरह पूरा करने के लिये साउंड बाइट देना... जिस तरह के मूर्खता भरे व बेहूदा सवाल यह एंकर करते हैं उसे देखने के बाद आप केवल सिर के बाल ही नोच सकते हैं...


फिर भी इन चैनलों को टीआरपी मिलती है, चैनल वाले कहते हैं कि वह वही दिखाते हैं जो देखा जाता है...

मैं यहाँ पर इन एंकरों की काबिलियत पर कुछ नहीं कहना चाहता ... ;) पर यदि यह बात सच है कि हिन्दी का दर्शक ही यही देखना चाहता है...


तो अपना आज का सवाल है...


क्या केवल इतनी ही अकल पाई जाती है हम हिन्दी वालो में..?










...

मंगलवार, 24 मई 2011

चीन, रूस, कोरिया, ताईवान और जापान की तकनीकी महारत के पीछे क्या है....

.
.
.


खबरें अक्सर मुझे बहुत निराश करती हैं... 

२१ वीं सदी के प्रथमार्ध में, १२१ करोड़ की आबादी वाला, तकरीबन ८-९ प्रतिशत की दर से साल दर साल अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ाता, दुनिया के हर धंधेबाज के लिये संभावनापूर्ण बाजार बना हुआ तथा शीघ्र ही बदलते विश्व की एक महाशक्ति बन जाने के सपने पालता एक महादेश...


परंतु तकनीक के मामले में हम छोटे-छोटे देशों कोरिया, जापान, ताइवान यहाँ तक कि इजराईल से भी पिछड़े हैं...


चाहे उन्नत टैंक खरीदने हों या युद्धक विमान या पनडुब्बियाँ या मेट्रो के डिब्बे-इंजन या स्वदेश निर्मित लड़ाकू विमान ढांचे का एवियोनिक्स या तेल के कुंऐ खोदने की मशीनें या रेडीमेड कपड़े के कारखानों की मशीने या अल्ट्रासाउंड, सीटी-एमआरआई मशीनें... सब कुछ हमें विदेश से ही खरीदना होता है वह भी याचक मुद्रा में आकर...


अगर आजादी के तुरंत बाद हमारे नीति निर्धारकों ने उच्च व तकनीकी शिक्षा को देश की भाषा में दिये जाने की व्यवस्था की होती तो ऐसा नहीं होता... यह मेरा सोचना है...


कोई भी इन्सान अपनी मातृभाषा के जरिये काम करने पर बेहतर नतीजे निकालेगा बजाय थोप दी गई अंग्रेजी के... क्योंकि उस दशा में हर बार उसे 'अनुवाद मोड' में जाना होगा...



आपका क्या ख्याल है ?








...

सोमवार, 23 मई 2011

कितनी चीयरफुल हैं यह लड़कियाँ...

.
.
.

आईपीएल जिसके लीग मुकाबले कल रात खत्म हुऐ, निश्चित तौर पर एक ' दर्शनीय तमाशा ' है... प्रत्येक टीम में केवल चार ही विदेशी खिलाड़ी खिलाने की बाध्यता के कारण सभी टीमों में कुछ ऐसे भारतीय खिलाड़ी भी खेल रहे हैं जिनकी गेंदों पर आसान रन व जिनके बल्लेबाजी करने के दौरान विपक्षी गेंदबाज को कुछ बहुत ही आसान विकेट मिलते हैं... बाउन्ड्री अधिकतर मैदानों में बहुत छोटी कर दी गई है जिससे दर्शकों को खूब सारे चौक्के-छक्के देखने को मिलें... 


पर आज सवाल इस बारे में नहीं...


आईपीएल के नियमों के अनुसार हर टीम को एक निश्चित संख्या में  ' चीयर गर्ल्स ' मैदान में उतारना जरूरी है... अधिकाँश टीमों की चीयर गर्ल्स गोरी चमड़ी वाली व इम्पोर्टेड हैं...


आज का सवाल है...


आईपीएल के इस दर्शनीय तमाशे की सफलता में इन चीयरगर्ल्स का कितना योगदान है ?




...

रविवार, 22 मई 2011

क्या योगऋषि रामदेव जी को भी वह सब सहज ही मिलेगा, जो अन्ना को मिला था ....

.
.
.


चार जून से दिल्ली के रामलीला मैदान पर अनशन पर बैठने जा रहे हैं योगऋषि रामदेव...


माँग बस एक ही है... 

काले धन की अर्थव्यवस्था पर लगाम लगाने के लिये कारगर उपायों की तथा विदेश में जमा कालेधन को वापस लाने की...


अन्ना जब अनशन पर बैठे थे तो उनको अभूतपूर्व समर्थन मिला था इसी बहाने गंगा नहा अपने पर लगे दागों को मिटाने का प्रयास करते मेनस्ट्रीम मीडिया का, मोमबत्ती गैंग का, पेज थ्री क्राउड का तथा सत्ता व उद्योग जगत के बीच लाइजन का काम करने वालों का...

पहले लोकपाल बिल बनेगा, फिर लोकपाल, फिर तमाम निगरानी करने वाली संस्थाओं की तरह वह भी लग जायेगा दीवार पर एक ट्राफी की तरह... दंतहीन व बेअसर... यह सोच थी इन सब की...


पर जब आज सचमुच के ठोस उपायों की बात हो रही है... तो क्या यह सभी जो कालेधन की इकॉनामी के प्लेयर हैं कालिदास की तरह ही उस डाल पर कुल्हाड़ी चला पायेंगे जिस पर वह खड़े हैं...

मुझे लगता है नहीं ...


आप की क्या राय है ?






...

मंगलवार, 17 मई 2011

हम एक व्यक्ति पूजक समाज हैं जो लोकतांत्रिकता का फटा हुआ लबादा ओढ़े है...

.
.
.


पाँच राज्यों के चुनाव हुऐ...


बंगाल में जीतीं ममता बनर्जी...


आसाम में जीते तरूण गोगोई...


तमिलनाडु में जीतीं जयललिता...


पुडुचेरी में जीते रंगासामी... 


केरल में अच्युतानंदन भले ही बहुमत न ला पाये पर यह प्रदर्शन भी जीत के बराबर ही था...



इनमें से कोई भी जीत नीतियों, पार्टियों की विचारधारा या लोकतांत्रिकता की नहीं है...



यह जनता की ' व्यक्ति पूजा ' तथा पूज्य के प्रति आभार प्रदर्शन है ।




क्या मेरी तरह ही आप भी नहीं सोचते कि हम एक व्यक्ति पूजक समाज हैं जो लोकतांत्रिकता का फटा हुआ लबादा ओढ़े है ?










...

सोमवार, 16 मई 2011

यूँ मुड़-मुड़ के ना देख... मुड़-मुड़ के !

.
.
.

बड़े शहरों ( मेट्रो ) की तो कह नहीं सकता... पर भारत के अधिकाँश मझोले या छोटे शहरों, कस्बों व गाँवों में भी एक आम सा नजारा है... वह है ...

किसी सार्वजनिक जगह, उदाहरण के लिये बस स्टॉप ही ले लीजिये... आप नोटिस करेंगे कि काफी सारे लोग, पुरूष, महिलायें व बच्चे खड़े हैं... सब कुछ सामान्य सा ही चल रहा है... अचानक वहाँ पाश्चात्य परिधान में... जीन्स-टीशर्ट पहने कुछ महिलायें पहुंच जाती हैं... इससे भी कुछ फर्क नहीं पड़ता कि वे युवा हैं अथवा प्रौढ़...

आप पायेंगे कि वहाँ मौजूद अधिकाँश पुरूष आँखें फाड़ फाड़ उनको घूरने लगेंगे... जो ऐसा नहीं करेंगे वह भी कनखियों से उन्हीं को देखना जारी रखेंगे...

अगर आप ने भी यह व्यवहार देखा है तो बताइये...



ऐसा क्यों होता है ?




...


रविवार, 15 मई 2011

जात न पूछो केवल साधु की... बाकी सब की पूछो और गर्व से बताओ भी !!!... सही है न...

.
.
.
ब्लॉग लिखते हैं, ब्लॉग पढ़ते हैं, यानी इंटरनेट-कंप्यूटर तक पहुंच है आपकी... एक ऐसा देश जहाँ तकरीबन आधी आबादी २० रूपये  रोज से कम पर काम चलाती है, वहाँ पर यह कर पाना आपको खुदबखुद समर्थ, प्रबुद्ध व अभिमत अगुआ ( Opinion Leader ) का दर्जा दे देता है... इसीलिये यह सवाल है आज...

अक्सर लिखा देखता हूँ कि फलाना-फलाना कुलीन ब्राह्मण , कायस्थ कुल भूषण, शेख पठान, सुन्नी सैय्यद , खानदानी राजपूत परिवार आदि-आदि से है... जातीय आधार पर ही लोगों को विभिन्न विवाद आदि में अपने रूख का निर्धारण करते देखता हूँ... मित्रतायें यहाँ तक कि रहने के लिये कॉलोनी का चयन तक जातीय आधार पर करते हैं लोग... स्वजातीय के अनुचित कृत्य का भी बचाव करते देखता हूँ लोगों को...  जाति के आधार पर ही आर्थिक-राजनीतिक-सामाजिक-कार्य क्षेत्रीय-ब्लॉगरीय वरीयतायें भी निर्धारित होती हैं हम में से अधिकाँश की...

तो जनाब अपने दिल के अंदर झाँकिये और बताइये दिल से...


कितने जातिवादी हैं आप ?






...




शनिवार, 14 मई 2011

आज के समय में हिन्दी ब्लॉगिंग कर के क्या कुछ उखाड़ पाते हैं आप, मैं या अन्य कोई धुरंधर ही....

.
.
.
ब्लॉगर स्टैट्स ( Blogger Stats ) को मैं अपने ब्लॉग पर आये पाठकों की आवाजाही का एक विश्वसनीय स्रोत मानता हूँ... उसके अनुसार मेरी सबसे लोकप्रिय पोस्ट को अभी तक ५३० पाठक मिले हैं... हो सकता है कि कुछ पुराने व स्थापित ब्लॉगरों को ज्यादा पाठक मिलते हों... पर मेरा अनुमान है कि हजार-बारह सौ से ज्यादा पाठक किसी भी हिन्दी ब्लॉगर को नहीं मिल रहे हैं...

लग रहा है कि हिन्दी ब्लॉगिंग महज एक हिन्दी ब्लॉगर द्वारा साथी हिन्दी ब्लॉगरों के लिये की जा रही विधा बन गई है, हिन्दी ब्लॉगर ही  अधिकाँशतया हमारा पाठक भी है, सामान्य पाठक का अभाव है...

ऐसे में क्या आपको लगता है कि आपका आज का लिखा कुछ प्रभाव डालने में सक्षम है कहीं पर भी ? 



...









गुरुवार, 12 मई 2011

भट्टा परसौल से उठता एक सवाल यह भी तो है ही ... जिसका जवाब हम सभी को तलाशना चाहिये...

.
.
.
आपने अक्सर देखा होगा कि आपके पड़ोस में मारपीट हुई लोगों में या कोई जेबकतरा भीड़ में किसी की जेब काट भागा या फिर किसी आदमी ने नाजायज तरीके से सार्वजनिक रास्ता रोका... तो सबसे पहला काम जो आप करते हैं वह है नजदीकी पुलिस थाने, चौकी, पोस्ट या मोबाइल वैन को खबर देना...

और अक्सर ही सबसे पहले मौके पर पहुंचते हैं दो वर्दीधारी जवान... ज्यादातर मामलों में डंडे के अतिरिक्त उनके पास कोई हथियार नहीं होता !

महज पुलिस में भर्ती होना ही किसी आम इंसान को सुपर-ह्यूमन नहीं बना देता जिसकी वजह से वह तमाम तरह के लफड़ों में निहत्थे कूद पड़े... किसी भी वर्दीधारी बल के जवान को यह साहस-यह शक्ति देता है उसका यह विश्वास कि समाज व्यवस्था बनाये रखने के उसके काम को सहयोग-सम्मान देगा व उसके अपने वर्दीधारी साथी हर हाल में उसकी रक्षा करेंगे, यदि उसके साथ कोई अन्याय हुआ उस पर कोई हमला हुआ तो तंत्र उस अन्याय-हमला करने वाले को हर हाल में कानून के आगे अपराधी के रूप में पेश करेगा ।

कम शब्दों में कहना हो तो इसे इस तरह से कहते हैं कि "  वर्दी का इकबाल हर हाल में बुलंद रहना चाहिये । "

अब बात करते हैं भट्टा परसौल की... किसानों की माँगें सही हैं या गलत, इस बहस में बिना पड़े जानें वहाँ हुआ क्या... तीन रोडवेज कर्मियों को बंधक बना लिया गया... उनको छुड़ाने के लिये प्रशासन ने वार्ता की... छोड़ने की सहमति बनी, पर बंधकों को लेने पहुंचे दल पर योजनाबद्ध तरीके से आटोमेटिक हथियारों से फायरिंग की गई... जिसमें पुलिस के दो जवान मौके पर ही मारे गये व उनके हथियार भी छीन लिये गये...

पुलिस के हमारे यह अधिकतर जवान भी किसान के ही बेटे होते हैं... किसान हितों के नाम पर तो राजनीति हो रही है, खबरिया चैनल चीख-चिल्ला रहे हैं... पर उन जवानों के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा की माँग क्यों नहीं उठा रहा कोई... क्या कोई उन जवानों के परिवारजनों के आंसुओं की भी खबर देगा कभी..

माना कि हमारे किसानों की जमीनें बेशकीमती हैं...


पर क्या हमारी ही पुलिस के इन जवानों की जान का कोई मोल नहीं है ?



...


डिस्क्लेमर : लेखक भी छह साल वर्दीधारी रहा है ।


बुधवार, 11 मई 2011

कैसे कहेगा कोई कि इस मुल्क में सभी को इन्साफ मिलता है ?

.
.
.

मैं अपनी ओर से कुछ नहीं कहूँगा आज...
दुखी हूँ मैं...
स्थितियाँ यहाँ तक पहुँच गई हैं कि आपको हैरानी होगी...
द् टेलीग्राफ की यह खबर देखें यहाँ पर... 

मैं खबर से ही उद्धृत करता हूँ बिना कुछ जोड़े या घटाये...

The apex court said a “certain section of the subordinate judiciary” was bringing the whole judiciary “into disrepute” by passing orders on “extraneous” considerations. “Such subordinate judiciary judges are bringing a bad name to the whole institution and must be thrown out of the judiciary.”
Justice Katju said the conduct of the subordinate courts was shaming the judiciary. “We are told that 80 per cent or 90 per cent of the judges are corrupt,” he said. “These kinds of malpractices should be weeded out and those who are incorrigible should be thrown out.” 

ऐसी हालत में  कैसे कहेगा कोई कि इस मुल्क में सभी को इन्साफ मिलता है ?
आपको नहीं लगता कि हर क्षेत्र की खरपतवार निकाल बाहर करने का समय अब आ गया है , और इसे अब टाला नहीं जा सकता ?




...


मंगलवार, 10 मई 2011

एक छोटा सा सवाल जिसका जवाब देने के लिये आप से ईमानदारी बरतने की उम्मीद है !

.
.
.
अन्ना हजारे,
किरन बेदी,
अरविन्द केजरीवाल,
शाँति भूषण,
प्रशाँत भूषण,
स्वामी अग्निवेश,
बाबा रामदेव
और अन्य भी...

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का आज यह नेतृत्व कर रहे हैं... संभव है कि यह सभी लोग अपने निजी जीवन में ईमानदार भी हों... पर यहाँ सवाल उनका नहीं है... सवाल है उनके पीछे खड़े आप मुझ जैसे कॉमन-मैन का...

आँख बंद कीजिये... दिल से सोचिये और बताइये...


क्या हम एक ईमानदार कौम हैं ?




...






सोमवार, 9 मई 2011

एक अनूठी भारतीय विशिष्टता ( A peculiar Indian characteristic )... हम कब उबरेंगे इससे...

.
.
.
हम मकान बनाते हैं तो सड़क की ओर को दो-तीन फीट अपनी बाउंड्री वाल में घेर लेते हैं... फ्लैट लेते हैं तो बालकनी को कमरा बना देते हैं... रिहायशी कालोनियों में हम दुकानें व शापिंग काम्पलेक्स बना देते हैं... महंगे से महंगे मकान का भी कार उतारने का रैंप सड़क घेर कर बनाते हैं... हमारे अधिकाँश धर्मस्थल खाली पड़ी सार्वजनिक जगहों पर कब्जा कर बनाये होते हैं... कई मामलों में तो चलती सड़क या रेलपटरी पर भी यह धर्मस्थल उग आते हैं... हम सड़क घेर कर जागरण करते-नमाज पढ़ते हैं... 

और यदि कानून-प्रशासन इस पर कोई रोकटोक लगाता है तो हम इन सब नियमों के उल्लंघन, इस अवैद्मता के नियमितीकरण की माँग करते हैं... धार्मिक आस्था, जन भावना, आर्थिक मजबूरी, रोजगार बचाने आदि आदि के नाम पर... 

"Regularization of illegality is a peculiar Indian characteristic. First you make the law and then break law...,"  "अवैद्मता का नियमितीकरण एक अनूठी भारतीय विशिष्टता है, हम पहले कानून बनाते हैं फिर स्वयं ही उसको तोड़ते हैं "... कह रहे हैं भारतीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश (यहाँ देखें ) ...

आपको क्या लगता है कि हम अपना यह अनूठापन छोड़ेंगे कभी, या यों ही बने रहेंगे ?




...


रविवार, 8 मई 2011

जब ओसामा इनका इतना सगा है तो भारत के साथ इन लोगों का क्या रिश्ता है !!!

.
.
.
अरूंधती रॉय जैसों के रूदन व सनसनीखेज बयानों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि कश्मीर समस्या Pan Islamism के बीज से उपजी है और इस्लामी जेहादी विचारधारा से खाद-पानी पाती है ! 

अगर अभी भी आपको यकीन न हो तो देखें ' दैनिक जागरण ' की यह खबर  ...

ओसामा के गायबाना में अमेरिका को कोसा
श्रीनगर: कश्मीर में शुक्रवार को लोगों ने ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी गुट के चेयरमैन सैय्यद अली शाह गिलानी के आ ान पर ओसामा बिन लादेन की मौत पर गायबाना नमाज-ए-जनाजा में हिस्सा लिया। इस मौके पर उदारवादी हुर्रियत के प्रमुख नेता शब्बीर शाह ने भी नमाज में शिरकत की। दोनों नेताओं ने अल कायदा सरगना को इस्लाम का शहीद करार देते हुए पाकिस्तान की सलामती की दुआ भी की। गिलानी ने लोगों को इस दौरान पूरी तरह संयम बरतने और शांति बनाए रखने को कहा, लेकिन उनके समर्थकों ने नमाज के बाद अमेरिका और भारत के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सुरक्षाबलों पर पथराव किया। स्थिति को काबू में रखने के लिए सुरक्षाबलों को आंसूगैस और लाठियों का सहारा लेना पड़ा। प्रशासन ने गुरुवार को कट्टरपंथी गिलानी को एहतियात के तौर पर नजरबंद कर दिया था, लेकिन स्थिति का जायजा लेने के बाद अधिकारियों ने उन्हें गायबाना-नमाज-ए-जनाजा में हिस्सा लेने की इजाजत दे दी। गिलानी ने बटमालू में सैकड़ों लोगों को नमाज से पूर्व संबोधित करते हुए ओसामा को शहीद करार दिया। कोलकाता में भी पढ़ी गई नमाज कोलकाता की टीपू सुल्तान मस्जिद में भी ओसामा की आत्मा की शांति के लिए विशेष नमाज पढ़ी गई। चेन्नई की मक्का मस्जिद में भी लादेन की मौत पर नमाज-ए-जनाजा पढ़ी गई।
 
यह निर्विवाद है कि ओसामा अल-कायदा का सरगना था , वह टेलीविजन पर प्रसारित बयानों में कई बार भारत को दुश्मन बता चुका था, अलकायदा खुले तौर पर भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त है... 

जीलानी और शब्बीर शाह तो पाकिस्तान के टुकड़ों पर पलते हैं इनका पाकिस्तान की सलामती की दुआ मांगना व उसे इस्लाम का शहीद बताना तो समझ आता है...
 
पर यह कोलकाता व चेन्नई की मस्जिदों में भी ओसामा के लिये प्रार्थना... ??? क्या कहेंगे इसे... कहीं यह खबर नहीं है कि वहाँ मौजूद किसी ने भी विरोध किया इस बात का...
 
जब यह कहा जाता है कि भारतीय मुस्लिमों में एक बहुत छोटा परंतु मुखर तबका ऐसा है जो केवल धर्म व जेहाद के नाम पर भारतविरोधी गतिविधियों में लिप्त आतंकियों में अपने नायक तलाशता है व उनका साथ देता है... और बाकी उनके सामने एक कायर चुप्पी ओढ़ लेते हैं ।
 
तो क्या यह धारणा सही नहीं है ? 
 
 
 
... 
 
 



शनिवार, 7 मई 2011

जाओ या तो मार आओ या उठा लाओ हाफिज सईद, मसूद अजहर, सैयद सलाऊद्दीन और दाउद इब्राहीम को पाकिस्तान से !!!

.
.
.

जब से अमेरिका ने एबटाबाद कारनामा किया है, आप चाहे हमारे मीडिया को देखें, टीवी पर आने वाले रक्षा-विश्लेषकों को या गली मोहल्ले पर होने वाली चर्चा को... हर जगह हर कोई यही कह रहा है कि भारत को भी ऐसा ही करना चाहिये...

सही है कि हमारे पास दुनिया के सर्वश्रेष्ठ व अपनी आन के लिये कुरबानी का जज्बा रखने वाले जाबांज लड़ाके हैं... पर क्या हमारे पास उसी श्रेणी की तकनीक, उन्नत हथियार, पक्की इंटेलिजेंस है... देखिये कैसे हैं हमारे हेलीकॉप्टर ....  एक दूसरी बड़ी बात जिसे सब भूल रहे हैं वह यह है कि अमेरिका पाकिस्तान से हजारों मील दूर सात समंदर पार है और पाकिस्तान चाह कर भी वहाँ हमला नहीं कर सकता... जबकि हमारी सीमा उससे मिली है... 

क्या अब भी आप सोचते हैं कि भारत के कमांडोज् को जाकर मार या उठा आना चाहिये  हाफिज सईद, मसूद अजहर, सैयद सलाऊद्दीन और दाउद इब्राहीम को पाकिस्तान में... ?

क्या हम युद्ध झेलने के लिये तैयार हैं ?




...






शुक्रवार, 6 मई 2011

क्या सचमुच में इतने ज्यादा स्याह काले हैं हम हिन्दुस्तानी...

.
.
.
सुबह आस्था चैनल पर अक्सर योगऋषि स्वामी रामदेव जी को भ्रष्टाचार के विरूद्ध संघर्ष का आह्वान करते सुनता हूँ...

अक्सर वे कहा करते हैं कि हमारे देश का चार सौ लाख करोड़ रूपये के बराबर काला धन विदेशी बैंकों में जमा है...

वित्तीय वर्ष २०१० के दौरान हमारे देश का सकल घरेलू उत्पादन ( Gross Domestic Product ) था बासठ लाख इकतीस हजार करोड़... ( यहाँ देखें ) 

इसका अर्थ है कि हमारे देश का विदेशों में जमा काला धन हमारे आज के GDP का सात गुना है, यदि मुद्रास्फीति को भी गणना में लेकर एडजस्ट किया जाये तो नतीजा निकलेगा कि हमारे देश के तकरीबन पंद्रह साल के सकल घरेलू उत्पाद के बराबर हमारा कालाधन विदेशों में जमा है...

यह ध्यान रखते हुऐ कि हमें आजाद हुऐ अभी मात्र तिरेसठ ही साल हुऐ हैं क्या आपको चार सौ लाख करोड़ रूपये के कालेधन का यह आंकड़ा INFLATED नहीं लगता है ?

सही आंकड़ा कहाँ से मिल सकता है ?



...

गुरुवार, 5 मई 2011

इनको नफा होगा या नुकसान ?

.
.
.

अमेरिका के हाथों ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, जो मिशन २०१४ के लिये राहुल गाँधी के चाणक्य भी कहे जाते हैं, की बयानबाजी हम सभी देख रहे हैं...

मेरा आज का सवाल है कि उनकी इस बयानबाजी से उनकी पार्टी को लाभ होगा या हानि ?

कुछ अंदाजा है तो बताइये...





...

बुधवार, 4 मई 2011

अमेरिकन स्क्रिप्ट, पाकिस्तानी संगीत, चालीस हीरो, एक विलेन, जोरदार प्रमोशन... क्या होगा बॉक्स आफिस पर

.
.
.

एक कहानी सुना रहा है दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क :-

चार हैलीकॉप्टर उड़े अफगानिस्तान से, ४० अमेरिकी SEAL कमाँडोज को साथ लिये हुऐ, यह उतरे एबटाबाद कैन्टोनमेंट में पाकिस्तान मिलिट्री एकेडमी से महज कुछ सौ गज दूर एक ' फोर्टिफाईड कॉम्प्लेक्स ' में, चालीस मिनट की ' गन फाइट ' हुई, ओसामा मारा गया, तकनीकी खराबी आने के कारण एक हैलीकॉप्टर को टीम ने वहीं नष्ट कर दिया, ओसामा की लाश साथ ले हैलीकॉप्टर जब उड़ कर पाकिस्तान की हवाई सीमा से बाहर चले गये... तब अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को बताया गया !

पाकिस्तानी तंत्र भी इस कहानी में सुर से सुर मिला रहा है !!

आप बताइये कि क्या बाकी दुनिया को इस कहानी पर यकीन आयेगा ?

यह फिल्म बॉक्स आफिस पर चल सकती है क्या ??








...

सोमवार, 2 मई 2011

ऐ जी ! ओ जी ! टू जी पर कुछ न कर पायी पीऐसी, अब क्या करेगी जेपीसी ? वैल, लेट्स सी...

.
.
.

पीऐसी ( लोक लेखा समिति ) की टू जी रिपोर्ट पर क्या हुआ, आप सबने देखा... यह सभी समितियाँ दलीय आधार पर गठित होती हैं और हर दल के सदस्यों की हरसंभव कोशिश होती है कि उनके दल के राजनीतिक हितों पर कोई आँच न आये... कुल मिलाकर लब्बोलुबाब यह कि अपने दल के लिये Political Brownie Points अर्जित  करने पर विशेष ध्यान रहता है सभी का... ऐसी स्थिति में अक्सर ...  'Truth' is the first casualty !

अब जेपीसी ( संयुक्त संसदीय समिति ) मामले की जाँच करेगी... 

इस सारी कवायद का क्या नतीजा निकलेगा ?

अंदाजा लगाना चाहेंगे आप ?






...