शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

अधिकारपूर्वक सवाल : सवाल करने का अधिकार , चंद हाई प्रोफाइल एक्टिविस्ट, मीडिया, आप और मैं भी...

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लोकतंत्र हैं हम... 

सर्वव्यापी भ्रष्टाचार से त्रस्त अन्ना हजारे व अन्यों को लगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारे वर्तमान नियम नाकाफी हैं... वे अनशन पर बैठे, उनका हक था... बिके हुऐ पर खुद को बेदाग दिखाने के लिये गंगा नहाने को प्रयासरत मीडिया, पेज थ्री क्राउड, मोमबत्ती गैंग, एक्टिविस्ट कहलाते व जन हित के नाम पर अपने हित साधते हमारे ' स्वयंभू नागरिक प्रतिनिधियों' ने इसे उछाला, उनका हक था... थोड़ी बहुत ही सही, आम जनता भी साथ गई, उसका हक था...

आश्चर्यजनक तेजी दिखाते हुऐ सरकार ने उनकी बातें मान ली, उसका हक था... चंद लोग पूरे भारत के नागरिकों के प्रतिनिधि मान/बना दिये गये, बनाने वाले का हक था...

पर आज यदि हमारे कुछ चुने हुऐ जन प्रतिनिधि जन-लोकपाल बिल ड्राफ्टिंग कमेटी के कुछ नागरिक सदस्यों के अतीत में किये कुछ कृत्यों के बारे में कुछ असहज करते हुऐ सवाल उछाल रहे हैं... तो इसमें क्या गलत है, क्या ड्राफ्टिंग कमेटी के नागरिक प्रतिनिधियों को इन सवालों का जवाब नहीं देना चाहिये... क्या नेताओं को यह सवाल पूछने का हक नहीं है ?






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7 टिप्‍पणियां:

योगेन्द्र पाल ने कहा…

हक है बिल्कुल हक है

और उन बिल ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्यों को इसका जबाब भी देना चाहिए

Udan Tashtari ने कहा…

बिल्कुल हक है

Shah Nawaz ने कहा…

बिल्कुल हक है.

सञ्जय झा ने कहा…

HAR-EK KO SAWAL KARNE KA ADHIKAR HAI.....

HAR-EK KO JAWAW DENE KA KARTAVYA HAI.....


PRANAM.

निशांत मिश्र - Nishant Mishra ने कहा…

है.

हल्ला बोल ने कहा…

समय मिले तो इस पोस्ट को देखकर अपने विचार अवश्य दे
देशभक्त हिन्दू ब्लोगरो का पहला साझा मंच
इनका अपराध सिर्फ इतना था की ये हिन्दू थे

हल्ला बोल ने कहा…

-------- यदि आप भारत माँ के सच्चे सपूत है. धर्म का पालन करने वाले हिन्दू हैं तो
आईये " हल्ला बोल" के समर्थक बनकर धर्म और देश की आवाज़ बुलंद कीजिये...
अपने लेख को हिन्दुओ की आवाज़ बनायें.
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क्या यही सिखाता है इस्लाम...? क्या यही है इस्लाम धर्म