शनिवार, 30 अप्रैल 2011

ईश्वर एक ही है... क्या वाकई ?

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चीख चीख कर कहते हैं सब धर्म कि :-


वह एक ही है !


पर मुझे तो नहीं लगता दोस्तों, कहीं वह जानवरों को जिबह कर/बलि ले खुश होता है तो कहीं अहिंसा से... कहीं वह बुतपरस्ती से खुश होता है कहीं बुतों को तोड़ने से... कहीं आप उसका चित्रण करो तो वह प्रसन्न होगा, कहीं आप अगर उसका चित्र या बुत बना दो तो वह नाराज हो जायेगा... कहीं वह तुरंत न्याय कर देता है तो कहीं वह आखिरी दिन ही आपका हिसाब करेगा... कहीं उसको रोजाना आपसे अपनी पूजा करवाना अच्छा लगता है तो कहीं वह इसी में खुश है कि कभी-कभी आप उसे याद कर लो...


मुझे तो नहीं लगता कि वह एक है...


मेरा तो मानना है कि वह हर किसी के लिये अलग है, जैसा आप चाहते हो वह भी वैसा ही बन जाता है/ बनने को तैयार है...


जैसे कि मेरे लिये वह अस्तित्वहीन हो गया है...

क्यों क्या खयाल है आपका ?




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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

पोल खोलू सवाल : कहाँ गया है बाकी का माल ? कुछ अंदाजा तो लगाईये भाई...

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2G घोटाला किया गया इसमें संदेह नहीं, जनता और सरकार को चूना लगाकर चंद पूंजिपतियों के स्वामित्व वाली गिनी चुनी टेलीकॉम कंपनियों को बेशकीमती स्पैक्ट्रम एक अपारदर्शी प्रक्रिया द्वारा कौड़ियों के मोल अलॉट कर दिया गया, यह आप सभी जानते हैं...

विभिन्न नियंत्रक व जाँच एजेंसियों ने इस घोटाले द्वारा देश को हुऐ नुकसान का आकलन सैंतीस हजार करोड़ रूपये से लेकर एक लाख करोड़ रूपये से भी ज्यादा तक होने का लगाया है... अगर निचले आँकड़े को ही सही माना जाये तो भी दस्तूर के मुताबिक कमीशन के दस परसेंट बनते हैं तकरीबन साढ़े तीन हजार करोड़... जबकि हमारी प्रीमियर जाँच एजेंसी अभी तक महज दो-तीन सौ करोड़ की मनी ट्रेल ही पकड़ पाई है...



आज का पोल खोलू सवाल है...




कहाँ गया बाकी का माल ?





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गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

आज का कुछ गंभीर सवाल : फेविकोल है या गैस कटर ? क्या है यह दोस्तों, बताइये तो जरा......

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अक्सर लोग कहते हैं कि यह दिलों को जोड़ता है, यह न होता तो छिन्न-भिन्न हो चुकी होती हमारी यह दुनिया... वैसे तो इसके अनेक फायदे बताये जाते हैं पर बताने वाले सबसे बड़ा फायदा यह बताते हैं कि इसी की वजह से इंसान की कौम एक है...

खैर यह सब तो कहने की बाते हैं पर जमीनी हकीकत है कि इसी की वजह से दुनिया के सारे झगड़े, लफड़े, फसाद, आतंकवाद, सीमायें, नफरत और इंसान की इंसान से दूरी है... कम से कम मुझ अल्पज्ञ का तो यही आकलन है...

तो जनाब आज का सवाल है :-

निम्न में से कौन सी बात को सही मानते हैं आप ?


१- धर्म जोड़ता है तोड़ता नहीं !

२- धर्म तोड़ता है जोड़ता नहीं !



जवाब देंगे न ?




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शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

अधिकारपूर्वक सवाल : सवाल करने का अधिकार , चंद हाई प्रोफाइल एक्टिविस्ट, मीडिया, आप और मैं भी...

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लोकतंत्र हैं हम... 

सर्वव्यापी भ्रष्टाचार से त्रस्त अन्ना हजारे व अन्यों को लगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारे वर्तमान नियम नाकाफी हैं... वे अनशन पर बैठे, उनका हक था... बिके हुऐ पर खुद को बेदाग दिखाने के लिये गंगा नहाने को प्रयासरत मीडिया, पेज थ्री क्राउड, मोमबत्ती गैंग, एक्टिविस्ट कहलाते व जन हित के नाम पर अपने हित साधते हमारे ' स्वयंभू नागरिक प्रतिनिधियों' ने इसे उछाला, उनका हक था... थोड़ी बहुत ही सही, आम जनता भी साथ गई, उसका हक था...

आश्चर्यजनक तेजी दिखाते हुऐ सरकार ने उनकी बातें मान ली, उसका हक था... चंद लोग पूरे भारत के नागरिकों के प्रतिनिधि मान/बना दिये गये, बनाने वाले का हक था...

पर आज यदि हमारे कुछ चुने हुऐ जन प्रतिनिधि जन-लोकपाल बिल ड्राफ्टिंग कमेटी के कुछ नागरिक सदस्यों के अतीत में किये कुछ कृत्यों के बारे में कुछ असहज करते हुऐ सवाल उछाल रहे हैं... तो इसमें क्या गलत है, क्या ड्राफ्टिंग कमेटी के नागरिक प्रतिनिधियों को इन सवालों का जवाब नहीं देना चाहिये... क्या नेताओं को यह सवाल पूछने का हक नहीं है ?






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गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

हिन्दी ब्लॉगरों से सवाल : ऐसे में क्या करोगे आप ?

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जिंदगी की चक्की में पिसने के कारण यदि आप के पास नेट के लिये समय बहुत ही सीमित हो तो आप क्या करना ज्यादा सही मानेंगे... अपने ब्लॉग पर पोस्ट लिखना अथवा दूसरों के ब्लॉग पढ़ कर टिप्पणियाँ देना ?



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बुधवार, 20 अप्रैल 2011

दहकता सवाल : एक कायर कौम, जाति का सम्मान, मोमबत्ती मार्च, मसीहा की तलाश और क्रान्ति ...

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यह खबर पढ़ें... बलात्कार के मामले में सजा पाये हुऐ व फिलहाल पेरोल पर रिहा एक दरिंदे ने गाँव के २०० लोगों की मौजूदगी में दो असहाय विधवाओं को पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया और पूरा गाँव इस काम को जातिगत सम्मान के नाम पर मौन समर्थन देता रहा... क्या इस गाँव के बाशिंदों को जन-पुलिस व जन-प्रशासन के लिये अब जंतर मंतर पर अनशन करना चाहिये ?

उसी जाति-क्षेत्र-धर्म के नाम पर रहनुमा बने हमारे ही बीच से निकले लोग संवैधानिक संस्थाओं की सरेआम हत्या कर रहे हैं/करेंगे, संविधान की आत्मा के साथ बलात्कार होता है/ रहेगा... मोमबत्ती मार्च भले ही हर चौराहे पर हों... जनलोकपाल भी बन जाये कोई... पर कोई क्रान्ति नहीं आने वाली... हमें ईमानदारी पसंद तो है पर अपनी नहीं, पड़ोसी की... मसीहा का इंतजार करती, परंतु नैतिक तौर पर कायर एक कौम क्या इससे बेहतर कुछ का सपना देखने का हक रखती है ?





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आज का अटपटा सवाल : ग्लैमर, सुन्दरता, आकर्षण, महिलायें और स्कर्ट ...

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एक खबर है यहाँ पर... जिसके अनुसार बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन ने एक नया ड्रेस कोड लागू किया है जिसके अनुसार १ मई से सभी महिला बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिये स्कर्ट पहनना अनिवार्य होगा... खिलाड़ी यदि चाहें तो ' शॉर्ट्स ' या निकर पहन सकती हैं, परंतु उन्हें उसके ऊपर स्कर्ट पहनना अनिवार्य होगा...

सूत्रों के मुताबिक ऐसा महिला बैडमिंटन को आकर्षक बनाने व टेनिस की तरह ग्लेमराइज करने के लिये किया गया है...

मेरा सवाल यह है कि महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन को मैदान पर जाकर या टेलिविजन पर देखने वाले दर्शक खेल को देखते हैं या ग्लैमरस, आकर्षक व सुन्दर खिलाड़ियों को ?



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मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

असहज करता सवाल : यज्ञ, आहुतियाँ, मंत्र जाप व यज्ञ फल...

हमारे प्राचीन सनातन धर्मग्रंथों में अनेक जगह इस बात का वर्णन है कि किसी मानव ने कोई यज्ञ किया व उसके परिणाम स्वरूप यज्ञ फल के रूप में यज्ञकुन्ड से कोई अचूक अस्त्र, योग्य मानव, सुन्दर स्त्री आदि आदि प्रकट हुऐ...

क्या आप इस बात को मानते हैं कि आज कोई सुपात्र यदि पूरे विधिविधान से मंत्रोच्चारण करते हुऐ यज्ञकुन्ड में आहुतियाँ देते हुऐ यज्ञ करे तो उस यज्ञ के परिणामस्वरूप हमारे देश को कोई अचूक ब्रह्मास्त्र मिल सकता है... या फिर हमें यह तकनीकें महंगे दामों में अन्य देशों से ही खरीदनी पड़ेंगी ?






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आज का सवाल : क्या आप भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के बारे में इस धारणा से सहमत हैं ?

न्यूक्लियर डील पर हुऐ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार बचाने के लिये धन के लेनदेन के विकीलीक्स उद्घाटन, कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान हो रहे घोटालों की पूर्व में ही जानकारी होने के बाद भी कोई प्रभावी कार्यवाही न करना, अपनी नाक के नीचे 2G घोटाला यानी जनता के धन की सत्ता के दलालों व कॉर्पोरेट द्वारा दिनदहाड़े लूट होने देना, पी. जे. टॉमस को सीवीसी बनाने के लिये उनके पूर्व के पूरे रिकार्ड को दरकिनार करना व इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में भी अंत तक उनका बचाव करना...

यह सब देखने के बाद भी क्या आप यह मानते हैं कि हमारे प्रधानमंत्री एक ऐसे प्रधान मंत्री हैं जिनकी योग्यता व ईमानदारी पर कोई शक नहीं किया जा सकता है (Whose Ability & Integrity is beyond any doubt  ) ?





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सोमवार, 18 अप्रैल 2011

पिछले काफी दिनों से यह देखने में आया है कि योगऋषि रामदेव जी प्रात: कालीन प्रसारण के दौरान दोनों हाथों के नाखूनों को आपस में रगड़कर ' बालों को सफेद होने से बचाये रखने ' वाला यौगिक आसन अब नहीं सिखाते... कहीं इस बात का संबंध स्वयं योगऋषि के बालों में बढ़ती सफेदी से तो नहीं है ?


क्या आपको यह नहीं लगता कि जंतर-मंतर पर बैठे अन्ना के अनशन का इस्तेमाल भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे व भ्रष्टों के साथ मिले व उनको बेशर्मी से प्रमोट करने वाले हमारे तथाकथित मेनस्ट्रीम मीडिया ने 2G घोटाले मे्ं उसकी भूमिका के कारण आये दागों को धोने व खुद पर से ध्यान हटाने के लिये किया है व इस तरह एक बार फिर हमेशा की तरह आम आदमी के गुस्से की परिणति के रूप में कुछ आमूलचूल बदलाव होने से पहले कुछ कॉस्मेटिक उपायों के जरिये उस गुस्से को शाँत करने में हमारा तंत्र सफल रहा है ?